Home India सर्वोच्च न्यायालय का स्वागत योग्य फैसला

सर्वोच्च न्यायालय का स्वागत योग्य फैसला

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सुप्रीम कोर्ट ने 800 साल पुरानी एक कुप्रथा समाप्त करके महिलाओं को उनका सैकड़ों साल पुराना अधिकार दिला दिया है| महिलाएं एक लंबे समय से मांग कर रही थीं कि केरल में स्थित सबरीमाला मंदिर का द्वार उनके लिए खोल दिया जाए| मालूम हो कि इस मंदिर में केवल पुरुषों को ही जाने की इजाजत थी| इस मंदिर में 10 -50 वर्ष की उम्र की महिलाओं को जाने की इजाजत नहीं थी| इसके पीछे मान्यता थी कि मंदिर के भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी स्वरूप हैं| 10 -50 वर्ष की महिलाओं को मासिक धर्म होता है, इसलिए वे शुद्ध नहीं होती| सुप्रीम कोर्ट ने पुरानी मान्यता को रद्द कर दिया है और हर उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की इजाजत दे दी है| सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि पूजा अर्चना का अधिकार सभी को है| इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय ने एडल्ट्री केस को भी रद्द कर दिया था और एक हफ्ते में महिलाओं के हक में दो-दो फैसले सुना कर यह साबित करने की कोशिश की है कि देश में “यत्र पूज्यते नार्यस्तु पूज्यते देवा”, अर्थात महिलाओं का सम्मान करने से देश की तरक्की और विकास होगा|