चुनाव आयोग ने राज्य के पुलिस अधिकारियों, शासनाधिकारियों, मुख्य सचिव, गृह सचिव आदि का तबादला करने/हटाने के बाद अब ताबड़तोड़ जमीनी स्तर पर काम करना शुरू कर दिया है. राज्य में 55 विधानसभा क्रिटिकल घोषित किया गया है, जहां निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान कराने की गंभीर चुनौती है. इन क्षेत्रों के लिए लगभग ढाई लाख केंद्रीय जवान तैनात रहेंगे.
भारतीय चुनाव आयोग ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल को सख्त निर्देश दिया है. मुख्य चुनाव आयुक्त के द्वारा दिए गए निर्देशों के बाद राज्य मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने सभी प्रशासनिक अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया है कि चुनाव प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की त्रुटि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
इस बीच चुनाव आयोग ने राज्य के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों से मिली रिपोर्ट के बाद 55 विधानसभा क्षेत्रों को संवेदनशील घोषित कर दिया है. इनमें उत्तर बंगाल के कई विधानसभा क्षेत्र भी शामिल है. चुनाव आयोग ने व्यय संवेदनशीलता को देखते हुए यह निर्णय लिया है.
मालूम हो कि पिछले दिनों छापे की कार्रवाई में राज्य के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों से लगभग 112 करोड रुपए की अवैध नगदी बरामद हुई थी. इस रिपोर्ट के आने के बाद चुनाव आयोग ने यह कदम उठाया है. इन क्षेत्रों में मतदाता बिना किसी डर के निष्पक्ष मतदान कर सकें, इसके लिए चुनाव आयोग के द्वारा सुरक्षा व्यवस्था कडी की जा रही है. आयोग ने केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की लगभग 2500 कंपनियों को तैनात करने का फैसला किया है.
मिल रही जानकारी के अनुसार राज्य के संवेदनशील विधानसभा क्षेत्रों में प्रति कंपनी 100 जवानों के हिसाब से ढाई लाख जवान सुरक्षा संभालेंगे. इसके अलावा प्रत्येक मतदान केंद्र पर वेब कास्टिंग की जाएगी. जो मतदान केंद्र संवेदनशील होंगे, उन्हें चिन्हित करके उनके अंदरूनी हिस्सों की निगरानी के लिए उच्च तकनीक वाले कैमरों का उपयोग किया जाएगा.
चुनाव आयोग ने सभी जिलों के चुनाव अधिकारी यानी डी एम और पुलिस अधीक्षकों से कहा है कि वह अपने क्षेत्र में अवैध हथियार, विस्फोटक के बारे में चुनाव आयोग को जानकारी दें. इसके अलावा उपद्रव करने वालों की चुनाव आयोग ने विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. चुनाव आयोग के निर्देश में यह भी कहा गया है कि पिछले चुनाव के दौरान जो अधिकारी हिंसा में शामिल रहे, अथवा परोक्ष रूप से हिंसा का समर्थन करते रहे, उनकी लिस्ट भेजी जाए.
चुनाव आयोग ने फैसला किया है कि चुनाव में पारदर्शिता लाने के लिए 28 पुलिस जिलों और 6 कमिश्नरेट में विशेष पुलिस पर्यवेक्षक तैनात किए जाएंगे. इसके अलावा चुनाव आयोग के निर्देश में सरकारी भवनों से पोस्टर हटाने की भी बात कही गई है. चुनाव आयोग ने बैनर या विज्ञापन हटाने के निर्देश भी दिए हैं.
इसके अलावा राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों या उम्मीदवारों से कहा गया है कि वे चुनाव प्रचार के क्रम में सरकारी वाहनों का इस्तेमाल नहीं करें. अगर कोई उम्मीदवार किसी की निजी संपत्ति या मकान पर पोस्टर या झंडा लगाने के लिए पहल करता है तो उसे मकान मालिक की लिखित अनुमति प्राप्त करनी होगी. चुनाव आयोग ने जनता से भी अपील की है कि अगर उम्मीदवार नियमों का पालन नहीं करते हैं तो 1950 हेल्पलाइन नंबर पर इसकी जानकारी दें. तुरंत कार्रवाई की जाएगी.
