February 17, 2026
Sevoke Road, Siliguri
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नौकरी चाहिए या मासिक भत्ता?

प्रत्येक युवक या युवती का एक ही सपना होता है कि उसे एक अदद नौकरी मिले. नौकरी की तलाश में मारे मारे फिर रहे युवक युवतियों को जिंदगी की अनेक जद्दोजहद से गुजरना पड़ता है. लेकिन नौकरी सभी को नहीं मिल पाती है. ऐसे में युवा कुंठित हो जाते हैं. उनके सपने बिखरने लगते हैं. ऐसे नौजवानों को अपने रणनीतिक जाल में फंसाने के लिए एक तरफ टीएमसी तो दूसरी तरफ बीजेपी का अभियान चल रहा है.

टीएमसी उन्हें मासिक भत्ता देना चाहती है तो बीजेपी कहती है कि मासिक भत्ता से क्या होगा! उन्हें तो नौकरी चाहिए. एक तरफ टीएमसी के संचालित बेरोजगारी भत्ता कैंपों में नौजवानों की भीड़ उमड़ रही है तो दूसरी तरफ 20 फरवरी तक चलने वाले भारतीय जनता युवा मोर्चा के कैंपों में मुख्यमंत्री से सवाल और उन्हें टर्मिनेट के इच्छुक युवा युवती भाजपा के छपे छपाए फार्म पर हस्ताक्षर करने आ रहे हैं. वे इस पत्र के जरिए यह चाहते हैं कि उन्हें मासिक भत्ता नहीं बल्कि नौकरी चाहिए. अगर आप नौकरी नहीं दे सकती हैं तो आप गद्दी छोड़ दीजिए.

विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्देश पर पूरे राज्य में बेरोजगार नौजवान नवयुवतियों के लिए ₹1500 मासिक भत्ता देने का ऐलान किया गया है. इसके लिए 20 साल से लेकर 40 साल तक की उम्र के माध्यमिक उत्तीर्ण लड़के लड़कियों से फार्म भरवाए जा रहे हैं. सिलीगुड़ी नगर निगम इलाके में भी बनाए गए कई कैंपों में उनकी भीड़ देखी जा सकती है. यहां बेरोजगारी भत्ता पाने की उम्मीद में लड़के लड़कियां आ रहे हैं.

भा’रतीय जनता पार्टी ने इसकी जवाबी तैयारी शुरू कर दी है. सिलीगुड़ी भाजयुमो की ओर से पूरे विधानसभा क्षेत्र में ‘नौकरी चाहिए भाजपा चाहिए’ जैसे स्लोगन के साथ कैंप का संचालन किया जा रहा है. भारतीय जनता युवा मोर्चा की ओर से चलाए जा रहे कैंपों में ऐसे लड़के लड़कियां आ रहे हैं, जिन्हें मासिक भत्ता नहीं बल्कि नौकरी चाहिए. उनसे एक फॉर्म भरवाया जा रहा है. उनका हस्ताक्षरित यह फार्म ममता बनर्जी को भेजा जाएगा. वास्तव में यह फॉर्म मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का टर्मिनेशन लेटर है. जिसमें लड़के लड़कियां मुख्यमंत्री से मांग करेंगे कि उन्हें बेरोजगारी भत्ता नहीं नौकरी चाहिए.

भारतीय जनता युवा मोर्चा का साफ कहना है कि बेरोजगार युवक युवतियों को ₹1500 मासिक भत्ता देकर उनका संसार नहीं चलाया जा सकता है. उन्हें नौकरी चाहिए. जो ममता बनर्जी की सरकार नहीं दे सकती है. भारतीय जनता युवा मोर्चा के नेताओं का आरोप है कि पिछले 15 सालों में ममता बनर्जी की सरकार ने राज्य के नौजवानों को बेरोजगारी की दलदल में धकेला है. उनकी नौकरी छीनकर किसी और को दे दी गई. जो इसके पात्र भी नहीं थे.अब वोट से पहले ममता बनर्जी नौजवानों को बेवकूफ बना रही है. जबकि भारतीय जनता पार्टी की यहां सरकार बनने पर पात्र व्यक्तियों को नौकरी दी जाएगी.

भारतीय जनता युवा मोर्चा की ओर से कहा गया है कि सिलीगुड़ी के सभी भागों में पार्टी की ओर से एक विशेष अभियान चलाया जाएगा, जिसमें यहां के बेरोजगार युवक युवतियों को नौकरी देने के लिए एक फॉर्म भरवाया जाएगा. लेकिन उन्हें यह मंजूर नहीं है कि ममता बनर्जी की सरकार केवल ₹1500 महीने देकर उन्हें घर पर बैठने के लिए मजबूर करे. कुछ इसी तरह की बात राजू बिष्ट भी कहते हैं कि एक तरफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य के युवाओं को बेरोजगार बना दिया है. अब उन्हें ₹1500 मासिक भत्ता, वह भी चुनाव से पहले देने की बात करती है तो क्या ₹1500 मासिक भत्ता से उनका संसार चल जाएगा?

राजू बिष्ट ने आरोप लगाया है कि ममता बनर्जी मासिक भत्ता के जरिए यहां के नौजवानों को घर पर बिठा देना चाहती है. आज की इस महंगाई के युग में क्या ₹1500 से घर संसार चलाया जा सकता है.सिलीगुड़ी के विधायक शंकर घोष भी कुछ ऐसा ही कहते हैं. वह पूछते हैं कि आपको नौकरी चाहिए या मासिक भत्ता? शंकर घोष ने सिलीगुड़ी के शिक्षित बेरोजगार नौजवान नवयुवतियों की बात की और कहा कि पढ़े लिखे उच्च शिक्षित व्यक्ति नौकरी न मिलने से टोटो चलाकर अपना जीवन चला रहे हैं. मुख्यमंत्री उनके लिए क्यों नहीं सोचती है?

उन्होंने आरोप लगाया है कि पात्र व्यक्तियों की नौकरी की परीक्षा पिछले 15 सालों में हुई ही नहीं और जिन्हें नौकरी मिलनी चाहिए उन्हें नौकरी मिलती ही नहीं और जो लोग नौकरी के पात्र नहीं है उनसे घूस लेकर नौकरी दे दी जाती है. इस तरह से ममता बनर्जी की सरकार पिछले 15 सालों में भ्रष्टाचार और घोटालों को जन्म देती रही है. उन्होंने आशा व्यक्त की है कि 2026 में राज्य में बीजेपी की सरकार होगी तो यहां के शिक्षित बेरोजगार नौजवानों के लिए नौकरी की व्यवस्था की जाएगी.

डॉ शंकर घोष ने कहा कि उत्तर बंगाल में ना फैक्ट्री है ना ही उद्योग धंधे हैं. इसलिए यहां बेरोजगारी ज्यादा है.अगर यहां फैक्ट्री लगती, उद्योग धंधों का विस्तार होता तो यहां के नौजवान अपने पैरों पर खड़े होते. अब जब चुनाव का समय आया है तो मुख्यमंत्री को ऐसे नौजवानों की सुध आई है. भला ₹1500 महीने में उनका क्या भला हो सकता है! यह आसानी से समझा जा सकता है. शंकर घोष ने कहा कि मुख्यमंत्री ने नौजवानों का वोट हासिल करने के लिए चाल चली है. लेकिन वह इसमें कामयाब नहीं हो सकेगी.

सूत्रों से जो जानकारी मिल रही है, उसके अनुसार भारतीय जनता युवा मोर्चा अगले कुछ दिनों में यहां विशेष कैंपों का आयोजन करने जा रहा है. इस कैंप के जरिए नौकरी के इच्छुक नौजवान लड़के लड़कियों का मार्गदर्शन किया जाएगा और उन्हें नौकरी दिलाने के लिए प्रयास किया जाएगा. अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बनाम भाजपा की इस जंग में कौन सी पार्टी पर यहां के नौजवान,शिक्षित बेरोजगार लड़के लड़कियां अधिक भरोसा करते हैं.

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