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सिलीगुड़ी ड़ेंगू से दो कदम दूर

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सिलीगुड़ी में बरसात ज़ारी है. बरसात के बाद डेंगू के मच्छरों की उत्पत्ति का सबसे अच्छा वातावरण रहता है. डेंगू के मच्छर अगस्त-सितम्बर से लेकर नवम्बर तक सक्रिय रहते हैं, क्यूंकि वातावरण में नमी होती है. बरसात के बाद मौसम में बदलाव आता है और हल्की-हल्की ठंड वातावरण में फैल जाती है. बरसात में जल-जमाव सिलीगुड़ी की एक बड़ी समस्या बनती जा रही है. हालाँकि नालियों, ड्रेनों का सिलीगुड़ी में जाल बिछा है पर साफ़-सफाई के आभाव में वर्षा का जल पास नहीं करता और सड़को पर, घरों में जमने लगता है. डेंगू के मच्छर साफ़ और ठहरे पानी में ही उत्पन्न होते हैं. नगर निगम ने सिलीगुड़ी वासियों को डेंगू से बचाने के लिए अभी कोई ठोस कदम नहीं उठाया है, कुछ समय पहले ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव जरुर किया गया था. लेकिन उसके बाद से न तो निगम के सफाई कर्मी नज़र आते हैं, और न ही पार्षद इस ओर ध्यान दे रहे हैं. सिलीगुड़ी के निम्न इलाकों जैसे: गंगानगर, संतोषीनगर, ग्वालापट्टी, शक्तिगढ़, खालपाड़ा में पिछले साल डेंगू ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई थी. इस बार ऐसा न हो और पिछली घटनाओं से सबक लिया जाए, आवश्यकता इसी बात की है. सिलीगुड़ी के मेयर अशोक भट्टाचार्य ने जरुर सिलीगुड़ी की हो रही बरसात और जल-जमाव पर चिंता व्यक्त की हैं लेकिन जल जमाव को रोकने का उनके पास भी कोई साधन नहीं हैं. हालाँकि सड़को का निर्माण व कायाकल्प किया गया है लेकिन फिर भी जल जमाव एक बड़ी समस्या बनती जा रही है. रात दिन की बारिश ने सिलीगुड़ी के लोगों की जान-माल के खतरे को बढ़ा दिया है. सांप, ज़हरीले जीव-जंतु पानी में ही निकलते हैं, इनसे बचने का कोई उपाय नहीं है. सिलीगुड़ी नगर निगम के पास इन सब बातो का कोई जवाब नहीं हैं, ऐसे में सिलीगुड़ी की जनता ही अपने स्वस्थ व जान-माल की मालिक है.

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