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मी टू समाधान नहीं जंजाल

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A picture shows the messages "#Me too" and #Balancetonporc ("expose your pig") on the hand of a protester during a gathering against gender-based and sexual violence called by the Effronte-e-s Collective, on the Place de la Republique square in Paris on October 29, 2017. #MeToo hashtag, is the campaign encouraging women to denounce experiences of sexual abuse that has swept across social media in the wake of the wave of allegations targeting Hollywood producer Harvey Weinstein. / AFP PHOTO / Bertrand GUAY (Photo credit should read BERTRAND GUAY/AFP/Getty Images)

जब-जब देश में शांति व तरक्की का माहौल बनता है, तब-तब कुछ ना कुछ, कोई ना कोई ऐसा बखेड़ा खड़ा हो जाता है कि शांति छिन्न-भिन्न हो जाती है| आजकल हमारे देश में एक नई चर्चा हो रही है| यह है मी टू…| यह एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जहां यौन शोषण से पीड़ित अथवा किसी तरह की ऐसी घटनाओं का सामना कर चुकी महिलाएं अपने गम को एक दूसरे से सोशल मीडिया पर शेयर करती हैं| हमारे देश में इस तरह के आयोजन को लेकर विवाद के साथ-साथ अशांति भी बढ़ गई है| मी टू कार्यक्रम में महिलाओं द्वारा अपने जीवन में घटित घटनाक्रमों को बताया जाता है और एक तरह से पुरुषों को उत्तरदाई ठहराया जाता है| हमारे देश में कानून ऐसा है इसके आधार पर महिलाएं एफ.आई.आर. तक दर्ज करा सकती हैं अथवा कानून का सहारा ले सकती हैं| अब प्रश्न यह है कि क्या मी टू के जरिए महिलाओं को उनका हक मिल सकता है अथवा उनके साथ इंसाफ हो सकता है? इसके जवाब में तो यही कहना होगा कि यह महिलाओं के इंसाफ या हक का समाधान नहीं बल्कि एक जंजाल है, जो पुरुषों को महिलाओं से दूर करता है| इस मंच के आयोजन के बाद अब तक राजनीति से लेकर फिल्मों तक की कई हस्तियां घेरे में आ चुकी हैं| यह स्वाभाविक है कि हर व्यक्ति के जीवन में कोई न कोई ऐसी घटना घटी होती है, जिसको वह याद करना नहीं चाहता है| ऐसा कोई व्यक्ति नहीं होगा, जिसका जीवन एक दम से पाक साफ़ रहा हो, आमतौर पर व्यक्ति कुछ न कुछ गलतियां कर चुका होता है, जिससे वह दूरी रखना चाहता है| समाज में स्त्री और पुरुष साथ-साथ रहते है और साथ मिलकर काम करते हैं| ऐसे में कभी-कभी किसी महिला के साथ छेड़छाड़ या दूसरे तरीके से अभद्र व्यवहार जाने-अनजाने हो जाता है| हालांकि यह गलत है और उसका उसी समय इसका समाधान कर लिया जाना चाहिए| लेकिन अगर ऐसी घटना एक लम्बे समय के बाद चर्चा का विषय बने तो इससे और कुछ नहीं दो परिवारों में अशांति ही उत्पन्न होती है| उस समय ना पुरुष के द्वारा और ना ही महिला के द्वारा आवाज उठाई जाती है और जब ऐसी घटना एक लंबे अरसे के बाद दुबारा या अचानक उठाई जाए और उसके आधार पर किसी पुरुष को फंसाया जाए तो इसी से समझा जा सकता है इस प्लेटफार्म का कितना दुरुपयोग होगा| ताजा मामला नाना पाटेकर और तनुश्री दत्ता का है| घटना 10 साल पुरानी है, लेकिन तनुश्री दत्ता ने नाना पाटेकर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की धमकी दी है,यह कितना औचित्य है| अगर इस मंच के बारे में सही से विश्लेषण किया जाए, तो यह कहना कोई गलत नहीं होगा कि मी टू प्रोग्राम गड़े मुर्दे को उखाड़ने तथा असुरक्षा की भावना को बढ़ाने के अलावा इसका अन्य कोई उपयोग नहीं है| यह सही है कि लोकतंत्र में हर किसी को अभिव्यक्ति की आजादी मिली है लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि हम कुछ ऐसे कार्य करें, जिससे देश में अशांति और असुरक्षा की भावना उत्पन्न हो| तरक्की के इस युग में जहाँ स्त्री-पुरुष मिलकर काम करते हों, ऐसे में मी टू प्रोग्राम स्त्री और पुरुष में दूरियां ही बढाता है| भाजपा के एक नेता उदित राज ने मी टू प्रोग्राम की आलोचना करते हुए कहा था कि कुछ महिलाएं ऐसी भी होती हैं, जो ऐसे प्रोग्राम के जरिए पुरुषों को ब्लैकमेल करती हैं| जब उन्हें पैसा मिल जाता है तो वे शांत हो जाती हैं| हालांकि उनके बयान की विभिन्न राजनीतिक दलों ने निंदा भी की थी, लेकिन देखा जाए तो उन्होंने कोई गलत नहीं कहा था| हमारे देश में आवश्यकता इस बात की है कि हम कोई ऐसा प्लेटफॉर्म बनाएं, जो सामाजिक स्तर पर हमारे बीच सौहार्द और समन्वय स्थापित करें| एकता और खुशहाली उत्पन्न करे|

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