January 12, 2026
Sevoke Road, Siliguri
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‘अगर प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया तो क्रशर फूंक दूंगा’ बोले राजू बिष्ट- जनता के लिए कानून हाथ में लेने को तैयार हूं!

"If the administration doesn't pay attention, I will burn down the crusher," said Raju Bisht. "I am ready to take the law into my own hands for the sake of the people!"

सिलीगुड़ी और आसपास के इलाकों में नदियों में अवैध खनन कोई बड़ी बात नहीं रह गई है. शाम ढलते आप किसी भी नदी में चले जाइए. वहां बालू पत्थर निकालने का काम करते श्रमिक और क्रशर मिल जाएंगे. सिलीगुड़ी में ही नहीं, बल्कि सिलीगुड़ी के आसपास जैसे गुलमा आदि इलाकों में भी यह नजारा आम हो चुका है. सुबह से शाम और देर रात तक विभिन्न नदियों में यह नजारा आप देख सकते हैं.

ऐसा नहीं है कि प्रशासन को इसका पता नहीं है. प्रशासन की मिली भगत के बगैर बालू माफिया यह काम कर भी नहीं सकते. कम से कम स्थानीय लोगों का तो यही मानना है. वरना क्या कारण है कि पुलिस चुपचाप उन्हें देखती है लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती है. नौका घाट, माटीगाड़ा, फुलबारी से लेकर गुलमा और सेवक तक बालू माफिया ने अपना कब्जा जमा रखा है. अवैध खनन और क्रशिंग का खेल जारी है.

इससे जन जीवन पर पड़ते प्रभाव को लेकर पर्यावरणविदों और सामाजिक संगठनों का आंदोलन लगातार चलता रहता है. प्रशासन का घेराव और प्रशासन पर हमले जारी रहते हैं. विपक्षी पार्टियों के द्वारा सरकार और प्रशासन को आड़े हाथ लिया जाता है. नेताओं के बड़े-बड़े बोल भी फूटने लगते हैं. परंतु क्या इससे नदियों से अवैध उत्खनन रुक जाता है? इसका जवाब है नहीं.

दार्जिलिंग के भाजपा सांसद राजू बिष्ट को अपने संसदीय क्षेत्र में नदियों में अवैध उत्खनन और क्रशिंग को लेकर मिल रही बड़ी-बड़ी शिकायतों के बाद इन दिनों उनका अभियान नदी बचाओ पर गया है. उन्होंने माटीगाड़ा से अपने अभियान की शुरुआत करते हुए पहले भी प्रशासन को चेताया था. लेकिन इसका कोई असर पड़ता नहीं दिख रहा है. आज एक बार फिर से गुलमा क्षेत्र में नदियों में चल रहे अवैध उत्खनन और क्रशिंग को लेकर उनका पारा गरम हो गया और उन्होंने प्रशासन पर हमला कर दिया. सुनिए उन्होंने क्या कहा है?..

कई बार स्थानीय प्रशासन द्वारा नदियों से बालू पत्थर निकालने की इजाजत मिल जाती है. पर बालू माफिया इसकी आड़ में क्रशर मशीनों को नदी में उतारना नहीं भूलते. पर्यावरण विदों और विशेषज्ञों ने बताया है कि इसका मानव जीवन और स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है. इससे नदियों को भारी क्षति पहुंचती है और परिवेश तथा वातावरण दूषित होता है. कई बार तो नदियों के वजूद पर भी खतरा हो जाता है.

प्रशासन को सिर्फ लाइसेंस देने से मतलब होता है. देख-देख करना प्रशासन आवश्यक नहीं समझता, जिसका फायदा बालू माफिया उठाते रहते हैं. राजू बिष्ट ने बताया कि सिलीगुड़ी और आसपास के इलाकों में कम से कम 20 क्रशर मशीनें अवैध उत्खनन के काम में लगी हुई हैं. उन्होंने क्रशर मशीनों को चलता फिरता मौत का क्रशर बताया है.उन्होंने कहा है कि यह नदियों को समाप्त कर रही है और पानी को प्रदूषित कर रही है.

राजू बिष्ट ने संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा कि अगर किसी दिन मेरा दिमाग घूम गया तो क्रशर में पेट्रोल डालकर आग लगा दूंगा. उन्होंने कहा कि मैं जनता के लिए कानून हाथ में लेने को तैयार हूं. अगर प्रशासन ने उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया तो आगे जो होगा उसके लिए प्रशासन ही जिम्मेदार होगा. बहरहाल यह देखना होगा कि उनकी धमकी और चेतावनी के बाद प्रशासन का अगला कदम क्या होता है!

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