टीएमसी ने राज्य विधानसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है और पूरे विश्वास के साथ कहा है कि इस बार टीएमसी 226 से ज्यादा सीटों पर जीत हासिल करेगी. राज्य में ममता बनर्जी और सुबेंदु अधिकारी की जोर आजमाइश होने वाली है. भवानीपुर से ममता बनर्जी चुनाव लड़ रही हैं. यहीं से सुवेंदु अधिकारी भी उनके खिलाफ ताल ठोक रहे हैं.
ममता बनर्जी बीजेपी को हराने के लिए कुछ भी करने को तैयार है. उन्होंने बीजेपी के लिए वोट का बहिष्कार किया है. उन्होंने No वोट for बीजेपी का नारा भी दिया और पूरे विश्वास के साथ कहा कि भाजपा 50 सीटों पर भी जीत हासिल नहीं कर पाएगी. पार्टी के द्वारा राज्य की लगभग सभी सीटों के लिए प्रत्याशियों की घोषणा कर दी गई है. पहाड़ में अनित थापा की पार्टी के साथ गठबंधन या समर्थन के कारण टीएमसी ने दार्जिलिंग, कर्सियांग और कालिमपोंग के लिए अपने उम्मीदवार नहीं उतारे हैं.
टीएमसी हर हालत में पहाड़ की तीनों सीटों पर बीजेपी को शिकस्त देना चाहती है. उन्होंने पहले ही भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा और उसके नेता अनित थापा से हाथ मिला लिया है. अनित थापा का पहाड़ में वर्चस्व है. वह GTA के चेयरमैन भी है. अनित थापा ने पहले ही पहाड़ की तीनों विधानसभा सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी थी. इसमें ममता बनर्जी का परोक्ष रूप से समर्थन भी उन्हें हासिल था.
2021 के चुनाव में भी अनित थापा की पार्टी ने इन सीटों के लिए अपने उम्मीदवार खड़े किए थे. लेकिन उनमें से कालिमपोंग सीट पर ही उन्हें जीत मिली थी. जबकि बाकी दोनों सीटें दार्जिलिंग और कर्सियांग भाजपा के खाते में गई थी. भाजपा को रोकने के लिए यहां टीएमसी क्या करेगी? क्या अनित थापा टीएमसी के साथ मिलकर भाजपा का मुकाबला कर सकेंगे?
पहाड़ का चुनावी इतिहास यह दर्शाता है कि तीनों विधानसभा सीटों का चुनाव परिणाम क्षेत्रीय अथवा राष्ट्रीय पार्टियों से ज्यादा उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि पर निर्भर करता है. इसलिए यह देखना होगा कि भारतीय जनता पार्टी यहां से किसे अपना उम्मीदवार बनाती है.
खैर, तृणमूल कांग्रेस द्वारा घोषित उम्मीदवारों के सामाजिक और राजनीतिक संतुलन पर एक नजर डालना जरूरी है. पार्टी के द्वारा घोषित उम्मीदवारों में इस बार 52 महिलाएं, 78 अनुसूचित जाति, 17 अनुसूचित जनजाति और 47 मुस्लिम समुदाय के उम्मीदवार शामिल है. इसके अलावा पार्टी ने इस बार कई नए और युवा चेहरों को मौका दिया है. कई मौजूदा विधायकों तथा कई मंत्रियों के टिकट भी काटे गए हैं. क्रिकेटर व मंत्री मनोज तिवारी का पार्टी ने टिकट काट दिया है. इस बार पार्टी ने कई विधायकों का सीट भी बदल दिया है.
इसके विपरीत भाजपा द्वारा घोषित उम्मीदवारों की सूची में पुराने चेहरों को ही वरीयता दी गई है. जो नए चेहरे उतारे गए हैं, कुछ इलाकों में उनके खिलाफ पार्टी में ही असंतोष देखा जा रहा है. सिलीगुड़ी में भाजपा ने गौतम देव के सामने शंकर घोष को खड़ा किया है. शंकर घोष सिलीगुड़ी में कितना लोकप्रिय है, यह तो पता नहीं. परंतु उनके साथ एक नकारात्मक बिंदु यह है कि विधायक रहते हुए भी शंकर घोष सिलीगुड़ी नगर निगम का चुनाव हार गए थे. टीएमसी जरूर इसे मुद्दा बना सकती है.
बहरहाल जंग शुरू हो चुकी है. कौन दल या नेता कितने पानी में है, इसका फैसला जनता करेगी. वैसे जानकार मानते हैं कि टीएमसी द्वारा घोषित उम्मीदवारों की सूची संतुलित और सोच समझ कर तैयार की गई है. ममता बनर्जी ने सूची तैयार करते समय काफी मेहनत की है. जो भी हो, असली मालिक जनता है.
