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नेपाली भाषी शबनम हिंदी की गौरव हैं

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कौन कहता है कि भाषा किसी एक प्रदेश या किसी खास वर्ग की मिल्कियत हो सकती है. भाषा कोई भी हो किसी भी जाति,धर्म, वर्ग के लोग उस पर अपनी पकड़ बना सकते हैं. ऐसा ही एक उदाहरण देखने को मिला है जब एक नेपाली भाषी शबनम नामक एक युवती उत्तर बंगाल विश्वविद्यालय की हिंदी टॉपर आई है. शबनम जिसकी मातृभाषा नेपाली है, उसने अपनी भाषा से अलग हिंदी भाषा को अपनाया और इसमें मेहनत करते हुए वह आज उत्तर बंगाल विश्वविद्यालय की हिंदी टॉपर हुई है. नागराकाटा ब्लाक के चेंगमारी नेपाली लाइन इलाके की यह लड़की शबनम ने हिंदी माध्यम से अपनी पढ़ाई शुरू की थी. कॉलेज की पढ़ाई उसने बानरहाट हिंदी कॉलेज में की और वह हिंदी से ही आगे बढ़ती रही. शबनम का हिंदी से लगाव देखकर कोई नहीं कह सकता कि वह हिंदी भाषी नहीं है. एक शबनम ही क्यों ऐसे अनेक लोग हैं,अनेक युवक-युवतियां हैं जो अपनी भाषा के अलावा विभिन्न भाषाओं पर अधिकार रखते हैं. कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो अपनी मातृभाषा को छोड़ कर अपनी पसंद की भाषा अपना लेते हैं और उसमें कुछ करने की अपनी प्रेक्टिस व महत्वाकांक्षा को साकार करने की कोशिश करते हैं. शबनम निश्चित रूप से उन लोगों के लिए एक उदाहरण है जो केवल अपनी भाषा ही नहीं अन्य भाषाओं पर भी अपनी पकड़ बनाए रखने के इच्छुक हैं.