Home India बलात्कार…एक गंभीर समस्या, एक माह में रेप के 63 मामले

बलात्कार…एक गंभीर समस्या, एक माह में रेप के 63 मामले

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हमारे समाज में बलात्कार एक बड़ी समस्या बनती जा रही है| बलात्कार एक ऐसा अपराध है जिसमें लड़कियों की ज़िन्दगी बर्बाद हो जाती है| वे ना घर के रह जाती हैं और ना घाट के| बलात्कार के मामलों में केवल लड़कियां या लड़के ही कसूरवार हों, ऐसा भी नही| हमारा समाज भी उतना ही जिम्मेवार है| हमारी शिक्षा व्यवस्था संस्कार भी ऐसा है कि हम ऐसी घटनाओं पर लगाम नहीं लगा पाते| व्यक्ति तथा उसकी सोच में दिनोंदिन आ रही गिरावट बलात्कार जैसे अपराधों को जन्म देता है| शरीर विज्ञान शास्त्रियों के अनुसार 15 से 18 वर्ष के बीच लड़के-लड़कियों में शारीरिक बदलाव और हार्मोन का स्राव होता है, जिसके कारण लड़के लड़कियों का प्रेम आकर्षण बढ़ता है| उनकी सपनों की दुनिया अच्छी लगने लगती है| सिलीगुड़ी, जलपाईगुड़ी, कूचबिहार, उत्तर दिनाजपुर आदि इस तरह से पूरे उत्तर बंगाल में पिछले 1 महीने की घटनाओं का आकलन किया जाए, तो रेप के 63 मामले सुर्खियों में आए| हालांकि इन मामलों में केवल 10 फीसदी मामलों में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए लगभग एक दर्जन आरोपी युवकों को गिरफ्तार किया| ताजा मामला सिलीगुड़ी से सटे किशनगंज से जुड़ा है, जिसमें एक लड़के ने अपनी प्रेमिका से शादी का झांसा देकर उसके साथ रेप किया| इतना ही नहीं लड़की को नशीली चाय पिलाकर अपने दोस्तों को भी सामूहिक बलात्कार का अवसर दिया| लड़की ने किशनगंज थाना में जो प्राथमिकी दर्ज कराई है, उसमें कहा गया है कि बातों ही बातों में एक लड़के से उसे प्यार हो गया| लड़के ने उसे एक स्थान पर बुलाया और फिर उसके साथ शारीरिक संबंध स्थापित किया| इसके बाद से दोनों के मिलने-जुलने का क्रम शुरू हुआ| धीरे-धीरे लड़के ने लड़की को अपने दोस्तों में भी भेजना शुरू कर दिया| वह लड़की को भरोसा दिलाता रहा कि वह उससे शादी कर लेगा, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया| आरोपी लड़के ने इतना ही नहीं बल्कि वह लड़की को शादी के नाम पर गुमराह करते हुए उसे हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर आदि जगह ले गया और घुमाने के नाम पर अपने दोस्तों के साथ लड़की का यौन-शोषण करता रहा| एक दिन लड़की उनके चंगुल से भाग निकली और किसी तरह किशनगंज आ गई| यहाँ घरवालों को सारी बात बताई| जिसके बाद घरवाले लड़की को लेकर थाने में गए और प्राथमिकी दर्ज कराई| इस तरह की कई घटनाएं हम देखते हैं| इन घटनाओं का अध्ययन किया जाए तो ऐसा लगता है कि कच्ची उम्र के लड़कों में सही-गलत की परख नहीं होती है और ना ही वे दिमाग से काम लेते हैं| आमतौर पर लड़कियां अत्यंत भावुक होती हैं और उतनी ही संवेदनशील भी, इसलिए वे लड़कों पर जल्दी भरोसा कर लेती हैं और इस तरह लड़कों के बिछाए जाल में फंसकर अपनी जिंदगी बर्बाद कर लेती हैं| बेहतर होगा कि मां-बाप अपनी सयानी होती लड़कियों पर नजर रखें तथा उन्हें सही राह दिखाएं, ताकि ऐसी घटनाओं से बचा जाए|

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