हालांकि बंगाल में चुनाव की कोई अधिसूचना जारी नहीं हुई है. लेकिन उससे पहले ही चुनाव की गहमागहमी बढ़ गई है. पश्चिम बंगाल में मुख्य रूप से टीएमसी, भाजपा व वाममोर्चा-कांग्रेस गठबंधन के बीच चुनाव होता है. इस बार राजनीतिक स्थितियां बदली हुई हैं. टीएमसी और भाजपा की ओर से ध्रुवीकरण के बीच मुर्शिदाबाद में टीएमसी से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर के द्वारा एक नया सियासी समीकरण खड़ा किया जा रहा है.
इन सबके बीच प्रदेश की जनता क्या सोच रही है, इसकी तरफ ना तो राजनीतिक दलों और ना ही मीडिया का ध्यान जा रहा है. उत्तर बंगाल में सिलीगुड़ी विधानसभा सीट काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है. सिलीगुड़ी विधानसभा सीट पर किस नेता और किस दल की जीत होगी, यह तो आने वाला समय बताएगा. मगर उससे पहले ही सिलीगुड़ी विधानसभा सीट को लेकर राजनीतिक दलों में लड़ाई शुरू हो गई है.
सवाल यह है कि क्या सिलीगुड़ी की जनता राजनीतिक दलों की लड़ाई में शामिल हो गई है या फिर कुछ अलग सोच रही है? निश्चित रूप से सिलीगुड़ी की जनता पहले से अधिक जागरूक हुई है. इसलिए वह अपना नेता चुनते समय कई बातों का ध्यान रखेगी. माना कि सिलीगुड़ी का पहले से अधिक विकास हुआ है. पर यहां समस्याएं भी कम नहीं है. आज भी सिलीगुड़ी के कई इलाकों में लोगों को पेयजल उपलब्ध नहीं है. सिलीगुड़ी से बहने वाली नदियों जैसे महानंदा, पंचनई आदि का जल आज भी दुषित है. यहां उद्योग और कल कारखानों का भी अभाव है. सिलीगुड़ी का नेता ऐसा होना चाहिए जो यहां के लोगों की समस्याओं को कम से कम कर सके.
सिलीगुड़ी में सड़कों का कायाकल्प तो हुआ है लेकिन यह अभी पर्याप्त नहीं है. शहर में जाम एक प्रमुख समस्या बनकर उभरी है. सिलीगुड़ी नगर निगम और प्रशासन के द्वारा शहर के जाम के समाधान के लिए सभी तरह के कदम उठाए गए हैं. लेकिन स्थिति में कोई खास परिवर्तन नहीं हुआ है. आगामी विधानसभा चुनाव में सिलीगुड़ी का नेता ऐसा होना चाहिए, जो चुनाव जीतने पर सिलीगुड़ी की प्रमुख समस्या जाम के ठोस निदान की दिशा में काम कर सके और सिलीगुड़ी की जनता के बीच इसका सही समाधान प्रस्तुत करे.
सिलीगुड़ी एक छोटा-सा शहर है. लेकिन शहर में गंदगी अब भी ज्यादा है. इसके अलावा यहां कानून एवं व्यवस्था की स्थिति पर भी सवाल उठते रहे हैं. हाल के दिनों में सिलीगुड़ी में चोरी, तस्करी और गुंडागर्दी बढी है. इसके अलावा सिलीगुड़ी में महिला सुरक्षा को विचार कर भी जनता अपने नेता का चुनाव करेगी. सिलीगुड़ी का प्रतिनिधि ऐसा होना चाहिए जो सिलीगुड़ी की जनता की आवाज बनकर विधानसभा में न केवल अपनी बात रखे, बल्कि बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए काम भी करे.
संभवतः अप्रैल में बंगाल में विधानसभा के चुनाव होंगे. विभिन्न दलों की ओर से प्रत्याशियों की घोषणा की जाएगी. जो अपनी-अपनी जीत के दावे करेंगे. इन उम्मीदवारों की ओर से जनता से संपर्क का अभियान भी शुरू किया जाएगा. अगर इन उम्मीदवारों के द्वारा जनता के मन को पढ़ने और समझने का कौशल दिखाया जाता है तो उम्मीदवार की जीत की राह आसान हो सकती है. आज समय वादों का नहीं रहा. आज का समय उम्मीदवार और दल की नीयत और इरादों का रहा है. सिलीगुड़ी की जनता उसे ही अपना कीमती वोट देना चाहेगी, जो काम करने का जुनून, नीयत और दृढ़ इरादा रखता हो. अब देखना होगा कि सिलीगुड़ी की जनता की उम्मीद और आकांक्षाओं की कसौटी पर किस दल का कौन सा नेता खरा साबित होता है!

