Home Darjeeling हिंदी दिवस: वाह रे हिंदी प्रेम वाह!

हिंदी दिवस: वाह रे हिंदी प्रेम वाह!

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आज 14 सितंबर यानी हिंदी दिवस है| इस दिन व इस दिन को केंद्रित कर इसके आगे पीछे पूरे सितंबर महीने भर हिंदी का खूब रंग जमता है| हिंदी सप्ताह हिंदी पखवारा व हिंदी में मनाया जाता है| केंद्र सरकार के कार्यालयों में तो इसे लेकर उत्साह का माहौल हो जाता है| अधिकारियों-कर्मचारियों के बीच हिंदी उपयोग को लेकर तरह तरह की प्रतियोगिताएँ होती है| उत्कृष्ट प्रतियोगीयों को नगद पुरस्कार भी दिए जाते हैं| वही, अतिथियों को भी नकद न्योछावर दिया जाता है| यह सब इसलिए होता है की राजभाषा हिंदी का समुचित उपयोग एवं विकास सुनिश्चित हो सके| मगर, वास्तविकता यह है कि सितंबर के आडंबर के साथ ही हिंदी प्रेम की इतिश्री हो जाती है| इतने तक भी कोई बात नहीं थी| मगर, तब क्या कहेंगे जब हिंदी दिवस के मद्देनजर ही हिंदी की बात हिंदी में न होकर अंग्रेजी में हो ? ! जी हां, ऐसा हुआ है| उत्तर बंगाल विज्ञान केंद्र (माटीगाड़ा) की ओर से हिंदी दिवस के लिए अतिथि वक्ता को जो आमंत्रण पत्र दिया गया है वह हिंदी में नहीं बल्कि अंग्रेजी में है| वैसे शुक्र है कि इसी केंद्र का आम आमंत्रण कार्ड हिंदी में है|

शहर के भारती हिंदी विद्यालय के जीव विज्ञान शिक्षक विपिन गुप्ता को हिंदी दिवस पर ‘लोकप्रिय विज्ञान व्याख्यान’ के लिए बतौर अतिथि वक्ता उक्त केंद्र की ओर से अंग्रेजी में आमंत्रित किया गया है| यह बात आम लोगों की नजर में ना आती यदि अतिथि महोदय ने आमंत्रण पत्र को सोशल मीडिया पर सार्वजनिक ना किया होता| इस मामले के नजर में ना आने से सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि न जाने कितने ऐसे कार्यालयों में ‘हिंदी’  ‘हिंदी दिवस’ व ‘हिंदी प्रेम’ का क्या हाल होगा!

हिंदी दिवस के उक्त अंग्रेजी आमंत्रण पत्र वाले पोस्ट पर (खबर लिखे जाने तक) 234 लोगों ने सांकेतिक प्रतिक्रिया व्यक्त की है| उनमें 214 लोगों ने इसे पसंद किया है, तो 14 लोगों ने दिल से पसंद किया है| वही, दो लोगों ने विस्मय जताया है| कुल 25 लोगों ने लिखित प्रतिक्रिया दी है| उनमें केवल छह लोगों ने ही देवनागरी लिपि में हिंदी लिखकर प्रतिक्रिया व्यक्त की है| बाकी के लोगों ने रोमन लिपि में अंग्रेजी अथवा हिंदी में लिखित प्रतिक्रिया दी है| उनमें अधिकांश ने उक्त अतिथि शिक्षक को बधाइयां एवं शुभकामनाएं ही दी है| केवल एक व्यक्ति मनोज कुमार शाह (तीनसुकिया) ने कहा है कि ‘हिंदी भाषा का प्रयोग करें’| इससे समय व समाज के ‘हिंदी प्रेम’ को भी भलीभांति समझा जा सकता है| खैर, इस बाबत जब उक्त अतिथि शिक्षक महोदय विपिन गुप्ता से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इस बिंदु पर उनकी भी नजर पड़ी| इस बाबत उन्होंने संबंधित पक्ष का ध्यान आकृष्ट कराया है| उनकी ओर से कुछ समस्याओं के हवाले से कहा गया कि आइंदा ऐसी गलती नहीं होगी| इस मामले में उत्तर बंगाल विज्ञान केंद्र प्रभारी यानी परियोजना समन्वयक डी. चटर्जी ने भी स्वीकार किया कि ‘यह हमारी कमी है| हमारी गलती है| आगे ऐसा न हो| इसका पूरा-पूरा ध्यान रखा जाएगा’| वैसे उन्होंने इस बाबत अपनी समस्या भी बताई की  उन्होंने यहाँ सीमित संख्या में अधिकारी-कर्मचारी है| उनमें भी हिंदी में दक्ष कोई नहीं है| इसलिए ऐसी समस्या हुई| इससे दूर करने का हरसंभव प्रयास किया जाएगा| सिर्फ विज्ञान केंद्र की ही बात नहीं है| केन्द्रीय सरकारी कार्यालयों के साइन बोर्डो पर गैर किया जाए, तो मालूम चलेगा कि गैर हिंदीभाषी क्षेत्रों हिंदी की क्या दशा व दिशा है| अशुद्धियों का भरमार रहता है| जबकि इसे ठीक करने की भी कोशिश नहीं की जाती है|

(साभार : इरफ़ान-ए-आजम, दैनिक जागरण, दिनांक 14.09.2017)⁠⁠⁠⁠