क्या आप सिलीगुड़ी और आसपास के इलाकों में रहते हैं तथा पश्चिम बंगाल की सरकार में शिक्षामित्र के रूप में नौकरी करते हैं? सिलीगुड़ी और आसपास के इलाकों में अनेक शिक्षक शिक्षा मित्र के रूप में स्कूलों में अपनी सेवा दे रहे हैं. बरसों से वे संघर्ष कर रहे हैं. सरकारी शिक्षकों से भी ज्यादा उन्हें मेहनत करनी पड़ती है. ऊपर से उन्हें समय पर वेतन भी नहीं मिलता और जहां तक वेतन की बात है वेतन के नाम पर उन्हें प्रतिमाह ₹2400 पारिश्रमिक दिया जाता था. मामला अदालत में जाने के बाद ऊंट के मुंह में जीरे के समान उनके वेतन को भी रोक दिया गया था.
इससे कई शिक्षामित्र राज्य सरकार से खफा थे और आंदोलन का रास्ता अख्तियार कर चुके थे. अब हाई कोर्ट के फैसले से उन्हें काफी राहत मिली है. वह काफी खुश बताए जा रहे हैं. कम से कम प्राथमिक मोर्चे पर उन्होंने सफलता प्राप्त कर ली है. इस बात की उन्हें खुशी और संतोष भी है. आपको बताते चलें कि पश्चिम बंगाल सरकार ने 2004 में सर्व शिक्षा मिशन के तहत शिक्षामित्रों की नियुक्ति की थी. उस समय राज्य में वाम मोर्चा की सरकार थी. ऐसे शिक्षामित्रों का मुख्य कार्य पिछड़े इलाकों के स्कूल छोड़े बच्चों को फिर से स्कूल में दाखिला कराना था. इसके साथ ही उनकी पढ़ाई लिखाई की जिम्मेदारी भी संभालनी थी.
उस समय शिक्षामित्र को प्रतिमाह ₹2400 वेतन दिया जाता था. 2013 में नई सरकार के गठन के बाद शिक्षामित्रों के पद में बदलाव करते हुए उन्हें स्वयंसेवक के रूप में घोषित किया गया. 2014 में उनका पारिश्रमिक भी बंद कर दिया गया. इसके साथ ही राज्य सरकार ने उन्हें 60 साल की आयु से पहले ही सेवानिवृत्त करने की बात कही थी.
राज्य सरकार के इस फैसले के खिलाफ शिक्षामित्रो के एक समूह ने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी. 26 अप्रैल 2023 को न्यायमूर्ति रवींद्र नाथ सामंत की एकल बेंच ने राज्य सरकार के फैसले को रद्द कर दिया. इसके बाद राज्य सरकार ने इस फैसले को चुनौती देते हुए डिवीजन बेंच में अपील की थी. अंततः हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने भी सिंगल बेंच के फैसले को बरकरार रखा है.
पश्चिम बंगाल सरकार को कोर्ट से एक पर एक झटके मिलते जा रहे हैं. पहले शिक्षक भर्ती घोटाले मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य में 25000 से अधिक शिक्षकों की नियुक्तियों को रद्द कर दिया, तो अब कोलकाता हाई कोर्ट ने राज्य में शिक्षामित्रों को 60 वर्ष तक नौकरी करने का अधिकार दे दिया है.
कोलकाता हाई कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि राज्य के शिक्षामित्र भी सरकारी स्कूल शिक्षकों की तरह 60 साल की आयु तक नौकरी कर सकते हैं. यह आदेश न्यायमूर्ति राजशेखर म॔था और न्यायमूर्ति अजय कुमार गुप्ता की डिवीजन बेंच ने सुनाया है. बेंच ने स्पष्ट कर दिया है कि पहले दिए गए आदेश को ही लागू किया जाए और उसे बरकरार रखा जाए. अदालत ने यह भी कहा है कि शिक्षामित्र को सेवा में बहाल किया जाए तथा उनका लंबित वेतन राज्य सरकार उन्हें प्रदान करे.
कोर्ट के इस फैसले से सिलीगुड़ी और उत्तर बंगाल समेत प्रदेश के हजारों शिक्षामित्रों को काफी राहत मिली है. दूसरी तरफ स्कूल सेवा आयोग द्वारा नियुक्त शिक्षकों की बर्खास्तगी के बाद बर्खास्त किए गए शिक्षक उदास और निराश हो चुके हैं. हालांकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 7 तारीख को उनसे मिलने जा रही है और राज्य सरकार भी उनके साथ खड़ी है. जो भी हो, कोलकाता हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद यह देखना होगा कि राज्य सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी डिवीजन बेंच के फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में जाती हैं या नहीं.
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