Home India किडनैप और रेप के खेल में सिस्टम फेल

किडनैप और रेप के खेल में सिस्टम फेल

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चाहे कठोर से कठोर कानून बन जाए, पुलिस प्रशासन ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कितना भी कड़े  से कड़े कदम उठा ले, सरकार कितना भी सख्त हो जाए, लेकिन ऐसा लगता है कि किडनैप और रेप का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है| प्रदेश की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कड़े कदम उठाए हैं और प्रदेश में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस के आला अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया है, लेकिन ऐसा लगता है कि पुलिस की मेहनत और सारे उपाय विफल हो गए हैं| कहीं और दूर जाने की जरूरत नहीं है, केवल उत्तर बंगाल में पिछले 1 महीने में विभिन्न जिलों में रेप की 42 घटनाएं दर्ज की गई हैं| सूत्रों के अनुसार रेपिस्ट 18 वर्ष से लेकर 28 वर्ष तक पाए गए हैं| ताजा मामला सिलीगुड़ी से जुड़ा हुआ है| सिलीगुड़ी से सटे घुघुमाली स्थित निरंजन नगर की घटना है, जहां 30 सितंबर की शाम दो लड़कियों को किडनैप करके एक गाड़ी में डाल दिया गया| इन लड़कियों को पहले फुलवारी और फिर गाज़लडोबा ले जाकर तीन लड़कों ने उनके साथ दुष्कर्म किया| पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मामले से जुड़े सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है| उनके नाम हैं सुजीत दास, डाबग्राम, बिट्टू ठाकुरनगर तथा बापी जो मातंगिनी कॉलोनी का बताया जाता है| 30 सितंबर की शाम को दो लड़कियां पार्क घूमने निकली थी| वहीं तीनों आरोपी बैठे थे| जैसे ही लड़कियां पार्क से निकल कर डाबग्राम मैदान के पास पहुंची| आरोपियों ने दोनों लड़कियों को जबरन गाड़ी में डाल दिया और वहां से रफूचक्कर हो गए| इन लड़कियों ने अदालत में जो बयान दिया है उसके अनुसार रास्ते में लड़कियों को नशीली चीज पिलाई गई| उसके बाद वे अचेत हो गई| फिर आरोपियों ने उनके साथ दुष्कर्म का सिलसिला शुरू किया, जो फुलबारी से लेकर गाजलडोबा तक चलता रहा| इसके बाद आरोपियों ने दोनों लड़कियों को वापस डाबग्राम मैदान में फेंक दिया| जब इन लड़कियों ने अपने घर पहुंचकर परिवार वालों को सारी बात बताई| तब उनके घर वालों ने उनके खिलाफ अपहरण और दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया| सिलीगुड़ी महिला थाने की पुलिस ने शिकायत दर्ज करने के बाद 3 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है| वास्तव में ऐसी घटनाओं में पुलिस को देर से सूचना मिलती है तब तक अपराधी अपना काम कर चुके होते हैं| हमारी सिस्टम ऐसी है कि वारदात की खबर पुलिस तक जल्द पहुंच नहीं पाती और ऐसा भी देखा गया है पुलिस इन मामलों में फूंक-फूंक कर कदम उठाती हैं| कभी कभी तो ऐसा भी होता है कि पुलिस सूचना दर्ज कराने वाले को टरका देती है| जिस वजह से अपराधियों का मनोबल बढ़ जाता है| पुलिस को अपना काम ईमानदारी से करना चाहिए| अपराध को रोकने में पुलिस का सहयोग आम नागरिक को भी करना चाहिए| मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हालांकि अपने स्तर पर कई बार पुलिस अधिकारियों को फटकार भी लगा चुकी है, लेकिन ऐसा लगता है कि पुलिस ऐसी घटनाओं की पुनरावृति रोकने के लिए समाज में त्वरित कदम नहीं उठा रही हैं| दोषी को सजा होनी चाहिए और कठोर से कठोर सजा होनी चाहिए, लेकिन हमारा कानून ऐसा है कि इस में सौ छेद होने के कारण अपराधी बच जाते हैं और इस प्रकार से अपराधियों का मनोबल बढ़ता जाता है| नए कानून के अस्तित्व में आने के बाद पुलिस आरोपियों के खिलाफ दफा लगाने में निष्पक्षता नहीं बरतती और पुलिस पर दबाव बढ़ जाता है| जिसके कारण केस हल्का हो जाता है और इस प्रकार से अपराधी बच जाते हैं| ऐसे मामलों में जब तक पुलिस ईमानदारी से कार्रवाई नहीं करती तब तक यह सिलसिला थमने वाला नहीं है|

 

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