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सिलीगुड़ी के अभिभावक और छात्र ध्यान दें!

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नहीं चलेगा और कोई बहाना उत्तीर्ण होने के लिए पढ़ना ही होगा

यूपीए सरकार के दौरान देश के सभी सरकारी स्कूलों में आठवीं कक्षा तक के बच्चों को नहीं पढ़ने पर भी पास करा दिया जाता था. बच्चों की मौज रहती थी. क्योंकि वे जानते थे कि अगर नहीं भी पढ़ेंगे, तब भी उन्हें आठवीं कक्षा तक स्कूल की तरफ से पास कराया जाता रहेगा. लेकिन ऐसे बच्चे जब नौवीं कक्षा में जाते तो पढ़ाई में कमजोरी के कारण वे फेल हो जाया करते थे. शिक्षा से वंचित ऐसे बच्चों का विकास नहीं हो पाता था और वे जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में पीछे रह जाते थे .अब केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने शिक्षा के स्तर में सुधार और शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए यूपीए सरकार की शिक्षा नीति में सुधार किया है .इसके तहत बच्चों को आठवीं कक्षा से पहले भी उन्हें असफल किया जा सकता है. कहने का तात्पर्य यह है कि ऐसे बच्चे जो मुफ्त में बिना पढ़े आठवीं कक्षा तक पास हो जाया करते थे, अब ऐसा नहीं होगा. ऐसे बच्चों को पढ़कर ही पास होना होगा. हालांकि जो बच्चे फेल हो जाएंगे, पास होने के लिए उन्हें एक मौका और दिया जाएगा .यह मौका मुख्य परीक्षा के 2 महीने के अंदर दिया जा सकता है. मोदी सरकार का यह फैसला निश्चित रूप से बच्चों को पढ़ने और कुछ करने की प्रेरणा देगा. इससे शिक्षा में प्रतिस्पर्धा की भावना का विकास होगा, साथ ही बच्चों के कैरियर से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण बिंदुओं को फोकस करने में आसानी भी होगी . सिलीगुड़ी में सरकार के इस फैसले से बच्चों के अभिभावकों में भी खुशी है. क्योंकि अब उनके बच्चे पढ़ाई में ध्यान देंगे और परीक्षा में सफल होने के लिए मेहनत करेंगे.

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