आज सिलीगुड़ी में कई लोगों ने भूकंप महसूस किया है तो कई लोगों को कुछ पता ही नहीं चला. पिछले दो महीने में यहां कई बार भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं. विशेषज्ञों की नजर में यह स्थिति चिंताजनक है. क्योंकि सिलीगुड़ी को सबसे ज्यादा भूकंप संभावित क्षेत्र में रखा गया है. बार-बार सिलीगुड़ी में धरती का कंपन किसी बड़े भूकंप की ओर इशारा करता है. यह हम नहीं, बल्कि विशेषज्ञ बता रहे हैं.
दार्जिलिंग जिला के अंतर्गत समतल क्षेत्र सिलीगुड़ी को भूकंप की संवेदनशीलता के जोन 6 में रखा गया है. इसका अर्थ है कि भूकंप संभावित क्षेत्र में यह सबसे ज्यादा खतरे में है. विशेषज्ञों के अनुसार हिमालय क्षेत्र में अगर सबसे ज्यादा कहीं खतरा है तो वह सिलीगुड़ी में ही है. भूकंप का इतिहास भी कुछ इसी बात की ओर इशारा करता है. 2011 में सिक्किम में भूकंप आया तो सिलीगुड़ी में बड़ी तबाही आई थी. इसी तरह से 2015 में नेपाल में भूकंप आया तब भी सिलीगुड़ी में जान माल की तबाही हुई थी.
विशेषज्ञों के अनुसार सिलीगुड़ी की मिट्टी काफी नरम है. इसी नरम मिट्टी में बहुमंजिली भवन का निर्माण खतरे को और ज्यादा बढ़ा देता है. कई बार तो बिल्डर भवन का निर्माण गैर कानूनी तरीके से करते हैं, जहां भूकंप के दृष्टिकोण से भवन निर्माण का कोई ध्यान नहीं रखा जाता है. जबकि भवन निर्माण का एक अनिवार्य नियम यह भी है कि जोन 6 में किए जाने वाले निर्माण कार्यों को भूकंप निरोधी तरीके से निपटाया जाना जरूरी है.
सिलीगुड़ी की आबादी बढ़ने के साथ ही यहां मकान का निर्माण भी तेजी से हुआ है. पर सवाल यह है कि यहां कितने मकान भूकंप निरोधी तरीके से बनाए गए हैं. इसी तरह से सिलीगुड़ी की मिट्टी में परिवहन का भी भार बढा है. यातायात के साधनों का काफी विकास हुआ है. इससे यहां की जमीन पर दबाव बढ़ा है.
सिलीगुड़ी से लेकर दार्जिलिंग पहाड़ और सिक्किम में जिस तरह से सड़क से लेकर रेलवे तक के सरकारी प्रोजेक्ट चल रहे हैं, ऐसे में भी खतरा सिलीगुड़ी के लिए ज्यादा है. अगर सिक्किम और दार्जिलिंग में 7 की तीव्रता वाला भूकंप आता है तो ऐसे में सिलीगुड़ी में जान माल का भारी नुकसान हो सकता है. विशेषज्ञों की माने तो यहां निर्माण कार्यों को भूकंप निरोधी तरीके से ही पूरा किया जाना चाहिए.
भूगर्भ विशेषज्ञों ने जब से सिलीगुड़ी को जोन 6 में रखा है, तभी से ही प्रशासनिक हलचल बढ़ गई है. सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर गौतम देव से लेकर सिलीगुड़ी के विधायक शंकर घोष भी मानते हैं कि भूकंप का यहां खतरा ज्यादा है. जिस तरह से यहां मकान का निर्माण कार्य हुआ है, उससे अगर यहां भूकंप आता है तो जान माल की भारी तबाही हो सकती है. शंकर घोष कहते हैं कि सिलीगुड़ी में भूकंप निरोधी तरीके से बिल्डिंग का निर्माण नहीं किया जाता है. यह सिलीगुड़ी नगर निगम की जिम्मेवारी है. लेकिन निगम का इस ओर कोई ध्यान नहीं है.
जबकि गौतम देव बताते हैं कि सिलीगुड़ी नगर निगम हर उस कदम को उठाने के लिए तैयार है, जिससे अगर यहां भूकंप होता है तो जान माल की तबाही कम से कम हो सके. इसके लिए भवन निर्माण से लेकर सभी तरह के भूकंप निरोधी उपाय करने होंगे तो किए जाएंगे. उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र वैज्ञानिकों और भूगर्भ विशेषज्ञों का है. अगर उनका कोई दृष्टिकोण या पैमाना सामने आता है तो सिलीगुड़ी नगर निगम उस पर खरा उतरने की कोशिश करेगा.
आज यह चर्चा और चिंता दोनों इसलिए बढ़ गई है कि हाल ही में सिलीगुड़ी क्षेत्र को भूकंप वैज्ञानिकों ने जोन 6 में रखा है. ऐसे में सिलीगुड़ी को जान माल की भारी तबाही से बचाने के लिए प्रशासन, भवन निर्माता और बुद्धिजीवियों को आगे आने की जरूरत है. जब तक एक संयुक्त पहल नहीं होगी, तब तक भूकंप का खतरा भी बढ़ता ही जाएगा.
आज सिलीगुड़ी में आए भूकंप के झटके कमजोर जरूर थे, लेकिन कल यह काफी मजबूत हो सकते हैं. ऐसे में विनाश को रोकना मुमकिन नहीं होगा. इसलिए समय रहते नागरिक, प्रशासन और नेताओं को उचित कदम उठाने की जरूरत है जिससे कि सिलीगुड़ी भूकंप निरोधी क्षेत्र कायम हो सके.
