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आधार एक संवैधानिक जरूरत

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आज सर्वोच्च न्यायालय ने चिर प्रतीक्षित आधार कार्ड की मान्यता के संबंध में फैसला सुनाया है. आधार कार्ड को सभी जरूरी सेवा के लिए अनिवार्य करने की केंद्र सरकार की पहल पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला स्वागत योग्य है.सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गयी थी कि आधार से व्यक्तिगत सूचनाये लीक हो जाती है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अभी तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है. यानी सर्वोच्च न्यायालय ने ऐसा मानने से इंकार कर दिया है. सर्वोच्च न्यायालय ने आधार को संवैधानिक मान्यता दी है लेकिन यह जरूरी नहीं कि आधार को ही महत्वपूर्ण मान लिया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पैन कार्ड के लिए आधार जरूरी है, लेकिन नया खाता खुलवाने के लिए आधार जरूरी नहीं है. सुप्रीम कोर्ट के आधार पर दिए गए फैसले का अध्ययन करने की जरूरत है. प्राथमिक रूप से यह कहा जा सकता है कि  न्यायालय का यह फैसला घुसपैठियों द्वारा नागरिकता प्राप्त करने पर कुठाराघात सिद्ध होगा. अब तक ऐसा देखा जाता रहा है कि राज्य या प्रदेश की सरकारें वोट बैंक के लिए घुसपैठियों को आधार कार्ड बनवाकर अपना उल्लू सीधा करती थी.  सर्वोच्च न्यायालय ने माना है कि ऐसे लोगों की पहचान अथवा वोट देने का अधिकार आधार कार्ड नहीं हो सकता. अतः समझा जा रहा है कि इससे घुसपैठियों की घुसपैठ पर रोक लगेगी और राज्य सरकारों को अपना वोट बैंक का लाभ नहीं मिलेगा. पश्चिम बंगाल और असम दो ऐसे प्रदेश हैं जहां घुसपैठियों की तादात अत्यधिक है. कुछ समय पहले केंद्र सरकार ने यह मुद्दा असम के लिए उठाया भी था जिस पर काम चल रहा है. आधार को संवैधानिक मान्यता मिलनी चाहिए और वह सुप्रीम कोर्ट ने दे भी दिया है, लेकिन आधार इतना महत्वपूर्ण नहीं कि व्यक्तिगत जिंदगी से भी ऊपर हो. केंद्र सरकार की इस मंशा पर सर्वोच्च न्यायालय ने रोक लगाई है. आधार को सर्वोच्च न्यायालय ने एक संवैधानिक जरूरत भर बताया है. अलबत्ता व्यक्ति से ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं माना है.

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