पश्चिम बंगाल में इस बार दो चरणों में चुनाव हो रहा है. पहले चरण में होने वाला चुनाव भाजपा के गढ़ उत्तर बंगाल के रूप में जाना जाता है. जबकि दूसरे चरण में चुनाव उन क्षेत्रों में होगा जो टीएमसी की मजबूत पकड़ वाले क्षेत्र हैं. चुनावी पंडितों के अनुसार अगर पहले चरण में भाजपा अपनी सीटों को बनाए रख आती है, तभी वह सत्ता की रेस में आ आएगी.
कुछ लोग यह भी मानते हैं कि 23 अप्रैल के चुनाव में ही पता चल जाएगा कि भाजपा राज्य की सत्ता में आती है या नहीं. चुनावी ट्रेड सोशल मीडिया के जरिए जन जन तक पहुंच जाते हैं. 29 अप्रैल को होने वाले चुनाव इससे प्रभावित होंगे . अगर यहां भाजपा के लिए ट्रेंड अच्छा रहता है, तो दक्षिण बंगाल यानी 29 अप्रैल को होने वाले चुनाव में इसका साया बरकरार रहेगा.
पार्टी सूत्रों से भी जानकारी मिल रही है कि पहला चरण चुनावी मुकाबले का सबसे अहम चरण है. आंकड़ों के अनुसार इस चरण में भाजपा की कई कमजोर सीटें हैं. दूसरे चरण में टीएमसी की मजबूत स्थिति है. पहले चरण में भाजपा और टीएमसी के बीच कांटे का मुकाबला होने के आसार हैं.
पिछले विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 77 सीटें जीती थीं. उनमें से 59 सीटें पहले चरण में है. इन 59 सीटों में से 26 सीटें ऐसी थीं जहां बीजेपी को 5% से भी कम के अंतर से जीत मिली थी. वर्तमान में अगर वोटो का थोड़ा उलटफेर होता है, तो इन सीटों का नतीजा पलट सकता है.
दूसरे चरण में बीजेपी की सिर्फ 18 सीटें हैं. 2021 के आंकड़ों के दृष्टिकोण से देखें तो विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में हुए उपचुनाव में बीजेपी को कड़ी शिकस्त मिली है. कुछ विधायकों ने तो पार्टी ही छोड़ दी और इस तरह से बीजेपी की जीती हुई 77 सीटें घटकर 65 रह गई है.
राज्य में 294 विधानसभा सीटों में से बहुमत का आंकडा 148 है. सरकार बनाने के लिए बीजेपी को अभी जितनी सीटें हैं उससे 83 सीटें और जीतनी होगी. दूसरी तरफ टीएमसी है जिसकी मौजूदा ताकत 223 सीटें हैं. जबकि 2021 में पार्टी ने 215 सीटों पर जीत दर्ज की थी.
