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क्या होगा २६ सितम्बर को ?

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क्या होगा २६ सितम्बर को ?

इस्लामपुर गोली कांड के विरोध में भारतीय जनता पार्टी पश्चिम बंगाल ने 26 सितंबर को 12 घंटे का बंद बुलाया है. दूसरी ओर राज्य सरकार ने बंद का विरोध करने के लिए अपने कार्यकर्ताओं को सड़क पर उतार दिया है. इससे पहले भी महंगाई और पेट्रोलियम पदार्थों के मूल्य में वृद्धि को लेकर कांग्रेस द्वारा आहूत बंद को तृणमूल कांग्रेस ने नैतिक समर्थन जरूर दिया था लेकिन उसने बंद से अपने को अलग रखा था. तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी बंद में विश्वास नहीं करती. उनका मानना है कि बंद से किसी भी समस्या का समाधान नहीं होता बल्कि इससे विकास अवरुद्ध होता है. इस समय ममता बनर्जी विदेश में है लेकिन वहीं से ही बंगाल में रोज दिन की घटनाओं पर नजर रख रही हैं. इस्लामपुर गोली कांड में भाजपा ने अपना स्टैंड बता दिया है और 26 सितंबर को बंद को सफल करने के लिए पार्टी के कार्यकर्ता अभी से ही सक्रिय हो गए हैं. उधर तृणमूल ने बंद को विफल करने के लिए अपने कार्यकर्ताओं को सड़क पर उतार दिया है. ऐसा लगता है कि बंद को लेकर दोनों पार्टियों में खूब जोर आजमाइश होगी. इसे लेकर कुछ आशंकाएं भी उत्पन्न हो रही हैं जैसे बंद के दिन अगर दोनों पार्टियों में मुठभेड़ हो गया तो इसका परिणाम हिंसक हो सकता है. इस्लामपुर गोली कांड को लेकर पूरे राज्य में भाजपा ने राजनीति गरमा दी है. उसको देखते हुए अब दूसरे दलों के लोगों  ने भी राजनीति करनी शुरू कर दी है. पार्टी महासचिव पार्थ चटर्जी ने अपने कार्यकर्ताओं को साफ कह दिया है कि किसी भी स्थिति में 26 सितंबर को बंद नहीं होना चाहिए. उन पर ऊपर से भी दबाव है. यह सच है कि बंद से किसी समस्या का समाधान नहीं होता फिर भी राजनीतिक दल राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए बंद बुलाते रहते हैं. आज तृणमूल सत्ता में है लेकिन कल वह सत्ता में नहीं थी तो उसने भी वही किया था जो आज भाजपा कर रही है. तृणमूल कांग्रेस का यह स्टाइल अच्छा लगता है कि विरोध करने के बहुत से तरीके हैं लेकिन किसी को भी कामकाजी दिवस को बर्बाद नहीं करना चाहिए. यह स्वागत योग्य है. इसका स्वागत करना चाहिए. यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा की राजनीति क्या गुल खिलाती है. बंद को विफल करने के लिए तृणमूल कांग्रेस द्वारा क्या कदम उठाया जाता है. कहीं ऐसा ना हो कि दोनों पार्टियों में टकराव के बाद एक नए इस्लामपुर कांड के इतिहास की पुनरावृति हो.इस्लामपुर गोली कांड में आज जो राज्य पुलिस की फजीहत हो रही है, उसको देखते हुए पुलिस को पूरी तैयारी के साथ आना पड़ेगा और राज्य में उपद्रव भंग करने की किसी की कोशिश को नाकाम करने के लिए कदम उठाना होगा.भाजपा को भी यह सोचना चाहिए कि बंद बुलाने से विकास अवरुद्ध होता है और उससे किसी भी समस्या का समाधान नहीं होता.

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