कल केंद्रीय बजट 2026 के जरिए भारत सरकार ने न केवल आर्थिक बल्कि कूटनीतिक स्तर पर भी बड़ा संदेश दिया है। बजट प्रस्तावों के तहत भारत ने अपने कुछ पड़ोसी देशों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता में कटौती की है, जबकि मित्र देशों को मिलने वाले फंड में इजाफा किया गया है। इस फैसले में सबसे बड़ा झटका बांग्लादेश और मालदीव को लगा है, वहीं नेपाल, भूटान, श्रीलंका और मॉरीशस को ‘तोहफा’ मिला है।
बजट 2026 के अनुसार, बांग्लादेश को दी जाने वाली आर्थिक मदद को आधा कर दिया गया है। पहले भारत बांग्लादेश को 120 करोड़ रुपये की सहायता देता था, जिसे घटाकर अब 60 करोड़ रुपये कर दिया गया है। जानकारों का मानना है कि यह कटौती बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद बनी यूनुस मोहम्मद सरकार के साथ भारत के संबंधों में आई खटास का संकेत है। यह फैसला भारत की बदलती कूटनीतिक प्राथमिकताओं को भी दर्शाता है।
मालदीव को दी जाने वाली आर्थिक मदद में भी 8 प्रतिशत की कटौती की गई है। पहले जहां इस सहायता में बढ़ोतरी की गई थी, वहीं अब इसे घटाकर 550 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसके अलावा म्यांमार को मिलने वाले फंड में भी 14 प्रतिशत की कटौती करते हुए इसे 300 करोड़ रुपये कर दिया गया है। हालांकि अफगानिस्तान को पहले की तरह ही 150 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी।
दूसरी ओर, भारत ने अपने कुछ करीबी और रणनीतिक साझेदार देशों के लिए आर्थिक सहायता बढ़ाई है। नेपाल को दी जाने वाली मदद में 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है और अब उसे 800 करोड़ रुपये मिलेंगे। भूटान के लिए फंड में 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी करते हुए इसे 2,289(नवासी) करोड़ रुपये कर दिया गया है। श्रीलंका और मॉरीशस को भी पहले की तुलना में अधिक सहायता दी जाएगी, जिससे क्षेत्रीय सहयोग को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
एक चौंकाने वाला फैसला ईरान के साथ चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट को लेकर सामने आया है। भारत ने इस परियोजना के लिए दी जाने वाली आर्थिक सहायता को पूरी तरह शून्य कर दिया है। गौरतलब है कि 2024 और 2025 में इस प्रोजेक्ट के लिए 100-100 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। माना जा रहा है कि ईरान के साथ व्यापार को लेकर अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ और वैश्विक दबाव के चलते भारत ने यह कदम उठाया है।
कुल मिलाकर, भारत ने वर्ष 2026 के बजट में मित्र देशों के लिए कुल विदेशी सहायता फंड को बढ़ाकर 5,686 करोड़ रुपये कर दिया है, जो पिछले साल के बजट अनुमान से 4 प्रतिशत अधिक है। हालांकि यह राशि 2025-26 के संशोधित अनुमान से थोड़ी कम है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, केंद्रीय बजट 2026 भारत की विदेश नीति में संतुलन और रणनीतिक स्पष्टता को दर्शाता है, जहां सहयोग उन देशों के साथ बढ़ाया जा रहा है जो भारत के दीर्घकालिक हितों के अनुरूप हैं, जबकि अन्य देशों को कड़ा संदेश दिया गया है।
