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सिलीगुड़ी के बार हुए गुलजार

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सिलीगुड़ी शहर में दुकान, मकान, प्रतिष्ठान, बिजली की रंग बिरंगी लड़ियों से सज चुके हैं तो अमीर लोगों के मनोरंजन के केंद्र सिलीगुड़ी के पब ,बार आदि भी जगमग कर रहे हैं .सिलीगुड़ी में पब, सिंगिंग बार जैसे मनोरंजन के केंद्र मुंबई के डांस बारों की तरह उतने एक्सपोज तो नहीं है पर धीरे-धीरे यहां भी पाश्चात्य सभ्यता का असर दिख रहा है .आने वाले समय में ऐसी संभावना है कि सिलीगुड़ी शहर में डांस बारों की भी बुनियाद पड़ जाएगी .मुंबई अपनी आजाद ख्याल जिंदगी के लिए शुरू से ही जाना जाता रहा है. इस शहर में डांस बारों की बुनियाद 1970 के आरंभ में पड़ने लगी थी. महाराष्ट्र के खेतीहर और गरीब इलाकों से आने वाली लड़कियों पर बार के कर्णधार की नजर पड़ी. उन्होंने अपना व्यवसाय बढ़ाने के लिए युवा लड़कियों को अपने यहां शराब परोसने के लिए रखना शुरू किया. इसे वेटर सर्विस नाम दिया गया. तब उस समय लड़कियां बार में साड़ी पहनकर काम करती थी. इन्हें मासिक तनख्वाह मिलती थी

.ग्राहकों से मिलने वाली टिप्स भी उन्हें मिलती थी

.धीरे-धीरे समय के हिसाब से बारों का रंग बदलता चला गया. कुछ बा रों ने अपने यहां आर्केस्ट्रा की सर्विस शुरू कर दी. लड़कियों के पहनावे में भी अंतर आता चला गया. बार में लड़कियां भड़कीले कपड़ों में नृत्य भी करने लगी और इस तरह से बार डांसर का नाम इन्हें दिया गया. धीरे धीरे डांस बार की लोकप्रियता बढ़ती चली गई. मुंबई की सफलता को देख कर देश के अनेक छोटे बड़े शहरों ने इसे अपनाना शुरू कर दिया. सिलीगुड़ी शहर में पब, सिंगिंग बार आदि का विस्तार मुंबई की तर्ज पर ही हुआ है और इसे देखते हुए यह कहा जा सकता है कि आने वाले समय में सिलीगुड़ी में भी डांस बार की बुनियाद पड़ने लगेगी.

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