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नशे से रहें सावधान, जब एक नशेड़ी बाप अपनी संतान का सौदा करने लगे…

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सैकड़ों साल पहले आचार्य चाणक्य ने जीवन के विविध क्षेत्रों में लोगों को कल्याण के उपाय बताए. चाणक्य नीति, आचार्य चाणक्य की सीख व समाधान का दस्तावेज है .यह आज उतनी ही प्रासंगिक है जितनी उस जमाने में थी .चाणक्य नीति में बताई गई बातें आज के जमाने में पूरी तरह से फिट बैठती हैं. आचार्य चाणक्य ने कहा है कि नशेड़ी लोगों से हमेशा सावधान रहें .क्योंकि यह किसी के नहीं होते .इनकी आंखों पर पट्टी बंधी होती है, इसलिए अपनी संतान तक को भूल जाते हैं. चाणक्य की कही गई यह बात आज भी उतनी ही सत्य है जितनी मौर्य काल में थी. माल बाजार की एक घटना है जो सिलीगुड़ी से सटा एक छोटा सा कस्बा है .यहां एक नशेड़ी बाप अपने डेढ़ साल के बेटे को बेचने के लिए बाजार में चला आया. यह घटना उदलाबाड़ी बाजार की है. नशेड़ी बाप ने अपने बेटे की कीमत 50000 लगा दी थी. लेकिन संयोग से एक स्वयंसेवी संगठन को पता चल गया . सूचना मिलते ही स्वयंसेवी संगठन के सदस्य वहां पहुंच गए .उन्होंने माल बाजार पुलिस स्टेशन को इसकी सूचना दी .पुलिस ने नशेड़ी पिता को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस हिरासत में नशेड़ी पिता ने बताया कि वह काफी गरीब है .उसकी कई संताने हैं .उनकी परवरिश ठीक से नहीं कर पाता है इसीलिए वह बेचने चला आया .उसने कहा कि अपने बेटे को बेच कर उससे प्राप्त रकम से अपने घर की हालत सुधारना चाहता था . यह घटना 15 अक्टूबर की है .इस घटना के पीछे सच्चाई क्या है यह तो जांच के बाद पता चलेगा लेकिन आचार्य चाणक्य ने जो बात सैकड़ों साल पहले कही थी ,आज भी ऐसी घटना हमारे समाज में घट रही है .अगर हम चाणक्य की दूरदर्शिता के मद्देनजर बात करें तो एक नशेड़ी पर कभी भरोसा नहीं करना चाहिए. नशा व्यक्ति का विवेक और आत्मा दोनों को ही खोखला कर देता है.

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