Home Entertainment टीनेजर को बर्बाद करने का पूरा इंतजाम है सिलीगुड़ी के पबों में!

टीनेजर को बर्बाद करने का पूरा इंतजाम है सिलीगुड़ी के पबों में!

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नारी का सम्मान करने वाले देश में हो रहा है नारी का अपमान

हमारी भारतीय सभ्यता व संस्कृति में स्त्रियों को ऊँच्चा सम्मान दिया गया है| स्त्री को नारी शक्ति, गृहलक्ष्मी, देवी, ममतामयी माँ और न जाने क्या-क्या कहा गया है| उसी विरासत व परम्परा को पालन करते हुए हमारी सरकार ने भी नारी शक्ति को सबसे ऊपर रखा है| हमारे पूर्वजों के लिए पर्दा प्रथा को जड़ से खत्म करने की जंग आसान नहीं रही होगी| आज हम २१वीं सदी में प्रवेश कर रहे हैं| कहने के लिए तो नारी शक्तिशाली और देवी स्वरूपा है पर सच तो यह है कि नारी का सम्मान करने वाले आज नारी के शरीर को महज एक खिलौना ही समझ कर पेश कर रहे हैं|  हम बात कर रहे हैं सिलीगुड़ी में कुकुरमुत्ते की तरह फैले बार और पबों की| बार और पबों की संस्कृति में कहीं भी नारी सम्मान की झलक नहीं मिलती| सिलीगुड़ी के कुछ बार और पब वाले नारी को उपभोग की वस्तु की तरह पेश कर रहे हैं और कहीं ना कहीं हमारे युवाओं को भ्रमित करने में लगे हुए हैं| नाम नहीं बताने की शर्त पर कई युवाओं ने स्वीकार किया कि, वे अपने परिवार-जनों को बिना बताए दोस्तों के साथ पब इंजॉय करने जाते हैं| क्यों के जवाब में उन्होंने बताया कि पबों की दुनिया में ग्लैमर और आकर्षण होता है जिसके कारण वे खुद पर नियंत्रण नहीं रख पाते| कुछ पबों में युवाओं को फांसने का पूरा-पूरा इंतजाम रहता है| कईयों ने तो यह भी कहा कि उन्हें धोखे से ड्रिंक पिलाया जाता है|  कई दफा नशे की हालत में वहां आए लोगों के बीच लडकियों के साथ मस्ती करने को लेकर हाथापाई तक हो जाती है| ये महिलाओं को प्रलोभन देने के उद्देश्य से हर शनिवार व रविवार को उनके लिए ख़ास तोहफे रखते हैं| इनमें फ्री एंट्री, ड्रिंक और लज़ीज़ खाना फ्री होता है| पर इनकी शर्त कुछ ऐसी होती है जो किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं कही जा सकती| वैसे भी कहा भी गया है कि फ्री की दुगनी कीमत वसूल की जाती है| सिलीगुड़ी के पब वाले फ्री के नाम पर महिलाओं से भारी कीमत वसूल करते हैं, जिसका उन्हें एहसास भी नहीं होता| जिस तरह के परिधान में स्थानीय “बार और पब” में महिलाओं को देखा गया है, वह बेहद आपत्तिजनक है| परंतु फिर भी हमारे पाश्चात्य समाज में पब प्रथा धड़ल्ले से अपने पांव पसार रही है| कहां है शहर का बुद्धिजीवी वर्ग और प्रशासन व्यवस्था? जिनकी नाक के नीचे हमारी युवा पीढ़ी पूरी तरह से बर्बाद होने पर आमादा है| नौजवान पीढ़ी को बर्बाद करने में पब वालों के हाथ से इंकार नहीं किया जा सकता, लेकिन हमारा कानून ऐसा है कि हम सबकुछ जानते हुए भी उनके खिलाफ कोई कानूनी कदम नहीं उठा सकते| ऐसे में माता-पिता की जिम्मेदारी है कि अपने बच्चो को अच्छे वस्त्र और अच्छे विद्यालय उपलब्ध ही न कराये बल्कि उनके अंदर अच्छे संस्कारों का बीजारोपण भी करें| अगर ऐसा नहीं होता है तो आज भी हमारे समाज में दुशासन और रावण जैसे असुरों की कोई कमी नहीं है, जो नई पीढ़ी को बरगलाकर अपना उल्लू सीधा करना जानते हैं| यह फैसला आपका है, आप अपने लिए कौन से संस्कार को चुनते हैं? क्या भारतीय सभ्यता व संस्कृति की परंपरा का अनुसरण करेंगे या फिर पाश्चात्य संस्कृति जो हमारी युवा पीढ़ी पर तेजी से हावी होकर उन्हें बौद्धिक रूप से पंगु बनाती जा रही है?

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