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अपने शहर को बचाइऐं

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ठंड के मौसम से लेकर कालबैशाखी तक सिंधु-गंगा से बंगोपसागर तक बड़े पैमाने पर कोहरे के एक घनी परत का विस्तार होता रहता है. इस कोहरे में ऐरोसेल नामक एक प्रकार का उपादान रहता है.
वातावरण के अन्य गैसों पर ठोस तथा तरल कणों का जो अस्तित्व रहता है, उसे ऐरोसेल कहा जाता है.
आम तौर पर ऐरोसेल वायु में हमेशा विद्यमान रहता है.
ऐरोसेल की शोषण क्षमता काफी ज्यादा है. शहरी इलाकों में ऐरोसेल सबसे ज्यादा मात्रा में दूषित पदार्थ का शोषण करता है.
सिलीगुड़ी शहर की आबादी तेजी से बढ़ रही है. शहर के विस्तार के लिए पेड़-पौधों को काट दिया जा रहा है. पर्यावरण की रक्षा का खयाल किसी को नहीं है.
एकमात्र पेड़-पौधे ही वायुमंडल से कार्बन ग्रहण कर वायुमंडल में संतुलन बनाये रखते हैं. पेड़ ही दूषित वायु का एकमात्र शोषक है. पेड़ों की गैर मौजूदगी में कोहरे में छिपे ऐरोसेल की मात्रा कई गुणा बढ़ गई है.
वर्तमान में सिलीगुड़ी में प्रदुषण की मात्रा दिल्ली से भी ज्यादा है.
कोहरा आज जानलेवा वस्तु में तब्दील हो गया है. इसलिए हमारी आँखों में जलन व सांस लेने में तकलीफ हो रही है.
समस्या के समाधान के लिए वायु की गुणवत्ता बढ़ानी होगी. प्रदुषण को नियंत्रण करना होगा. पौधरोपण पर बल देना होगा.
सिलीगुड़ी को प्रदुषण मुक्त करने के लिए हम सभी को मिलकर पहल करनी होगी. क्यूंकि प्रदुषण से खतरा सिर्फ हमें नहीं हमारे परिवार को भी है.
अग्निकांड जैसे झूठे अफवाहों में ध्यान नहीं देना चाहिए।
सिलीगुड़ी शहर को बचने की जिम्मेदारी अब हमारी है.

Source of Article : Anurag Deb, Purdue University, USA.

 

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