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खबर समय सुप्रभात …मनुष्य दुखी क्यों है?

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जीवन में सुख दुख आते रहते हैं .जहां सुख है वहीं दुख भी है और जहां दुख है वहीं सुख भी है .सुख-दुख प्रकृति के अभिन्न अंग हैं. एक आता है तो दूसरा जाता है, दूसरा आता है तो पहला जाता है. यह क्रम ताउम्र चलता रहता है. वास्तव में सुख क्या है? दुख के बगैर सुख की कल्पना नहीं की जा सकती है. सुख की अनुभूति तो तभी होती है जब हम दुख का सामना करते हैं. सुख की कामना करने वाले लोग दुख को अपने जीवन से निकाल नहीं सकते .जब हम ऋषि महर्षि की बात करते हैं तो दुख का वास्तविक कारण हमें समझ में आता है .प्रश्न है कि मनुष्य दुखी क्यों है . आचार्य चाणक्य ने इसका जो कारण बताया है, वह निश्चित रूप से हमारी आंखें खोल देने के लिए है .उन्होंने कहा है हम दुखी इसलिए हैं क्योंकि हम दूसरों से अपनी तुलना करने लगते हैं. हमारे पास जो कुछ भी है ,जितना भी है उसी में ही हम संतुष्ट हो तो हम कभी दुखी नहीं हो सकते. कुछ लोग बड़ी-बड़ी खुशियां पाने के लिए छोटी-छोटी खुशियों को महत्त्व ही नहीं देते.यह भी दुख का एक कारण है. चाणक्य कहते हैं , हमें छोटी-छोटी खुशियों का ही ख्याल रखना चाहिए. छोटी छोटी खुशियां मिलकर ही बड़ी खुशियों का निर्माण करती हैं,लेकिन छोटी खुशियों की उपेक्षा कर जो इंसान एकदम से बड़ी खुशी पाने की जद्दोजहद करता है , वही सबसे ज्यादा दुखी होता है . आचार्य चाणक्य ने कहा है ,आपके पास जो कुछ भी है वह आपके लिए पर्याप्त है. आप अपने मस्तिष्क में एक रेखाचित्र खींच ले . आप के पास सब पर्याप्त है . यह न सोचें कि दूसरों के पास बहुत है और आपके पास कुछ नहीं है . ऐसा महसूस करते ही दुख का आगमन शुरू हो जाता है . छोटी छोटी चीजें आपको बड़ी खुशी दे सकती हैं. दूसरे ने जो हासिल किया , उसकी सफलता में जश्न मनाए लेकिन भूल कर भी उससे अपनी तुलना मत करें . अनेक लोग होते हैं जो दूसरों की तरक्की देख कर जलते हैं . यह दुख का सबसे बड़ा कारण है. चाणक्य कहते हैं कि सुख दुख का चक्र जिंदगी भर चलता रहता है. हमें हर काल व परिस्थितियों में खुश रहने की आदत डाल लेनी चाहिए .

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