Home India लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन का अधिकार..

लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन का अधिकार..

191
0

भारत एक लोकतांत्रिक देश है| लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्राप्त है| हर कोई किसी का समर्थन कर सकता है तो किसी का विरोध भी कर सकता है| सोमवार को सिलीगुड़ी में माकपा की धिक्कार रैली के दौरान पुलिस और वामपंथी दल के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ झड़प और पुलिस को जलाने की कोशिश की खबर आई थी| हालांकि यह आरोप पुलिस की तरफ से लगाया गया है| पुलिस का आरोप है कि वामपंथ के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पुलिस अधिकारियों पर केरोसिन तेल डालकर जलाने की कोशिश की थी| इस मामले की शुरुआत इस्लामपुर गोली कांड के विरोध में वाममोर्चा द्वारा सिलीगुड़ी में निकाली गई धिक्कार रैली की समाप्ति पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पुतले फूंकने के मुद्दे पर हुई थी| वामपंथी नेता सीएम ममता बनर्जी का पुतला फूंकना चाहते थे, लेकिन सिलीगुड़ी थाना के अधिकारी वामपंथी नेताओं को ऐसा करने से रोक रहे थे| वे नहीं चाहते थे कि वामपंथी नेता सीएम का पुतला फूंके| लोकतंत्र में विरोध करने का हर किसी को अधिकार है| अगर कोई राजनीतिक दल किसी नेता या मंत्री का इस तरीके से पुतला फूंक कर अपना विरोध दर्ज कराना चाहता है तो उसे यह आजादी प्राप्त है| पुलिस व कानून का काम है पुतला फूंकने के दौरान शांति व्यवस्था बनी रहे, यह देखना| पुलिस किसी को ऐसा करने से रोक नहीं सकती| हाँ, इस दौरान किसी हिंसक घटना अथवा अशांति को रोकने के लिए वह कोई भी कदम उठा सकती है| सोमवार की घटना में जो कुछ भी हुआ उसके लिए वामपंथी नेताओं के साथ-साथ सिलीगुड़ी पुलिस भी जिम्मेवार है| सिलीगुड़ी थाने के आईसी देवाशीष बोस ने माकपा नेताओं पर आरोप लगाया है कि उन्होंने सुनियोजित साजिश के तहत पुलिसकर्मियों को जलाने की कोशिश की है| उधर माकपा नेताओं ने पुलिस के आरोप का खंडन करते हुए कहा है कि पुतले की छीना -झपटी में केरोसिन तेल छलक कर पुलिस वालों पर गिर पडा, जिसको लेकर पुलिस बवाल बना रही है| खैर यह तो जांच का विषय है इसके पीछे सच्चाई क्या है लेकिन वर्तमान स्थिति में इस घटना के लिए पुलिस भी बेदाग नहीं हो सकती| पुलिस ने अपनी जिम्मेवारी का पूरी तरह से पालन नहीं किया| पुलिस को शांति से कानून का पालन करना चाहिए था| इस तरह से किसी को रोकना ठीक नहीं है| सोमवार की घटना के संदर्भ में सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर और विधायक अशोक भट्टाचार्य ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा है कि सिलीगुड़ी पुलिस सिलीगुड़ी में भी इस्लामपुर जैसा कांड दोहराना चाहती है| यह सारा खेल एक साजिश के तहत खेला जा रहा है| कल देर शाम पुलिस ने माकपा नेताओं के खिलाफ पुलिस को जलाने का मामला दर्ज करके इस घटना में दो माकपा नेताओं को गिरफ्तार किया था| रात्रि लगभग ९.३० बजे सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर और माकपा नेता अशोक भट्टाचार्य जीवेश सरकार के साथ सिलीगुड़ी थाना पहुंचे| उन्होंने सिलीगुड़ी थाना के आईसी से बात करके मामले को सुलझाने की कोशिश की थी| बहरहाल मामला तो एक-दो दिन में शांत तो हो ही जाएगा, लेकिन इस घटना के जरिये यह प्रश्न उठाना भी स्वाभाविक है कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन के अधिकार को छीना जा सकता है?