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सिलीगुड़ी के इन बच्चों का भविष्य क्या होगा, जब इनके बस्ते में पानी की बोतल की जगह दारू की बोतल मिले…

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यह कहा जाता है कि बच्चे कल के भविष्य हैं, लेकिन बच्चों का भविष्य उनके वर्तमान के संवारने और संजोने से बनता है. कोई माने या ना माने ,लेकिन हमारे प्रगतिशील समाज में शिक्षा का स्तर जिस तरह निरंतर गिरता जा रहा है, आने वाले समय में यह एक भूकंप की चेतावनी की तरह ही है .कहते हैं कि शिक्षा एक मंदिर की तरह है, जहां शिक्षक और छात्र का संबंध आत्मिक और सार्वभौमिक हो जाता है. लेकिन जब शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्र शिक्षा के उद्देश्य से भटक कर शिक्षा प्राप्ति को महज एक औपचारिक मान ले ,तो उनका भविष्य क्या होगा ,यह आसानी से समझा जा सकता है. बचपन भविष्य के निर्माण की बुनियाद होता है, लेकिन जब बचपन में ही बच्चे तरह-तरह के नशे के शिकार हो जाएं तो उनका भविष्य क्या होगा, यह हर कोई समझ सकता है. आज की घटना शायद इन्हीं बातों को रेखांकित करती है. सिलीगुड़ी के प्रमुख स्कूलों में से एक है बॉयज हाई स्कूल .इसी स्कूल के तीन छात्र आज कंचनजंघा स्टेडियम में शराब के नशे में धूत देखे गए. ये सभी लड़के घर से स्कूल का यूनिफॉर्म पहनकर निकले थे. स्कूल ना जा कर कंचनजंघा स्टेडियम में बैठ कर शराब पी रहे थे. उसी समय सिलीगुड़ी जर्नलिस्ट क्लब के कुछ पत्रकारों की नजर उनपर पड़ी, तो उन्होंने उनसे पूछताछ शुरू कर दी. अपने संदेह को पुख्ता करने के लिए उन्होंने तीनों लड़कों के निकट जाकर उनका मुंह सूंघने की कोशिश की और जब उन्हें यकीन हो गया कि उन्होंने शराब पी रखी है, तो बच्चों को तो जाने दिया ,लेकिन वे पहुंच गए स्कूल के टीचर इंचार्ज क्षितिज बर्मन के पास .टीचर इंचार्ज ने उनकी बात सुनी और कहा कि तीनों ही बच्चों का स्कूल रिकॉर्ड खराब है. क्षितिज बर्मन ने कहा कि उपरोक्त बच्चों के अभिभावकों को जल्द बुलाकर इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी. इस तरह की घटना हैरान करने वाली तो है ही, साथ ही दुख और परेशानी भी पैदा करती है. हमारी आने वाली पीढ़ी क्या इसी तरह से भारत का भविष्य संवारेगी ?यह शिक्षा के साथ क्रूर मजाक है. साथ ही ऐसी घटनाएं उन मां बाप के लिए भी एक चेतावनी है, जो अपने बच्चों को स्कूल भेजकर अपने कर्तव्य व दायित्व की इतिश्री मान लेते हैं. बच्चों की देखभाल के लिए शिक्षक से ज्यादा अभिभावक जिम्मेवार हैं. यह घटना निश्चित रूप से अभिभावकों की आंख खोल देने वाली साबित होगी. अगर आपके बच्चे स्कूल नहीं जाते अथवा घर से निकल कर कहां जाते हैं, इसकी सुध लेना आवश्यक है . दूसरों पर दोष ठोकने से पहले स्वयं को टोटोले. आपकी जरा सी चूक या असावधानी बच्चे का भविष्य कलंकित कर सकती है. आज की घटना स्कूल प्रशासन के साथ-साथ अभिभावकों के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है.

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