April 13, 2026
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ममता बनर्जी को किसकी गिरफ्तारी का डर सता रहा है? मुख्यमंत्री ने क्यों कहा कि बंगाल का एक और विभाजन होगा?

इस समय बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी बनाम बीजेपी के बीच आरोप प्रत्यारोप का एक नया दौर चल रहा है. कोई भी सभा ले लीजिए. अगर टीएमसी की सभा हो तो बीजेपी निशाने पर और बीजेपी की सभा हो तो टीएमसी निशाने पर रहती है. भारतीय जनता पार्टी टीएमसी के 15 साल के शासन का एक्सरे करती नजर आती है, तो दूसरी तरफ टीएमसी अपने पार्टी समर्थको, कार्यकर्ताओं और आम जनता को यह कहकर सचेत करती है कि अगर भाजपा सत्ता में आई तो बंगाल में लोगों के मांस मछली खाने से लेकर उनकी भाषा और संस्कृति को खत्म कर सकती है.

भारतीय जनता पार्टी के नेता रैलियों में लोगों को यह डर दिखाते हैं कि अगर टीएमसी सत्ता में बनी रही तो अगले 5 सालों में बंगाल बांग्लादेश बन जाएगा. यहां के हिंदू अल्पसंख्यक होंगे. उन्हें पूजा पाठ से वंचित कर दिया जाएगा. इत्यादि इत्यादि.

पूरे बंगाल में चाहे बीजेपी हो या टीएमसी दोनों ही पार्टियों के द्वारा डर की राजनीति की जा रही है. एक पार्टी जनता को डर महसूस कराती है तो दूसरी पार्टी भविष्य का डर दिखाती है. जनता समझ नहीं पा रही है कि कौन सा डर सही है और कौन सा डर गलत. लोग कंफ्यूजन में है. जैसे-जैसे चुनाव के दिन करीब आते जा रहे हैं, डर दिखाने की राजनीति का एक और दौर शुरू हो गया है.

आजकल पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी पार्टी के उम्मीदवारों का प्रचार करते हुए पार्टी नेताओं तथा कार्यकर्ताओं को सावधान कर रही हैं. मुख्यमंत्री कहती हैं कि उनके हाथ में फिलहाल कुछ नहीं है. चुनाव आयोग का शासन चल रहा है. ऐसे में पार्टी कार्यकर्ता सतर्क रहें. आने वाले कुछ दिनों में उनकी गिरफ्तारी भी हो सकती है.

रैलियों में मुख्यमंत्री के निशाने पर सबसे पहले भाजपा नेतृत्व होता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा गृह मंत्री अमित शाह होते हैं. उसके बाद SIR को लेकर वह बोलती है. फिर मुख्य चुनाव आयुक्त और पश्चिम बंगाल के चुनाव आयुक्त मनोज अग्रवाल उनके निशाने पर होते हैं. ममता बनर्जी अपनी चुनाव सभाओं में कहती हैं कि बीजेपी उनके उम्मीदवारों को धमका सकती है. बंगाल को बांट सकती है. SIR घोटाले और वोटिंग में गड़बड़ी कर सकती है. इसलिए लोग सावधान रहें.

ममता बनर्जी ने तो यहां तक दावा कर दिया है कि कुछ ही दिनों में बीजेपी डीलिमिटेशन बिल भी ला सकती है. अपनी रैलियों में ममता बनर्जी कह रही है कि बीजेपी चुनाव के दिन चाय में नींद की दवाई मिलाकर लोगों का वोट चुरा सकती है. सुबह से शाम तक जनसभाओं और रैलियों मे एक तरफ भाजपा के लिए टीएमसी निशाने पर रहती है, तो दूसरी तरफ भाजपा टीएमसी के निशाने पर. हालत तो यह है कि बंगाल में विकास की बात नेता नहीं करते. एक दूसरे दल की बुराई और आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला ही यहां चल पड़ा है.

. ममता बनर्जी को इस बात का डर सता रहा है कि सरकारी मशीनरी, जो चुनाव आयोग को रिपोर्ट कर रही है, टीएमसी वर्कर्स के खिलाफ अभियान चला सकती है. वास्तव में चुनाव आयोग ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में निष्पक्ष और हिंसा रहित चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग प्रशासनिक फेरबदल के साथ-साथ असामाजिक तत्वों की गिरफ्तारी भी कर सकता है.

उन्हें डर लग रहा है कि कहीं चुनाव आयोग एक सोची समझी साजिश के तहत उनके कार्यकर्ताओं को निशाना ना बनाए और यही कारण है कि वह अपनी रैलियों में जनता को सावधान कर रही है तो दूसरी तरफ पार्टी कार्यकर्ताओं को भी आगाह कर रही है. ममता बनर्जी आरोप लगा रही है कि राष्ट्रीय जनगणना के बाद शुरू होने जा रही परिसीमन की प्रक्रिया बंगाल को तोड़ने की कोशिश है.

ममता बनर्जी का आरोप है कि बीजेपी बंगाल के लोगों को परेशान और डराने की कोशिश कर रही है. ममता बनर्जी ने आसनसोल और खंडाघोष में एक पर एक बीजेपी पर कई बड़े आरोप लगाए. उन्होंने बंगाल को तीन टुकड़ों में बांटने की बीजेपी की साजिश तक बताया और दावे भी कई बड़े किए हैं. ममता बनर्जी ने कहा है कि बंगाल को तीन भागों में बांटा जाएगा. कुछ हिस्से बिहार में और कुछ हिस्सों को उड़ीसा में मिला दिया जाएगा. इससे उन इलाकों में रहने वाले बांग्ला बोलने वाले लोगों के साथ बुरा होगा.

ममता बनर्जी बीजेपी पर टीएमसी को सरकार से हटाने के लिए 1000 करोड रुपए की डील की बात करती है. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वायरल वीडियो का हवाला दिया जिसमें एक पार्टी के नेता हुमायूं कबीर कहते हैं कि उन्हें इस डील के तहत दो सौ करोड रुपए पहले ही मिल चुके हैं. हालांकि बीजेपी ने इस आरोप से पहले ही इनकार कर दिया है.

दोनों ही पार्टियों के द्वारा शुरू की गई डर की नई राजनीति से जनता भ्रमित है. कौन सही है और कौन गलत है, फिलहाल मतदाता नेताओं की सुन रहे हैं. फैसला तो वे चुनाव के दिन करेंगे कि किसका डर सही है और किसका डर गलत.

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