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चंडी पाठ में महिषासुरमर्दिनी की कथा…

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Mahisasurmaridni
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सिलीगुड़ी : चंडी पाठ में महिषासुरमर्दिनी की कथा कुछ इस प्रकार है :

असुर महिष ने एकबार घोर तपस्या कर ब्रम्हदेव को प्रसन्न कर दिया था. ब्रम्हदेव ने जब उन्हें वर देना चाहा तो तो महिष ने अमरता का वरदान माँगा. ऐसा वरदान देना ब्रम्हदेव के लिए संभव नहीं था. तब महिष ने वर माँगा की अगर उनकी मौत हो तो किसी महिला के हाथों हो. असुर को पता था की महिलाएं कमज़ोर होती हैं, ओर उसे महिलाएं मार नहीं सकती. ब्रम्हदेव ने उसे वरदान दे दिया. उसके बाद महिषासुर का तीव्र उत्पात शुरू हो गया. सभी देव-देवताओं का जीना उसने मुश्किल कर दिया था. सारा जग त्राहि त्राहि कर रहा था.

तब सभी देवों ने मिलकर अपनी अपनी शक्ति का अंश देकर देवी के रूप में एक महाशक्ति का निर्माण किया. कई दिनों तक घमासान युद्ध के बाद देवी दुर्गा ने महिषासुर का वध किया और वह महिषासुरमर्दिनी कहलाई. चंडी पाठ सुनते सुनते कई भक्तों की आँखे भर आती है.

चंडी पाठ में महिषासुरमर्दिनी की कथा एक मधुर व लयबद्ध सुर में संस्कृत व बंगला में सुनाई जाती है.

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