राज्य में 25753 शिक्षकों की नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द करने तथा शिक्षामित्रो की नौकरी 60 साल तक करने के हाई कोर्ट के आदेश के साथ ही ममता बनर्जी की सरकार भारी राजनीतिक दबाव में आ गई है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी डैमेज कंट्रोल करने में जुट गई है. वह 7 तारीख को रास्ते पर आ चुके शिक्षकों से मिलने जा रही है. जाहिर है कि उनके जख्मों पर मरहम लगाने का प्रयास करेंगी. लेकिन क्या यह सब इतना आसान है?
इस बीच विपक्षी पार्टियों ने मुख्यमंत्री को घेरना शुरू कर दिया है. उनसे इस्तीफे की मांग की जा रही है. भाजपा नेता सुकांत मजूमदार ने ममता बनर्जी की सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा है कि शिक्षक भर्ती में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है. इसकी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री की है. इसलिए मुख्यमंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए. माकपा के राज्य समिति के सदस्य सुजन चक्रवर्ती ने कहा है कि राज्य सरकार को नौकरी देने वाले से वास्तविक उम्मीदवारों की सूची को अलग करने के लिए एक साल का समय मिला था. लेकिन राज्य सरकार सूची बनाने में विफल रही और इस कारण जो वास्तविक लोग थे, उनकी भी नौकरी चली गई.
राज्य में 2026 में विधानसभा चुनाव है. राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इसका आगामी विधानसभा चुनाव पर असर होगा. वे त्रिपुरा का उदाहरण देते हैं. त्रिपुरा में मुख्यमंत्री माणिक सरकार के नेतृत्व में माकपा की सरकार थी. 2010 और 2013 में राज्य में स्कूली शिक्षा के विभिन्न स्तरों पर 10000 से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी. परंतु नियुक्ति में अनियमितता और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए त्रिपुरा उच्च न्यायालय में मामला दर्ज किया गया. अंततः अगरतला उच्च न्यायालय ने पूरे पैनल को रद्द कर दिया था. माणिक सरकार इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गई. 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने भी उच्च न्यायालय के आदेश को ही बरकरार रखा था. अगले वर्ष जब त्रिपुरा विधानसभा चुनाव हुए तो उस चुनाव में माणिक सरकार हार गई थी.
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक पार्थ मुखोपाध्याय का मानना है कि स्थितियां कुछ ऐसी ही है. बंगाल में भी अगले साल विधानसभा के चुनाव होंगे. निश्चित रूप से 2026 के विधानसभा चुनाव में भी राज्य भ्रष्टाचार का मामला उठेगा. TMC के कई नेता इससे डरे हुए हैं तथा चिंतित बताए जा रहे हैं. कई नेताओं का मानना है कि इसका अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव पर जरूर असर पड़ेगा. जबकि ऐसे भी टीएमसी के कई नेता हैं, जिन्हें पूरा विश्वास है कि ममता बनर्जी तब तक डैमेज कंट्रोल कर लेंगी. उन्हें लगता है कि ममता बनर्जी कोई साधारण नेता तो है नहीं. ऐसे ऐसे तूफानों का उन्होंने पहले भी सामना किया है.
2024 में लोकसभा चुनाव के दौरान ही कोलकाता उच्च न्यायालय ने 26000 शिक्षकों की नौकरियां रद्द कर दी थी. हालांकि लोकसभा चुनाव में इसका कोई असर नहीं पड़ा. बल्कि 2019 में टीएमसी को जितनी सीटे मिली थी, उससे ज्यादा सीटें टीएमसी को 2024 के लोकसभा चुनाव में मिली थी. जबकि दूसरी ओर भाजपा की सीटों की संख्या घट गई. इसलिए उन्हें लगता है कि ममता बनर्जी डैमेज कंट्रोल कर लेगी.
आपको बताते चलें कि 2016 के शिक्षक भर्ती घोटाले की 2022 में सीबीआई जांच का आदेश दिया गया था. सीबीआई ने मामले की जांच करते हुए पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ,पूर्व मंत्री परेश अधिकारी, शांति प्रसाद सिन्हा, सुबीरेश भट्टाचार्य,मानिक भट्टाचार्य समेत कई टीएमसी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की थी. उनमें से अधिकांश टीएमसी नेताओं को गिरफ्तार भी किया था. हालांकि कई नेताओं को तुरंत जमानत मिल गई.लेकिन पार्थ चटर्जी आज भी जमानत की उम्मीद लगाए बैठे हैं.
वर्तमान में बंगाल की सियासत में उसी तरह का उबाल है, जिस तरह आरजीकर मामले में देखा गया था. लोग चर्चा करने लगे हैं कि क्या 2026 में ममता बनर्जी की सरकार सत्ता से बाहर हो जाएगी या फिर ममता बनर्जी डैमेज कंट्रोल कर लेंगी और चुनाव में अपनी जीत का सिलसिला बनाए रख सकेगी?