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सिलीगुड़ी में भाजपा का बंद पूरी तरह सफल

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सिलीगुड़ी में पसरा रहा सन्नाटा… उत्तर दिनाजपुर जिले के इस्लामपुर स्थित दारिभित हाई स्कूल में कथित तौर पर पुलिस फायरिंग में दो छात्रों की मौत के प्रतिवाद में तथा इसकी सीबीआई जांच की मांग में भारतीय जनता पार्टी ने आज 12 घंटे का बंगाल बंद बुलाया है. सिलीगुड़ी में बंद को सफल कराने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने मंगलवार को सिलीगुड़ी शहर में रैलियां निकालकर लोगों से स्वतः बंद में शामिल होने की अपील की थी. दूसरी ओर बंद को विफल करने के लिए तृणमूल कांग्रेस ने भी अनेक वार्डों में जुलूस निकाला था. लेकिन आज का बंद  देख कर ऐसा लगता है कि लोगों ने स्वयं बंद में भाग लिया है. सिलीगुड़ी शहर में सुबह से ही बंद का प्रभाव पड़ना शुरू हो गया था.सिलीगुड़ी के झंकार मोड़ स्थित बैंक ऑफ़ इंडिया में ग्राहक पैसे की जमा- निकासी के लिए सुबह 10:00 बजे आए थे और उन्हें विश्वास था कि बैंक में रोजाना की तरह काम काज होगा. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. बैंक का शटर भी नहीं खुला. यही हाल एसएफ रोड स्थित पीएनबी, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, ओरिएंटल बैंक तथा दूसरे निजी व सरकारी बैंकों का देखा गया. बैंक पूरी तरह से बंद रहे. सड़कों पर गाड़ियां तो दिखी लेकिन सवारियां नदारद थी. विधान मार्केट हमेशा व्यस्त मार्केट के रूप में जाना जाता है, लेकिन आज वहां भी सन्नाटा छाया रहा. ऐसा लग रहा था कि विधान मार्केट किसी का मातम मना रहा हो. हिल कार्ट रोड के दोनों तरफ दुकानें बंद देखी गई. मॉल, बड़े-बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठान,  नया बाजार में  आज कामकाज नहीं हो सका. बाजार में वीरानी छाई रही. दुकानदारों ने अपनी दुकानों के शटर भी नहीं खोलें. थाना रोड पर हमेशा चहल-पहल रहती है लेकिन आज वहां भी वीरानी देखी गई. सेवोक रोड, हिलकार्ट रोड, चंपासाड़ी मोड, गुरुंग बस्ती,  सब जगह दुकानें बंद है.बंद के समर्थन में सिलीगुड़ी जिला भाजपा ने जगह-जगह जुलूस निकाले थे और लोगों से अपील की थी कि वे बंद को सफल बनाने में भाजपा का साथ दें. ऐसा लगता है कि लोगों ने भाजपा का पूरी तरह साथ दिया है. आज का बंद दो पार्टियों की जोर आजमाइश का गवाह न बन सका.एक और भाजपा हर हाल में बंद को सफल बनाने में जुटी थी तो दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस बंद को विफल करने के लिए कोई भी कदम उठाने को तैयार थी.लेकिन आज का शत-प्रतिशत बंद देख कर ऐसा लगता है कि तृणमूल कांग्रेस को जनता की नब्ज टटोलने की  जरूरत है. इस बंद के द्वारा जनता ने तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी को यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह दिन लद गए जब शासक मनमानियां करके जनता पर शासन करते थे. लोग शासक की धमकी में आने वाले नहीं हैं. वह वही करेंगे जो उन्हें संवैधानिक मर्यादाओं के तहत किया जाना चाहिए. पश्चिम बंगाल की पुलिस पर हमेशा से आरोप लगते रहे हैं. इस्लामपुर गोलीकांड में भी बंगाल पुलिस का चेहरा सामने आया था. प्रदेश की जनता ने बंगाल पुलिस की बर्बरता का दर्द झेला है और इस कारण से भी बंद में बढ़-चढ़कर भाग लिया. राज्य के पर्यटन मंत्री गौतम देव और उत्तर बंगाल विकास मंत्री रविंद्र नाथ घोष ने बंगाल बंद को भाजपा की साजिश बताया था और इसको सफल नहीं करने के लिए लोगों से आग्रह किया था. लेकिन ऐसा लगता है कि प्रदेश की जनता ने एक तरह से उन्हें समझाने की कोशिश की है कि राजनीति हमेशा चमकती नहीं. अगर राजनीति की जाए तो विकास की राजनीति होनी चाहिए. राजनीति किसी की लाश पर नहीं की जा सकती. आज के बंद को देखते हुए तृणमूल कांग्रेस को भी अपने गिरेबान में झांकना होगा. सिलीगुड़ी में बंद का व्यापक असर देखा गया. कुछ लोगों के अनुसार ऐसा बंद वाममोर्चा सरकार में भी सफल नहीं होता था. आज सरकारी स्कूल भले ही खुले रहे हैं लेकिन वहां छात्रों की उपस्थिति नहीं देखी गई. निजी स्कूल बंद रहे. छोटे छोटे दुकानवाले भी बंद में शामिल देखे गए. जलपाई मोड, तीन बत्ती में सन्नाटा पसरा रहा. आज सड़कों पर ऑटो चलते तो देखे गए लेकिन उनमे सवारिया नहीं दिखी.  जलपाई मोर से चेक पोस्ट तक ऑटो का किराया ₹15 होता है लेकिन आज ऑटो चालक १० -१० भी लेते देखे गये. क्योंकि सवारियां ही सड़कों पर नहीं थी. आज के बंद की सफलता की पृष्ठभूमि बहुत पहले से ही बनने लगी थी.

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