Home India ग्राहकों के इंतजार में मिट्टी के दीए बनाने वाले कुम्हार

ग्राहकों के इंतजार में मिट्टी के दीए बनाने वाले कुम्हार

69
0

मिट्टी के दीयों के साथ ही दिवाली का त्यौहार भाता है .लेकिन मिट्टी के दीये सिलीगुड़ी के बाजारों में या तो दिख नहीं रहे हैं अथवा इनका कोई खरीदार नहीं है. जब- जब दिवाली आती है, दीए बनाने वाले कुम्हार 2 महीने पहले से ही दीए बनाना शुरू कर देते हैं. पर जब उनके द्वारा निर्मित दीयों की बिक्री ना हो तो उन्हें काफी दुख होता है. आज सिलीगुड़ी के विभिन्न बाजारों में दीए बनाने वाले कुम्हार अपने दीये लेकर बैठे ग्राहकों को ढूंढ रहे हैं, साथ ही अपनी किस्मत पर आंसू बहा रहे हैं .ऐसा लगता है कि धीरे-धीरे लोगों के बीच से मिट्टी के दीये  का चलन बंद होता जा रहा है . रेल गेट पर जब हमने मिट्टी के दीए बनाने वाले कई लोगों से बात की तो उन्होंने कहा कि अब वह जमाना नहीं रहा, जब लोग मिट्टी के दीयों के कद्रदान होते थे. आज लोग मिट्टी के दीये नहीं बल्कि चीनी दीयों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं . यह सच है कि सिलीगुड़ी बाजार में चाइनीज लाइट छा गई है . इनकी चमक- दमक देखकर उनके आगे मिट्टी के दीये फेल हो गए हैं, और तो और मिट्टी के दीए से भी सस्ते और ज्यादा रोशनी देने के कारण ग्राहक चीनी  दीयों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं और अपने घरों के लिए खरीद रहे हैं.ऐसे में कुम्हारों की सृजनशीलता और कल्पनाशीलता आहत होती है. उन्हें अपनी कला पर दुख होता है. हालांकि कुछ दुकानदारों का कहना है कि मिट्टी के एक मुखी दीये के अलावा दो मुखी ,पंचमुखी आदि दीये लोग पसंद भी कर रहे हैं, लेकिन उनकी कीमत ज्यादा होने के कारण ग्राहकों को रास नहीं आ रहा है. सरसों तेल की महंगाई के कारण लोग आर्टिफिशियल दीयों की तरफ भाग रहे हैं. सिलीगुड़ी के बाजारों में आज मिट्टी के दीये कम और ज्यादा चीन से निर्मित दीयो की भरमार है. सिलीगुड़ी के अनेक दुकानदारों ने टूनी बल्बों के अलावा आधुनिक रंगारंग लाइटो को बाज़ार में उतारा है.ऐसे में इन कुम्हारों का हाल जानने की किसी के पास फुर्सत नहीं है. इनकी मेहनत, कला और लगन देख कर रोना आ रहा है. हमारी भारतीय सभ्यता और संस्कृति में आधुनिक  दीयों का प्रचलन नहीं होते हुए भी हम भारतीय धीरे-धीरे मिट्टी के बने दीयों से दूर होते जा रहे हैं.

Facebook Comments

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here