नेपाल में 5 मार्च को चुनाव होने जा रहा है. नेपाल की जनता नेपाल के अगले प्रधानमंत्री का चुनाव करने जा रही है. अगले प्रधानमंत्री के रूप में संभावित उम्मीदवारों में केपी शर्मा ओली, काठमांडू के मेयर रह चुके बालेंद्र शाह और गगन थापा चुनाव लड़ रहे हैं. जैसे-जैसे समय करीब आता जा रहा है, नेपाल में सर्दियों के बावजूद चुनाव की गर्माहट बढ़ती जा रही है. सबके मन में यही सवाल है कि इस बार नेपाल का अगला प्रधानमंत्री कौन होगा?
नेपाल में युवाओं में बालेंद्र शाह का जबरदस्त क्रेज है. जब नेपाल में तख्तापलट हुआ था, तब वहां के युवाओं ने बालेंद्र शाह को ही अंतरिम प्रधानमंत्री बनाने की कोशिश की थी. लेकिन बालेंद्र ने युवाओं की मांग को ठुकरा दिया और कहा कि वह पूरे कार्यकाल के लिए प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं. बालेंद्र ने काठमांडू के मेयर पद से इस्तीफा दे दिया है. वे राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी में शामिल हो गए हैं. पार्टी की ओर से उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया है.
बालेंद्र शाह का मुकाबला सीधा केपी शर्मा ओली से है. दोनों ही झापा पांच निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं. यह कोसी प्रांत का पूर्वी इलाका है, जहां राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं. केपी शर्मा ओली 6 बार झापा जिले से संसद के लिए चुने गए हैं. नेपाल की सबसे बड़ी कम्युनिस्ट पार्टी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल ने ओली को अपना प्रधानमंत्री उम्मीदवार घोषित किया है.
चुनाव मैदान में एक तीसरा प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार भी है. नाम है गगन थापा. नेपाल की सबसे पुरानी पार्टी नेपाली कांग्रेस ने गगन थापा को अपना प्रधानमंत्री उम्मीदवार घोषित किया है. प्रधानमंत्री पद के तीनों उम्मीदवारों की तुलनात्मक चर्चा की जाए तो उनमें बालेंद्र सब पर भारी पड़ते हैं. बालेंद्र शाह की अपनी छवि है और नेपाल के युवा उन्हें अपना हीरो मानते हैं.
दूसरी तरफ देखा जाए तो नेपाल के युवा केपी शर्मा ओली को पसंद नहीं करते हैं. सितंबर 2025 में जेन जेड आंदोलन ने पूरे देश में हलचल मचा दी थी. भ्रष्टाचार ,खराब शासन और पुराने नेताओं की सत्ता पर पकड़ ने वहां के युवाओं में तीव्र गुस्सा भर दिया था और वे बालेंद्र शाह के नेतृत्व में सड़कों पर उतर गए थे. इसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देकर भागना पड़ा था.
नेपाल की राजनीति पर सूक्ष्म नजर बनाए रखने वाले अधिकांश राजनीतिक विश्लेषकों और जानकारों का मानना है कि नेपाल के युवा मानते हैं कि केपी शर्मा ओली ने आंदोलन के दौरान उन पर बर्बरता की थी. जबकि दूसरी ओर यह आंदोलन बालेंद्र शाह के नेतृत्व में हुआ था और उन्होंने युवाओं को नेतृत्व प्रदान किया था. पूर्व प्रधानमंत्री ओली का माइनस पॉइंट यह है कि उन्होंने पार्टी के अंदर अपने विरोधियों को किनारे कर दिया और निविर्वाद नेता के रूप में उभरे हैं.
लेकिन उनके सामने उनका प्रतिद्वंदी बालेंद्र शाह खड़े होंगे, जिन्हें हराना वर्तमान स्थितियों में कठिन साबित हो सकता है. क्योंकि बालेंद्र शाह की नेपाल में भारी लोकप्रियता है. इसलिए केपी शर्मा ओली का चुनावी डगर अत्यंत कठिन है. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह चुनाव नेपाल में पुराना वर्सेस नया का टेस्ट है.
अगर नई पीढ़ी चुनाव जीत जाती है तो नेपाल की राजनीति पूरी तरह बदल सकती है. लेकिन अगर केपी शर्मा ओली फिर से जनता का विश्वास मत प्राप्त कर लेते हैं तो जैन जेड आंदोलन ही सवालों के घेरे में आ जाएगा. बहरहाल यह फैसला 5 मार्च को होने जा रहा है. यह देखना होगा कि नेपाल की जनता का असली हीरो कौन है. दावे सभी के अलग-अलग हैं. लेकिन असली मालिक नेपाल की जनता है, जो अपना प्रधानमंत्री चुनते समय विवेक और बुद्धि का इस्तेमाल करेगी.
