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पहाड़ पर पर्यटन पर जोर देने का ममता ने दिया निर्देश

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कलिम्पोंग, 30 मई। पांच दिवसीय पहाड़ दौरे के तीसरे दिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को कलिम्पोंग में दार्जिलिंग एवं कलिम्पोंग के प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक में पहाड़ पर विकास कार्य  में तेजी लाने एवं पर्यटन उद्योग के विस्तार पर बल दिया। कलिम्पोंग में डॉ ग्राहम्स स्कूल के पास जार्वी हॉल में आयोजित बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों से पहाड़ पर पर्यटन उद्योग के विस्तार को लेकर विस्तृत चर्चा की। ममता बनर्जी ने पर्यटन उद्योग को पहाड़ की अर्थव्यवस्था की रीढ़ करार देते हुए इस क्षेत्र में होम स्टे, होटल, रेस्टुरेंट समेत इससे जुड़े अन्य कारोबार के विकास पर जोर देने की वकालत की। इसके साथ ही उन्होंने पर्यटन मंत्रालय द्वारा इस क्षेत्र में पर्यटन के विस्तार व विकास के लिए किये जा रहे प्रयासों पर असंतोष जताया। बैठक में मौजूद पर्यटन मंत्री गौतम देव से मुख्यमंत्री जानना चाहा कि दार्जिलिंग में टाइगर हिल्स में जारी विभिन्न योजनाएँ किस स्थिति में है। इसके साथ ही उन्होंने पर्यटन मंत्री से पहाड़ पर पर्यटन उद्योग के विस्तार के लिए राज्य सरकार की ओर से लागू की जाने वाली विभिन्न योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी देने को कहा। ममता बनर्जी ने आज की बैठक में गजलडोबा में चल रही अपनी महत्वाकांक्षी योजना को लेकर पर्यटन मंत्रालय की ओर से किये जा रहे कार्यों को लेकर भी नाराजगी जताई। मुख्यमंत्री ने पर्यटन मंत्री से जानना चाहा वहां सरकरी परियोजनाओं को पूरा होने में इतना समय क्यों लग रहा है। उन्होंने पर्यटन मंत्री गौतम देव को पर्यटन उद्योग से जुड़े सरकारी कर्मचारियों के कार्यों की बेहतर मॉनीटिरिंग करने का निर्देश दिया। ममता बनर्जी ने कहा कि उत्तर बंगाल  के दार्जिलिंग, डुआर्स, अलीपुरद्वार, कूचबिहार, जलपाईगुड़ी जिले में पर्यटन उद्योग के विकास के लिए काफी कुछ है जो दक्षिण बंगाल में नहीं है। इतनी अपार संभावनाए रहने के  बावजूद यहाँ अपेक्षित विकास नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की ओर से इस क्षेत्र के विकास के लिए पर्याप्त धन राशि मुहैया कराई गयी है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने सरकारी महकमे से पहाड़ पर रोजगार सृजन पर जोर देने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान जीटीए एंव विभिन्न विकास बोर्ड के कार्यो की भी समीक्षा की। जीटीए चीफ विनय तमांग से उन्होंने जीटीए के अधीन पहाड़ पर चल रहे विभिन्न विकास कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की ओर से पहाड़ के विकास के लिए पैसे दिए जाते हैं पर कुछ असामाजिक क्रियाकलापों के कारण विकास परियोजनाओं को बीच में बंद पड़े हैं।

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