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राज को राज ही रहने दो…

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आचार्य चाणक्य ने कहा है कि किसी भी व्यक्ति को अपने मन का भेद नहीं बताना चाहिए .इसी में व्यक्ति की सुरक्षा व भलाई है ,क्योंकि जब एक बार राज पर से पर्दा उठता है तो जीवन अशांत हो जाता है. कई जिंदगियां तबाह हो जाती हैं. अतः चाणक्य की सलाह है कि अपने रहस्य को किसी के साथ साझा न करें. चाणक्य दूरदर्शी व्यक्ति थे .वे इस बात को अच्छी तरह जानते थे कि समय के अनुसार इंसान तो क्या चीजें तक बदल जाती हैं .आज जो आप का करीबी है वह कल आपका जानी दुश्मन भी बन सकता है. अतः उसे आज अपना करीबी समझकर राज उगल देंगे तो कल जब वह आपका दुश्मन होगा तो क्या आप का राज सुरक्षित रख सकेगा? क्या वह इसका फायदा उठाना नहीं चाहेगा?

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