सिलीगुड़ी की परंपरागत पहचान यहां की चाय, पर्यटन और कारोबार को माना जाता है. उत्तर पूर्व भारत का प्रवेश द्वार के साथ-साथ बांग्लादेश, नेपाल, भूटान की अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर स्थित इस शहर को अब एक नई पहचान मिलने जा रही है. जैसा कि बंगाल सरकार की योजना है, अगर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की कथनी और करनी में ज्यादा अंतर नहीं होता तो जल्द ही सिलीगुड़ी को महाकाल महा तीर्थ से भी जाना जाएगा.
दुनिया के बड़े शिव मंदिरों में से एक सिलीगुड़ी का महाकाल महा तीर्थ माटीगाड़ा में बनने जा रहा है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसका शिलान्यास भी कर दिया है. प्रस्तावित मंदिर 17.41 एकड़ भूमि पर बनेगा. मुख्यमंत्री ने मंदिर के संपूर्ण होने की अवधि भी बता दी है. और इसके साथ ही यह मंदिर सिलीगुड़ी की पहचान कैसे बनेगा, यह भी बता दिया है. मुख्यमंत्री के अनुसार लगभग ढाई से 3 साल में यह मंदिर बनकर तैयार हो जाएगा. यहां रोजाना एक लाख श्रद्धालु दर्शन करेंगे.
प्रस्तावित महाकाल महातीर्थ मंदिर में 216 फीट ऊंची महाकाल की प्रतिमा स्थापित होने वाली है. इसमें 108 फीट ऊंची कांस्य मूर्ति स्थापित होगी, जिसको 108 फीट ऊंचे आधार पर स्थापित किया जाएगा. इसके अलावा मंदिर परिसर में 12 अभिषेक लिंग मंदिर, 12 ज्योतिर्लिंगों की मूर्तियां, म्यूजियम, कल्चरल हॉल, रुद्राक्ष कुंड, अमृत कुंड, दो परिक्रमा पथ, दो नंदी ग्रह, मीटिंग हॉल और सेविनियर भी बनाए जाने वाले हैं.
सिलीगुड़ी को तो वैसे ही धार्मिक नगरी कहा जाता है. अब महाकाल मंदिर के बन जाने से सिलीगुड़ी शहर को एक नई पहचान मिल जाएगी. हालांकि जिस तरह की बंगाल सरकार की योजना है, उसे समय पर पूरा करना कठिन हो सकता है. एक तो बंगाल सरकार के पास फंड की कमी है और दूसरे में अब तक के विभिन्न प्रोजेक्टों का उदाहरण बताता है कि समय पर कभी कोई काम पूरा ही नहीं हुआ. बहरहाल इसमें कोई शक नहीं है कि मुख्यमंत्री का यह ड्रीम प्रोजेक्ट है और उसे हर हाल में पूरा कर लिया जाएगा.
महाकाल महातीर्थ के जरिए पर्यटन, रोजगार के क्षेत्र में भी अवसर बढ़ जाएंगे. व्यापार को नई मजबूती मिलेगी. कम से कम सिलीगुड़ी के साधारण लोगों और व्यवसाईयों के लिए यह मंदिर एक शुभ शगुन होने वाला है. प्रस्तावित मंदिर सामाजिक आर्थिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से राहत देने वाला होगा यही कारण है कि सिलीगुड़ी के लोग भी खासा उत्साहित हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि मुख्यमंत्री का यहां ड्रीम प्रोजेक्ट निर्धारित समय में पूरा होगा
जो लोग माटीगाड़ा, चांद मुनि और आसपास के इलाकों में रहते हैं उनकी खुशी कल से ही बढ़ गई है. जब मुख्यमंत्री ने प्रस्तावित महाकाल महादेव मंदिर का शिलान्यास किया. पर्यटन और सांस्कृतिक विकास से माटीगाड़ा अछूता नहीं रहेगा. इसका मतलब यह भी है कि माटीगाड़ा के लोगों को विकास का भी अवसर मिलेगा. यह विकास व्यापार और रोजगार के क्षेत्र में फलित होगा. यहां आबादी बढ़ेगी और जमीन की कीमत भी बढ़ेगी. इसमें कोई शक नहीं है. जैसा कि मुख्यमंत्री ने भी दावा किया है. अगर सब कुछ अनुकूल रहा तो बहुत जल्द सिलीगुड़ी की सांस्कृतिक पहचान को एक नई गति मिलने वाली है.
