Home Lifestyle खबर समय सुप्रभात …सुबह उठकर भूलकर भी पैर न लगाएं

खबर समय सुप्रभात …सुबह उठकर भूलकर भी पैर न लगाएं

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आचार्य चाणक्य वेदों के ज्ञाता थे .उन्होंने अथर्ववेद का गहरा अध्ययन किया और उसी की प्रेरणा से ही उन्होंने आचार्य चाणक्य नीति की रचना की थी .उन्होंने कहा है कि 7 ऐसी चीजे, जिन्हें सुबह उठकर भूल से भी पैर नहीं लगाना चाहिए .उन्होंने कहा है कि जो लोग ऐसा करते हैं वे सात जन्मों तक पाप के भागी बनते हैं. ये 7 चीजें कौन कौन सी हैं जिन्हें भूलकर भी पैर नहीं लगाना चाहिए … 1 अग्नि ,2 गाय ,3 गुरु ,4 ब्राह्मण, 5 कुमारी , 6 वृद्ध और 7 शिशु… अपने नीति ग्रंथ में सातवें अध्याय के श्लोक में आचार्य चाणक्य ने कहा है कि उपरोक्त सातों में से अग्नि व गाय को भूलकर भी पैर नहीं लगाना चाहिए , अन्यथा बहुत बड़ा पाप लगेगा. क्योंकि अग्नि को देवता माना गया है. हिंदू धर्म में अग्नि के महत्व के बारे में अनेक बातें बताई गई हैं. अग्नि हिंदू धर्म में सबसे ज्यादा पवित्र मानी गई है. यही कारण है कि अग्नि को साक्षी मानकर विवाह शादी आदि शुभ कार्य होते हैं .इतनी महत्वपूर्ण पवित्र अग्नि को पैर दिखाने से नरक में भी जगह नहीं मिलती. इसी तरह हमारी माता है गाय , दूध देती है. गाय का दूध काफी पौष्टिक होता है .माता सदृश गाय को पैर दिखाने का मतलब माता का अपमान होता है. माता का अपमान करने वाला पाप का भागी बनता है. इसी तरह गुरु हमें ज्ञान देता है ,हमें योग्य बनाता है. वह उस कुम्हार की तरह है जो गीली मिट्टी को तराश कर उससे सुंदर-सुंदर खिलौने बनाता है .अगर व्यक्ति के जीवन में गुरु नहीं होता तो व्यक्ति कभी सफल वो महान नहीं बनता .सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य को सम्राट बनाने वाला भी एक गुरु था. हर महान व्यक्ति के पीछे एक गुरु का भी हाथ होता है जो उसका जीवन संवारने में योगदान देता है . आचार्य चाणक्य कहते हैं ऐसे गुरु को कभी पैर नहीं दिखाना चाहिए अन्यथा ईश्वर के कठोर दंड के भागी बनते हैं .उन्होंने आगे कहा है कि ब्राह्मण को भी पैर नहीं दिखाना चाहिए .पृथ्वी पर निवास करने वाली सभी जातियों, धर्म और वर्ग के लोगों में ब्राह्मण का स्थान सर्वोपरि माना गया है. ब्राह्मण सदा लोगों का कल्याण करता है और परोपकारी होता है .ऐसे व्यक्ति को पैर दिखाने वाला अपने साथ साथ सात पीढ़ियों को भी पाप का भागी बना लेता है .ब्राह्मण की श्रेष्ठता उसकी पवित्रता में निहित है. कुमारी के संबंध में चाणक्य कहते हैं कि कुमारी यानी कुंवारी लड़कियां पवित्र होती हैं. वेद पुराणों में भी कुंवारी लड़कियों की पवित्रता के बारे में अनेक बातें कही गई हैं. कुंवारी लड़कियों को भी पैर नहीं दिखाना चाहिए और ना ही उनसे अपना पैर स्पर्श करवाना चाहिए अन्यथा पाप के भागी बनेंगे .उन्होंने वृद्धों के बारे में भी कहा है कि बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद लेना चाहिए .उन्हें पैर नहीं दिखाना चाहिए. शिशु के बारे में आचार्य चाणक्य कहते हैं शिशु में ईश्वर का निवास होता है, जब तक बच्चा समझदार नहीं हो जाता है तब तक वह ईश्वर के अधीन होता है ,ऐसे शिशु को पैर दिखाना यानी ईश्वर को पैर दिखाना है. हो सकता है कि आधुनिक विज्ञानियों को आचार्य चाणक्य की ये बातें दकियानूसी लग रही हो ,लेकिन फिर भी हमें गर्व है कि यह हमारी भारतीय संस्कृति और परंपरा की पहचान है और विज्ञान भी इसे झूठला नहीं सकता .आधुनिक विद्वानों ने चाणक्य के उपरोक्त सातों तथ्यों को निर्विवाद स्वीकार भी किया है.

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