भारत और खासकर बंगाल के सभी रीजनल पासपोर्ट कार्यालय को उड़ा दिया जाएगा. पासपोर्ट कार्यालय में बम रखा गया है. अगर बच सको तो बचा लो… इस तरह की धमकी भरा कॉल आता है तो पासपोर्ट ऑफिस में काम करने वाले सरकारी कर्मचारियों से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों की नींद उड़ जाती है और फिर शुरू होती है भागम भाग ,दहशत और पासपोर्ट कार्यालय में बम बरामदगी की उम्मीद से सुरक्षा कार्रवाई. कम से कम आज यह नजारा कोलकाता से लेकर सिलीगुड़ी तक देखा गया.
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एक असामाजिक आतंकी संगठन के द्वारा कोलकाता में प्रशासनिक अधिकारियों को फोन करके धमकी दी जाती है. फोन में कहा जाता है कि रीजनल पासपोर्ट कार्यालय को उड़ा दिया जाएगा. कार्यालय भवन में बम प्लांट कर दिया गया है. इस धमकी भरे फोन कॉल के बाद सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया जाता है. इसके साथ ही प्रशासनिक अमला गुपचुप तरीके से अपने कार्य में जुट जाता है. रीजनल कार्यालय में धमकी भरे फोन कॉल मिलने और प्रशासनिक इंतजाम बढ़ाए जाने के बाद सिलीगुड़ी तथा राज्य में जितने भी पासपोर्ट कार्यालय हैं, उन सब की निगरानी और सुरक्षा बढ़ा दी गई.
कोलकाता की इस खबर के बाद सिलीगुड़ी में माटीगाड़ा परिवहन नगर स्थित पासपोर्ट कार्यालय में भी हड़कंप मच गया. प्रशासनिक तैयारी के साथ परिवहन नगर स्थित पासपोर्ट कार्यालय को तुरंत खाली करा लिया गया. कहीं पासपोर्ट कार्यालय में किसी संगठन ने बम प्लांट ना कर दिया हो, इस आशंका के मद्देनजर यहां काम करने वाले कर्मचारियों को कार्यालय में ऐहतियात के तौर पर प्रवेश करने से रोका गया. तुरंत ही सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नरेट की विशाल पुलिस वाहिनी, बम स्क्वायड टीम, डॉग स्क्वायड टीम और सुरक्षा एजेंसियों का एक विशाल जमावड़ा पासपोर्ट कार्यालय के सामने लग गया.
माटीगाड़ा परिवहन नगर स्थित पासपोर्ट कार्यालय में बम स्क्वॉड की और डॉग स्क्वायड की टीम पहुंची और सच्चाई का पता लगाने में जुट गई. लेकिन डॉग स्क्वायड की टीम बम की मौजूदगी का पता नहीं लगा सकी. जब डॉग स्क्वायड की टीम ने ग्रीन सिग्नल दिया कि पासपोर्ट ऑफिस में बम नहीं है तो जान में जान आई. इस बीच बम स्क्वायड टीम बम पाए जाने की आशंका में पूरे परिवहन नगर और पासपोर्ट कार्यालय के परिसर का चप्पा-चप्पा छान मारा. लेकिन बम बरामद नहीं हो सका.
इस बीच सुरक्षा एजेंसियां भी अपना काम करती रही. सभी संभावित ठिकानों में बम को ढूंढा जाता रहा. बाद में प्रशासन इस नतीजे पर पहुंचा कि यह मात्र एक अफवाह है. इसमें कोई सच्चाई नहीं है. सुबह से चली इस मैराथन भाग दौड़ के बाद दोपहर बाद माटीगाड़ा के पासपोर्ट कार्यालय में काम शुरू हुआ. पहले भी इस तरह के धमकी कॉल अथवा धमकी भरी चिट्ठी विभिन्न संगठनों के द्वारा दी जाती रही है. उनमें से अधिकांश कॉल या चिट्ठी मात्र दहशत फैलाने अथवा अफवाह के लिए जारी की जाती है. इसके जरिए संगठनों की मंशा रहती है कि आम लोगों में दहशत फैलाई जाए.
हालांकि हमारी गुप्तचर और सुरक्षा एजेंसियां काफी सतर्क होती है और इस तरह के कॉल या चिट्ठी की सत्यता की पड़ताल करती है. उसके बाद ही प्रशासन को सभी तरह के ऐहतियातन कदम उठाने के लिए सूचित किया जाता है. आज की यह घटना एक अफवाह जरूर है परंतु यह प्रशासनिक तथा सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता को बहाल रखने के लिए इशारा भी करती है. क्योंकि कई बार अफवाह के बाद घटना को घटते हुए भी देखा गया है. चुनाव से पहले इस तरह की घटनाएं भविष्य में भी देखी जा सकती है. ऐसे में प्रशासन को सचेत हो जाने की जरूरत है.
वर्तमान में सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नरेट घटना की तहकीकात में जुटी है और उच्च पदस्थ अधिकारियों के मार्गदर्शन में यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर यह धमकी भरा फोन कॉल कहां से आया और इसे किसने जारी किया? संगठन का उद्देश्य क्या था और इसके जरिए संगठन अपना क्या स्वार्थ सिद्ध करना चाहता था. क्या इसके पीछे कोई सोची समझी साजिश है या किसी उग्रवादी संगठन का इसमें हाथ है? इन सभी पहलुओं पर सिलिगुड़ी पुलिस कमिश्नरेट और बंगाल पुलिस विचार मंथन कर रही है.
