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आखिर क्यों होते हैं बलात्कार?

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15 से लेकर 21 साल तक की उम्र अत्यंत नाजुक मानी जाती है| इस उम्र में लड़के और लड़कियां भावनाओं की ज्वार में बहते रहते हैं| उनकी एक दुनिया होती है| इस दुनिया में सपनों की ख्वाहिशें जागती हैं| मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि इस उम्र में लड़के-लड़कियों में परिपक्वता नहीं होती, जिसके कारण वह किसी की भी बात पर भरोसा कर लेते हैं| दिमाग से कम दिल से फैसले लेते हैं| सही गलत की समझ नहीं होती और इसका अंजाम उन्हें भुगतना भी पड़ता है| आज हमारे समाज में रेप एक बड़ी समस्या बन गई है| सरकार और कानून ऐसे घिनौने अपराध को रोकने के लिए जितने ही प्रयास कर रहे हैं, यह दिनों दिन बढ़ता ही जा रहा है, इसका कारण भी है वास्तव में कच्ची उम्र के लड़के लड़कियों को सही मार्गदर्शन की जरूरत होती है ,लेकिन उन्हें वह गाइड नहीं मिलता| माता-पिता को अपने कामकाज से फुर्सत नहीं है| बच्चे अपने हमउम्र दोस्तों के बीच ज्ञान का आदान प्रदान करते हैं| यह ज्ञान ही उन्हें भटकाता है और  उन्हें गुमराह करता है| बलात्कार हमारे समाज का नासूर बनता जा रहा है| आए दिन ऐसा कोई भी दिन नहीं होगा जब रेप के बारे में अखबारों में खबरें नहीं छपती हों|

पूरे भारत में दिन पर दिन बलात्कार जैसे मामलों में तेजी से इजाफा हो रहा है| जहाँ तक पश्चिम बंगाल की बात है, यहाँ भी रेप के आंकड़े चौंकाने वाले है| नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े के अनुसार बलात्कार के मामलों में देश में तीसरा स्थान पश्चिम बंगाल का है| पहले नम्बर पर उत्तर प्रदेश है, जहां 2015 में बलात्कार के 35,527 मामले पंजीकृत किये गए| वहीं दूसरे नम्बर पर महाराष्ट्र है, जहाँ महिलाओं के साथ बलात्कार के 31,218 मामले दर्ज हुए| जबकि पश्चिम बंगाल में रेप के ३१,१२६ मामले सामने आये| पूरे देश में राजस्थान चौथे स्थान पर है| देश में सबसे ज्यादा महिलाओं का यौन शोषण दिल्ली में होता है| एनसीआरबी के आंकडे के अनुसार २०१५ मे बलात्कार के 17,104 मामले दर्ज किये गए| पूरे देश में लक्ष्यदीप ही एक ऐसा स्थान है, जहाँ बलात्कार का एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ है| एनसीआरबी के आंकड़े के अनुसार लगभग ५० फीसदी रेप के मामलों में १६-३० साल के व्यक्ति जुड़े पाए गए| इस तरह से पश्चिम बंगाल में हाल के दिनों में महिलाओं के साथ रेप के मामले अधिक संख्या में सामने आये| उत्तर पूर्व भारत में लड्कियों के साथ यौन शोषण, भगाने, बहलाने के मामले सबसे ज्यादा होते हैं| आरपीएफ ने एक सफ्ताह में 17 लड़कियों को गलत हाथो में जाने से बचाया है, इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि उत्तर पूर्व राज्यों में महिलाओं का शोषण व उत्पीडन कितना गंभीर हो गया है? मालीगांव के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी द्वारा प्रेषित विज्ञप्ति से पता चलता है कि उत्तर पूर्व की लड़कियों को कभी नौकरी तो कभी अच्छी जिन्दगी का सब्ज बाग़ दिखाकर उन्हें बरगलाया जाता है| आये दिन ऐसे मामले आरपीएफ की चुस्ती से पकडे जा रहे हैं| हर नया मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर देता है कि आखिर क्यों होते हैं बलात्कार? इसके पीछे हमे कई बातों पर गौर करने की जरुरत है| आज कल लड़कियां हर क्षेत्र में आगे आ रही हैं| घर से बाहर निकलने और आधुनिक समाज की ओर अग्रसर होने से उनके पहनावे में भी बदलाव आया है| ये भी रेप का एक कारण हो सकता है? वैज्ञानिको का मानना है कि आज कल लड़कियां खुबसूरत दिखने की होड़ में अपने बनाव श्रृंगार पर ज्यादा ध्यान देती है| उनके पहनावे में भी बदलाव आया है| हमने सिलीगुड़ी के कुछ जानकारों की इसमें राय ली है| अधिकांश लोगों का मानना है कि लडकियां आधुनिक बनने की चक्कर में अपनी संस्कृति से दूर होती जा रही हैं| बलात्कार का ये भी एक कारण हो सकता है| आज कल लडकियां छोटे-छोटे कपड़े पहनती है, जो उनका पूरी तरह जिस्म ढकने के लिए पर्याप्त नहीं होता| ऐसे में युवक देखकर लालायित होते है और फिर शुरू होता है दोस्ती और फिर दोस्ती की आड़ में बात रेप तक पहुँच जाती है| हालांकि ऐसा नहीं कि सभी पुरुष महिलाओं के बारे में ऐसी सोच रखते हों| सिलीगुड़ी के महानंदा पाड़ा में रहने वाले दिवेश कुमार ने कहा कि व्यक्ति को अपनी सोच सही रखनी चाहिए| हम किसी महिला को अपनी सोच के अनुसार ही देखते हैं, अगर मेरी सोच युवती के हुस्न से ज्यादा उसके गुण पर टिकी है, तो मै उसका देह आकर्षण महसूस नहीं करूंगा| इस सोच को बदलने के लिए भारतीय स्कूली शिक्षा में ही यह सोच परिवर्तित की जा सकती है, जो शुरू से ही बच्चों को ऐसे शिक्षित करें जिससे यह समस्या ही ना हो और नारी का सम्मान करना सिखाया जाए. इसमें माता पिता का सबसे अहम रोल होगा| सेवक रोड़ निवासी शिक्षक अतुल त्रिपाठी कहते है कि “जहां तक मेरा मानना है, यह मां बाप के बच्चों को संस्कार देने पर निर्भर करता है| जो बच्चे संस्कारी होते है, वे किसी भी लड़की का बलात्कार नहीं कर सकते और रही बात छोटे कपड़ों की तो अगर कहीं कोई लड़की निर्वस्त्र भी कहीं मिल जाती है, तो संस्कारी व्यक्ति अपने कपड़ों से उसे ढक देगा लेकिन उसका बलात्कार नहीं करेगा| अगर बलात्कार को रोकना है तो अपने बच्चे को संस्कारी बनाये| बहुत से लोगों का मानना है कि टीवी, फिल्मों और विज्ञापन में दिखाई जाने वाली अश्लीलता बलात्कार के बढ़ते मामलों की वजह है| बाघजतिन पार्क के दसवीं के छात्र आलोक सरकार ने कहा कि मोबाइल, ब्लू फिल्म और भारतीय फिल्मों में अश्लीलता, लड़कियों के कम और बोल्ड कपड़े पहनना बलात्कार का कारण साबित हो रहा है| इसके विपरीत गंगानगर निवासी राजेश गुप्ता ने कहा कि बलात्कार एक मानसिक विकृति है| यह ना तो फिल्मों, विज्ञापनों और ना ही लड़कियों के अंग प्रदर्शनों की वजह से होता है. इसे रोकने के लिए लड़कों और लड़कियों को बेहतर पारिवारिक और सामाजिक संस्कारों से अवगत कराना होगा| आपकी रेप के मामले में क्या प्रतिक्रिया है हम आपका भी मत जानना चाहते हैं| ऐसे अपराध पर किस तरह नियंत्रण पाया जाये, यह न केवल सरकार बल्कि समाज के लिए भी सिर दर्द बनता जा रहा है| हालांकि रेप जैसे जघन्य अपराध को रोकने के लिए सरकार ने क़ानून में बदलाव किये और कठोर कानून भी बने, लेकिन ऐसे मामलों में दिनों दिन हो रहे इजाफे चिंता का विषय बना है कि आखिर हमारा समाज किस दिशा में जा रहा है|