जिस तरह से कोलकाता में शुक्रवार को एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक विजेता स्वप्ना बर्मन को TMC में शामिल कर लिया गया, उसके बाद से उत्तर बंगाल की राजनीति में यह चर्चा तेज हो गई है कि डाबग्राम फुलबारी सीट से स्वप्ना बर्मन को टीएमसी अपना उम्मीदवार बना सकती है. राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा शुरू हो गई है कि गौतम देव ने अपनी परंपरागत सीट क्यों छोड़ी? क्या उन्होंने स्वप्ना बर्मन के लिए अपनी सीट कुर्बान कर दी?
दरअसल यह सब गौतम देव की सोची समझी राजनीति और रणनीति का एक हिस्सा है. लोग तो यह भी कह रहे हैं कि उन्होंने इस सीट से शिखा चटर्जी को कड़ी टक्कर देने के लिए स्वप्ना बर्मन को उतारने का फैसला किया है. क्योंकि गौतम देव को भी पता है कि डाबग्राम फुलवारी क्षेत्र में भाजपा की शिखा चटर्जी काफी मजबूत स्थिति में है. ऐसे में उन्हें कड़ी टक्कर देने के लिए एक हैवी वेट उम्मीदवार की जरूरत है और स्वप्ना बर्मन से अच्छा उम्मीदवार भला कौन हो सकता है!
हालांकि टीएमसी की ओर से अभी इस पर कोई टिप्पणी नहीं की गई है. परंतु राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई है. आज सिलीगुड़ी से प्रकाशित कई समाचार पत्रों की सुर्खियों में भी डाबग्राम फुलवारी सीट और स्वप्ना बर्मन के नाम अंकित थे. सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उत्तर बंगाल खासकर सिलीगुड़ी और आसपास की विधानसभा सीटों पर पार्टी की जीत सुनिश्चित करने के लिए गौतम देव को अधिकृत किया है. इसलिए यहां से टीएमसी के उम्मीदवार का फैसला गौतम देव की रजामंदी से ही हो सकता है.
उत्तर बंगाल की विधानसभा सीटों पर टीएमसी का उम्मीदवार तय करने के लिए कई बातों का ध्यान रखा जा रहा है. जातिगत समीकरण, प्रसिद्धि, उम्मीदवार की साफ छवि और उसकी स्वयं की लोकप्रियता शामिल है. अगर कल को स्वप्ना बर्मन डाबग्राम फुलबारी सीट से तृणमूल की उम्मीदवार होती है तो इसका सारा श्रेय गौतम देव को जाएगा. गौतम देव की पहल पर ही स्वप्ना को टीएमसी में शामिल कराया गया है.
सूत्र बताते हैं कि गौतम देव ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भरोसा दिलाया है कि अगर स्वप्ना बर्मन को यहां से उम्मीदवार बनाया जाता है, तो उत्तर बंगाल की अन्य विधानसभा सीटों पर भी इसका बड़ा प्रभाव पड़ेगा. स्वप्ना बर्मन राजवंशी समुदाय से आती हैं. वह जलपाईगुड़ी जिले के कालीगंज गांव की रहने वाली है. राजनीतिक जानकारों के अनुसार तृणमूल कांग्रेस की राजनीति स्पष्ट है कि इस सीट से लगभग 40% राजवंशी और महिला वोटरों को साधा जाए.
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि केवल चुनावी रणनीति के कारण ही गौतम देव ने अपनी परंपरागत सीट छोड़ी है अन्यथा वे इस सीट से दो बार विधायक रह चुके हैं. पिछली बार वह यहां चुनाव हार गए थे. गौतम देव ने एक सरकारी कार्यक्रम में अपनी यह सीट छोड़ने का फैसला किया था. तब यह कयास लगाया जा रहा था कि गौतम देव सिलीगुड़ी से चुनाव लड़ेंगे और यहां से डिप्टी मेयर रंजन सरकार अथवा टीएमसी का कोई बड़ा चेहरा चुनाव लड़ सकता है.
लेकिन जिस तरह से रातों रात स्वप्ना बर्मन को टीएमसी में शामिल कराया गया, उसके बाद यह स्पष्ट हो गया कि गौतम देव की चुनाव जीतने की सोची समझी रणनीति क्या है. अब देखना होगा कि स्वप्ना बर्मन गौतम देव के लिए कितना भरोसेमंद साबित होती है. क्या वह शिखा चटर्जी को चुनाव में धूल चटा सकती है? यह भी देखना होगा.
जहां तक स्वप्ना बर्मन की लोकप्रियता और उपलब्धियों की बात करें तो वह 2018 एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीत चुकी है. उन्होंने अर्जुन अवार्ड भी हासिल किया है. यह बड़ी बात होती है. अब यह देखना होगा कि जिस तरह से कयास लगाया जा रहा है, क्या वह सचमुच धरातल पर खड़ा होता है? बस कुछ ही दिनों की बात है. तो इंतजार करिए उस दिन का, जब टीएमसी अपने उम्मीदवार की बाकायदा घोषणा करेगी.
