Home India सिलीगुड़ी के व्यापारी जरा संभल के ,जरा हट के …

सिलीगुड़ी के व्यापारी जरा संभल के ,जरा हट के …

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( खबर समय की विशेष प्रस्तुति )
 सम्पादक की कलम से… 
आयकर विभाग की टीम तथा सिलीगुड़ी के व्यापारी संगठनों खासकर सिलीगुड़ी मर्चेंट एसोसिएशन के बीच जारी जंग भले ही ऊपरी तौर पर शांत दिख रही हो, लेकिन अंदर ही अंदर आग  सुलग रही है. दोनों पक्षों से एक दूसरे के कार्य में बाधा देने से जुड़े मामले दर्ज किये जा चुके हैं. आयकर विभाग की टीम ने सिलीगुड़ी मर्चेंट एसोसिएशन के कुछ प्रमुख व्यवसाइयों को अपना लक्ष्य बनाया है. इनमें सिलीगुड़ी मर्चेंट एसोसिएशन के महासचिव श्री गौरीशंकर गोयल प्रमुख हैं. हो सकता है कि कानून के तहत आने वाले समय में कुछ व्यापारियों की गिरफ्तारी हो. ऐसा लगता है कि सिलीगुड़ी मर्चेंट एसोसिएशन के व्यापारियों में भी इस बात की आशंका है और यही कारण है कि वे अपनी एकजुटता का प्रदर्शन करने की तैयारी में हैं.उनका यह अंदाज,विचार,रणनीति और बचाव अच्छा भी है. क्योंकि एकता में बहुत बल है. अगर व्यापारी एकता बनाकर काम करेंगे तो इस तरह के बीच- बीच में आने वाले संकट स्वतः टल जायेंगे. यह उन्होंने बहुत अच्छा किया कि सोमवार को सिलीगुड़ी मर्चेंट एसोसिएशन के दफ्तर में कई व्यापारी संगठनों के साथ एक बैठक बुलाई, जिसमें इस बात पर जोर दिया गया कि भविष्य में आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए आपसी एकता को कैसे सुदृढ़ किया जाये. विचार विमर्श के बाद व्यापारियों ने अथवा व्यापारिक संगठनों ने जॉइंट फोरम के गठन की बात की है. व्यापारियों की रणनीति अच्छी कही जा सकती है.क्योंकि इस समय उन्हें आपसी एकता व समन्वय की ही ज्यादा जरूरत है. उन्हें अपनी एकता बनाए रखने के लिए और भी बड़े कदम उठाने की जरूरत है. आनेवाले समय में निश्चित रूप से व्यापारी संगठनों के प्रतिनिधि इस पर विचार करेंगे. अभी ज्वलंत मुद्दा यह है कि अगर आयकर टीम के लोग व्यापारियों की एकता को तोड़ने का प्रयास करेंगे तो ऐसे में जॉइंट फोरम क्या कदम उठाए, ताकि व्यापारी बंधु सुरक्षित रहें, कारोबार में जुटे रहें और साथ ही अपना बचाव भी करते रहें. यह समय व्यापारियों के लिए आपसी मनमुटाव को भूलकर एकता के सूत्र में बंधने का है क्योंकि उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि आयकर विभाग के अधिकारी भी कुछ कम नहीं है. बहुत पहले अंग्रेजी राज में यह सुना था कि फूट डालो और शासन करो की नीति पर चल कर अंग्रेजों ने देश पर लगभग 200 वर्षों तक शासन किया था. उनकी नीति के शिकार भारतीय ही थे जो एक दूसरे के दुश्मन बनकर एक दूसरे की बखिया उधेड़ रहे थे. वर्तमान में जो स्थिति है, ऐसा लगता है कि आयकर विभाग के अधिकारी व्यापारिक एकता को तोड़ने के लिए एक-एक व्यापारी को निशाने पर लेंगे और इस तरह से व्यापारियों को तोड़ने के लिए कोई भी कदम उठा सकते हैं. बुधवार या गुरुवार, जब भी जॉइंट फोरम की बैठक हो,उनकी रणनीति भी इसी दिशा में होनी चाहिए कि संकट के समय वे अपनी एकजुटता को बनाए रखने के लिए, साथ ही चुनोतियों का मुकाबला करने के लिए वे और क्या क्या कदम उठा सकते हैं. बहरहाल अपना कारोबार जारी रखते हुए व्यापारी बंधु आपसी मनमुटाव से ऊपर उठ कर आने वाले संकटों से लड़ने के लिए तैयार रहें. फ़िलहाल वे आयकर टीम के खिलाफ सस्ती बयानबाजी से बचते हुए अपने कार्य व्यापार पर ध्यान केंद्रित करें तो उनके हक में यह अच्छा होगा. बाजार से हमें जो जानकारी मिली है उसके अनुसार व्यापारियों ने फैसला किया है कि आयकर विभाग पर दबाव बनाने के लिए बृहस्पतिवार को उन्हें ज्ञापन दिया जाएगा, साथ ही धरना-प्रदर्शन का भी कार्यक्रम है, जो कि बहुत अच्छा कहा जा सकता है लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि वे अतिशय से बचे और मर्यादा का पालन करे. इस तरह सही रास्ते पर चलते हुए संघर्ष जारी रखें.

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