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हृदय रोग से बचना है तो सरसों तेल से खाना पकाएं

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हमारे देश की प्राचीन परंपरा रही है कि हम सरसों तेल का उपयोग करते आ रहे हैं .ना केवल शरीर की मालिश में ही बल्कि भोजन पकाने में भी सरसों तेल का इस्तेमाल होता आ रहा है . लेकिन आधुनिक जीवन शैली में धीरे-धीरे लोग सरसों तेल के सेवन से दूर होते जा रहे हैं. उसकी जगह आधुनिक खाना पकाने के तेलों का प्रयोग होने लगा है .एक अध्ययन से पता चला है कि सरसों तेल के स्थान पर दूसरे तेलों का प्रयोग करने से ही देश में हृदय रोगियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है .अध्ययन बताता है कि सरसों तेल में अनेक औषधीय गुण छिपे हैं जिनके कारण यह ना केवल हृदय रोगों को ही बल्कि अन्य सामान्य व जटिल रोगों का भी समाधान प्रस्तुत करता है. सरसों तेल बड़ी आत, पेट ,छोटी आंत और जठराग्नि के अन्य भागों में संक्रमण दूर करने में सहायक होता है. यह दमा रोगियों के लिए अत्यंत लाभकारी है . अध्ययन में पाया गया है कि सरसों तेल का उपयोग करने से 75 प्रतिशत हृदय रोग के खतरों में कमी आई है . सर्दी-जुकाम आदि सामान्य रोगों में सरसों तेल अत्यंत लाभकारी है .सरसों तेल से मालिश करने से शरीर को पूरा आराम मिलता है और शरीर में एक नई स्फूर्ति का संचार होता है, लेकिन यह सब असली सरसों तेल पर ही निर्भर करता है. वर्तमान में सिलीगुड़ी में सरसों तेल के नाम पर मिलावटी टेल ही बेचा जा रहा है या फिर आधुनिक जीवन शैली के हिसाब से दूसरे तेलों का प्रयोग किया जा रहा है . अध्ययन के अनुसार इन विचित्र तेलों के सेवन से ही बीमारियां बढ़ रही है .हमारे देश में सरसों तेल का इतिहास अत्यंत प्राचीन रहा है .लगभग 2000 ईसा पूर्व से ही सरसों की पेराई करके तेल निकाला जाता रहा है. उस जमाने में कोल्हू होता था .हालांकि धीरे धीरे यह परंपरागत तरीका खत्म होता गया. आधुनिक मशीन से सरसों की पेराई करके तेल निकाला जाता है. सरसों तेल के इतने फायदे और खासकर हृदय रोगों से रक्षा के लिए इसके उपयोग को देखते हुए सलाह दी जाती है कि आप भांति भांति के तेल का सेवन बंद करके केवल सरसों तेल का ही उपयोग करें और हृदय रोग के खतरों से बचे रहें.