January 23, 2026
Sevoke Road, Siliguri
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दार्जिलिंग में अवैध निर्माण को रोकने का कोलकाता हाईकोर्ट का निर्देश!

दार्जिलिंग पहाड़ खतरे में है. यह हम नहीं कह रहे हैं बल्कि इकोलॉजिकल सूत्र बताते हैं. कुछ ही दिनों पहले पर्यावरणविदों और भू वैज्ञानिकों ने पहाड़ को लेकर एक सतर्कता संदेश जारी किया था. इसमें कहा गया था कि पहाड़ में अनियमित व अनियंत्रित विकास और निर्माण इकोलॉजी खतरे को बढ़ा रहे हैं. पहाड़ में जिस गति से भूस्खलन की घटनाएं बढ़ रही हैं , उसके पीछे कहीं ना कहीं अनियमित, अनियंत्रित और अवैध निर्माण प्रमुख जिम्मेदार हैं.

ये अवैध निर्माण पहाड़ की इकोलॉजी को कमजोर कर रहे हैं. पारिस्थितिक असंतुलन बढ़ने से पहाड़ कमजोर होता है और कभी भी जान माल को भारी नुकसान पहुंचा सकता है. बरसात के दिनों में पहाड़ी अंचलों में ऐसी घटनाएं बढ़ जाती हैं. इसका कारण यही है कि भौतिक निर्माण और अबाध गति से विकास पहाड़ के आधार को कमजोर कर रहे हैं, जबकि चोटी पर आवासीय निर्माण और विकास की होड़ में पहाड़ अपना भौतिक स्वरूप खो रहा है.

लेकिन इन सभी खतरों के बावजूद पहाड़ सचेत होने को तैयार नहीं है. जनसंख्या का बढ़ता दबाव, पहाड़ पर हो रहे नए-नए निर्माण पहाड़ की डेमोग्राफी को बदल रहे हैं. शासकीय तंत्र को पर्यावरण और इकोलॉजी से ज्यादा चिंता अपना खजाना भरने की होती है. दार्जिलिंग में GTA पहाड़ी क्षेत्र के विकास और लोगों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए जिम्मेदार है. पहाड़ के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने, परिवेश, सुरक्षा और स्थिरता के प्रति भी उसकी उतनी ही जिम्मेदारी है.

ऐसे में किसी भी शासकीय इकाई को कोई कानून अथवा आदेश बनाने या जारी करने से पहले इकोलॉजी का हित जरूर देखना चाहिए. खासकर तब, जब दुनिया भर के पर्यावरण वैज्ञानिक और विशेषज्ञ पहाड़ की स्थिरता पर सवाल उठा रहे हैं. खासकर दार्जिलिंग को खतरे में देख रहे हैं. हालांकि जीटीए कागजों पर तो बड़ी-बड़ी बातें और पर्यावरण, परिवेश और पारिस्थितिक संतुलन और सुरक्षा की बातें करता है, पर जमीन पर वह नहीं दिखता है. अगर ऐसा नहीं होता तो दार्जिलिंग में अबाध गति से अवैध निर्माण पर कोर्ट टिप्पणी नहीं करता.

कोलकाता हाई कोर्ट ने इस मसले को गंभीरता से लिया है और दार्जिलिंग नगर पालिका को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई तक दार्जिलिंग पहाड़ में चल रहे अवैध निर्माण को रोका जाए और जो निर्माण हो चुका है, उस पर भी ब्रेक लगाया जाए. हालांकि GTA पहले से भी इस मुद्दे पर सावधानी पूर्वक कदम रख रहा है, परंतु सख्ती के अभाव में जीटीए का आदेश सिर्फ कागज का एक टुकड़ा बन कर रह गया है.

दार्जिलिंग पहाड़ की स्थिरता, पारिस्थितिक तंत्र को बनाए रखने और भूस्खलन के खतरे से बचाव के लिए काफी समय से पर्यावरणविद और इकोलॉजिस्ट प्रयास कर रहे हैं. उनके द्वारा सजगता कार्यक्रम भी समय-समय पर आयोजित होते रहे हैं. यहां के कुछ पत्रकारों ने भी समय-समय पर दार्जिलिंग नगर पालिका और GTA को सचेत किया है. इकोलॉजी पर अपनी लेखनी चलाने वाले एक पत्रकार चंद्रवंशी सिंहा ने कुछ समय पहले दार्जिलिंग में चल रहे अंधाधुंध अवैध निर्माण पर चिंता जताते हुए कोलकाता हाई कोर्ट में एक लिखित याचिका दायर की थी.

हाई कोर्ट की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए दार्जिलिंग नगर पालिका को तुरंत अवैध निर्माण कार्य को रोकने का आदेश दिया है. चीफ जस्टिस सुजय पाॅल तथा जस्टिस पार्थसारथी सेन की पीठ ने दार्जिलिंग नगर पालिका को निर्देश जारी किया है कि कोर्ट में अगली सुनवाई से पहले वहां चल रहे अवैध निर्माण कार्य पर रोक लगाई जाए. यह खबर 23 जनवरी 2026 को लोकप्रिय East Mojo में प्रकाशित हुई है.

हाई कोर्ट के इस निर्देश के बाद यह देखना होगा कि दार्जिलिंग नगर पालिका और GTA का अगला कदम क्या होता है. सवाल यह भी है कि जीटीए और नगर पालिका पहाड़ में इकोलॉजी और सुरक्षा को लेकर कितना गंभीर है और इसके लिए क्या-क्या कदम उठाए जा रहे हैं. बहरहाल कोलकाता हाई कोर्ट की टिप्पणी दार्जिलिंग नगर पालिका और GTA को सोच समझकर पहाड़ की डेमोग्राफी और स्थायित्व को ध्यान में रखकर अपनी कार्य योजना लागू करने को खबरदार करती है.

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