पहाड़ में गोरखालैंड तो उत्तर बंगाल में कामतापुरी राज्य की मांग विभिन्न संगठनों और राजनीतिक दलों के द्वारा बरसों से की जाती रही है. लेकिन ना तो राज्य सरकार और ना ही केंद्र सरकार ने उनकी मांग सुनी है. लेकिन अब अलग राज्य की मांग के बीच एक नई राजनीति शुरू हो गई है. सोशल मीडिया और बहुत से अन्य प्रचार माध्यमों के जरिए यह दावा किया जा रहा है कि सीमांचल केंद्र शासित प्रदेश बनेगा और सिलीगुड़ी को केंद्र शासित प्रदेश की राजधानी बनाया जा सकता है.
सिलीगुड़ी बिहार की सीमा पर स्थित है. अगर आप कटिहार से सिलीगुड़ी आते हैं तो बीच के कई क्षेत्र बंगाल और बिहार के बीच आते हैं.सीमांचल केंद्र शासित प्रदेश बनने पर इन सभी क्षेत्रों को एक में मिलाकर उसकी राजधानी के रूप में सिलीगुड़ी को प्रमुखता दी जा सकती है. हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों और अध्ययनकर्ताओं का मानना है कि अभी किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी.
कुछ जानकार मानते हैं कि भाजपा के एजेंडे में उत्तर बंगाल में चिकन नेक की सुरक्षा भी शामिल है. अगर सीमांचल राज्य का गठन होता है तो चिकन नेक की सुरक्षा के लिए केंद्र एक मजबूत कदम उठा सकता है और ऐसी स्थिति में उसे राज्य से परामर्श लेने की मजबूरी नहीं रहेगी. यानी केंद्र निर्विघ्न तरीके से चिकन नेक पर अपनी सुरक्षा नीति तैयार कर सकता है. पड़ोसी देशों से भी संबंध मजबूत हो सकते हैं. सामरिक दृष्टिकोण से भी यह एक मजबूत कदम होगा.
केद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सीमांचल के तीन दिवसीय दौरे पर हैं. हालांकि उन्होंने स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा है, परंतु उनके भाषणों से ऐसा संकेत मिल रहा है कि भविष्य में बिहार और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्रो को मिलाकर एक नया सीमांचल केंद्र शासित प्रदेश बनाया जा सकता है. अगर ऐसा होता है तो इस बात की संभावना ज्यादा है कि सिलीगुड़ी सीमांचल की नई राजधानी बन सकती है.
बिहार में किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार, जबकि पश्चिम बंगाल में मालदा, उत्तर दिनाजपुर और मुर्शिदाबाद के बहुत सारे इलाके सीमांचल से जुड़े हुए हैं. खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट की माने तो बांग्लादेश की तरफ से अवैध प्रवेश हो रहा है. इन क्षेत्रों में फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले नेटवर्क सीमांचल से निकलकर बंगाल तक सक्रिय तस्करी मार्ग अपना रहे हैं. इससे आबादी का असमान और तीव्र बढाव बढा है. कई रूट किशनगंज, उत्तर दिनाजपुर, मालदा और मुर्शिदाबाद तक जुडते हैं. यानी सीमांचल एक ट्रांसिट गेटवे की तरह काम करता है. यहां से होकर काफी मूवमेंट बंगाल तक जाता है.
भारतीय जनता पार्टी बंगाल में घुसपैठ रोकने के लिए कटिबद्ध है. बंगाल में घुसपैठ पर तभी पूर्ण प्रतिबंध लगेगा, जब सीमांचल में मजबूत शासन व्यवस्था कायम होगी. क्योंकि घुसपैठिए बांग्लादेश से निकलकर सर्वप्रथम सीमांचल में प्रवेश करते हैं. इसके लिए स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक इकाई की आवश्यकता होगी. दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि बंगाल और बिहार के सीमावर्ती जिलों को मिलाकर एक केंद्र शासित प्रदेश का गठन किया जाना जरूरी है. हालांकि अमित शाह ने सिर्फ एक संकेत दिया है लेकिन सोशल मीडिया में उसके अलग मायने निकाले जा रहे हैं.
सीमांचल और उत्तर बंगाल के कई इलाकों में तेज जन सांख्यिकी वृद्धि, धार्मिक जनसांख्यकी परिवर्तन, नयी बसावट पैटर्न और सीमा पार मूवमेंट से जुड़े संकेत स्पष्ट दिखते हैं. भाजपा इसे घुसपैठ का परिणाम बताती है. जबकि टीएमस इसे ध्रुवीकरण की राजनीति का प्रयास कहती है. अमित शाह के सीमांचल दौरे और उनके बयानों से बंगाल की राजनीति गरमा गई है. अमित शाह का दौरा सीमांचल को सुरक्षा का हॉटस्पॉट, जनसांख्यकी बदलाव का अध्ययन क्षेत्र, चिकन नेक की सुरक्षा कवच, पूर्वी भारत की चुनावी रणनीति का केंद्र और सीमा पार मूवमेंट के खिलाफ प्रथम रक्षा पंक्ति शामिल है.
सीमांचल और घुसपैठ के बीच मंत्री ममता बनर्जी की भी राजनीति तेज हो गई है. घुसपैठ के मुद्दे पर दोनों दलों के बीच टकराव पहले से ही जारी है. सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार बिहार का सीमांचल इलाका बंगाल को काफी प्रभावित करता है. आज भी बिहार से होकर कई अवैध गतिविधियां बंगाल में शिफ्ट होती रही है. इसलिए अमित शाह को लगता है कि अगर सीमांचल को केंद्र शासित प्रदेश जैसा कोई शासन तंत्र कायम हो जाए तो इससे घुसपैठ के साथ-साथ आतंक और आतंकी गतिविधियों पर भी पूर्ण निगरानी की जा सकेगी.
अमित शाह ने अपने भाषण में कहा था कि जनसांख्यकी बदलाव तथा घुसपैठ के मामले में बंगाल की स्थिति बहुत ज्यादा गंभीर है. उन्होंने दावा किया है कि बंगाल में सरकार बनते ही घुसपैठ सरकार के पहले एजेंडे में होगा और सरकार गठन के साथ ही एक्शन शुरू हो जाएगा. उन्होंने कहा कि सीमा के 10 किलोमीटर दायरे को अतिक्रमण मुक्त किया जाएगा और यहां बने अवैध निर्माणों को चिन्हित कर तत्काल ध्वस्त कर दिया जाएगा. उनके भाषणों से ऐसा लगता है कि अगर बंगाल में भाजपा की सरकार बनती है तो सीमांचल को केंद्र शासित प्रदेश बनाने की पहल शुरू हो सकती है.
