Home India  प्रति वर्ष बढ़ रही है दुर्घटना में मरने वाले हाथियों की संख्या 

 प्रति वर्ष बढ़ रही है दुर्घटना में मरने वाले हाथियों की संख्या 

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पश्चिम बंगाल में प्रति वर्ष हाथियों के दुर्घटना में होने मृत्यु होने की संख्या बढ़ रही है। दूसरी ओर हाथियों की लगातार हाथियों की जनसंख्या बढ़ रही है। ये दोनों घटनाएं  वन विभाग के अधिकारियों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। उत्तर बंगाल में प्रायः ट्रेन के धक्के से हाथियों की मौत हो रही है। दूसरी ओर दक्षिण बंगाल में जंगल की तुलना में हाथियों की संख्या अधिक हो रही है। रविवार विश्व हाथी दिवस के मौके पर पशु प्रेमियों के लिए ये दोनों घटनाएं चिंता का विषय बना हुआ है। वर्ष 2004 में रेलवे ने सिलीगुड़ी से अलीपुरद्वार तक की रेल लाइन को मीटर गेज से ब्राड गेज में परिवर्तित किया। इसके बाद से ही इस लाइन पर ट्रेन के धक्के से हाथियों की मौत की संख्या दिनों दिन बढ़ रही है। वर्ष 1973 से लेकर 2013  तक ट्रेन के धक्के से 53 हाथियों की मौत हुई थी । वर्ष 2015 -2016 में ट्रेन के धक्के से होने वाली  हाथियों की मौत की संख्या में कमी आई थी। किन्तु पिछले वर्ष से यह संख्या फिर बढ़ रही है। वर्ष 2018 में  अभी तक  ट्रेन के धक्के से चार हाथियों की मौत हो चुकी है। ट्रेन के धक्के के सिवा करंट लगने तथा फ़सल बचाने के लिए किसानों द्वारा प्रयोग किए गए विष के कारण भी हाथियों की मौत हुई है। दूसरी ओर कुछ विशेष हाथियों के लिए बनाए गए कॉरिडॉर में भी हाथियों की मौत हो रही है। आरोप है कि इन घटनाओं के बाद भी रेल एवं वन विभाग की ओर से उचित कदम नहीं उठाया गया। वन विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में प्रतिवर्ष हाथियों की मृत्यु की संख्या बढ़ रही है।

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