मालदा कांड का मास्टरमाइंड आज बागडोगरा में उस समय गिरफ्तार कर लिया गया, जब वह एयरपोर्ट से भागने की फिराक में था. खुफिया विभाग की सूचना के बाद पुलिस की स्पेशल टीम बागडोगरा एयरपोर्ट के आसपास पहुंच गई थी और घात लगाकर आरोपी का इंतजार कर रही थी. ऑपरेशन की फुल प्रूफ तैयारी थी.
पुलिस और सीआईडी खुफिया विभाग पहले से ही अलर्ट था. मालदा कांड में पुलिस ने जिन 35 लोगों को गिरफ्तार किया था, उनसे पूछताछ के बाद इस कांड के मास्टरमाइंड की तलाश शुरू हो गई थी. मो. इस्लाम को धर दबोचने के लिए सीआईडी और खुफिया विभाग पुलिस को अपनी रिपोर्ट दे रहा था. पुलिस की अलग-अलग टीमें मालदा और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय थी और उसकी तलाश और छापेमारी की हर रणनीति को अंजाम देने की तैयारी थी.
जैसे ही मालदा कांड के मास्टरमाइंड मोफकरूल इस्लाम के बागडोगरा में पाए जाने की जानकारी पुलिस को मिली, पुलिस ने उसे घेरकर गिरफ्तार कर लिया. आरोपी मास्टरमाइंड बंगाल छोड़कर भागने की फिराक में था और बागडोगरा एयरपोर्ट से उड़ान भरने की तैयारी कर रहा था. तभी पुलिस ने उसे दबोच लिया. यह वही इस्लाम था, जिस पर आरोप है कि उसने मालदा जिले के कालियाचक में हिंसा भड़कायी थी. उसका एक वीडियो भी सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है, जिसमें वह अपने गिर्द जमा समर्थकों से कह रहा है कि कहां है सीआईडी? कहां है एसपी? कहां है DM? वह सभी को चैलेंज देता प्रतीत हो रहा है.
मिल रही जानकारी के अनुसार पुलिस ने इस्लाम के खिलाफ पर्याप्त सबूत एकत्र किया था और उसके बाद उसकी तलाश तेज कर दी थी. पुलिस की कई अलग-अलग टीमें बनाई गई. खुफिया जानकारी के आधार पर मालदा और आसपास के इलाकों में ऑपरेशन चलाया गया. अंततः बागडोगरा एयरपोर्ट के टर्मिनल के पास से पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. यह व्यक्ति पेशे से वकील है और एक राजनीतिक चेहरे के तौर पर पहचान रखता है. इस कांड ने टीएमसी सरकार को काफी चोट पहुंचाई है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सफाई में कहना पड़ रहा है कि कानून एवं व्यवस्था उनके हाथ में नहीं है.
मालदा कांड देशभर के समाचार पत्रों और न्यूज़ चैनल की सुर्खियो में है. यह एक ऐसा कांड है, जिसने पश्चिम बंगाल की राजनीति को हिला कर रख दिया है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को रैलियों में सफाई देते देखा जा सकता है. क्योंकि यह पूरा मामला कानून और व्यवस्था से जुड़ा हुआ है. कालियाचक में एस आई आर के काम में लगे 7 न्यायिक अधिकारियों को कुछ लोगों ने बंधक बना रखा था. आरोप है कि लोगों ने इन अधिकारियों पर हमला भी किया था.
इस घटना के बारे में पुलिस को जानकारी देने के बाद भी समय पर पुलिस मौके पर नहीं पहुंची थी. कोलकाता हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त हुआ था. सुप्रीम कोर्ट ने यहां तक कह दिया कि बंगाल में कानून एवं व्यवस्था की स्थिति अत्यंत खराब है. सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार को फटकार भी लगाई थी. कई पुलिस अधिकारियों को मुख्य चुनाव आयुक्त के कोपभाजन का शिकार होना पड़ा है.
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी जनसभाओं में कहते फिर रही है कि भारतीय जनता पार्टी ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की साजिश की है. इस घटना की पृष्ठभूमि में SIR के दौरान बड़े पैमाने पर वोटर लिस्ट से नाम काटना था. स्थानीय लोगों ने इसके विरोध में SIR से जुड़े अधिकारियों को न केवल बंधक बनाया बल्कि उन पर हमला भी किया था. इस तरह की बात प्रकाश में आ रही है. यह भी बताया जा रहा है कि पुलिस प्रशासन को घटना के बारे में जानकारी देने के बावजूद पुलिस मौके पर नहीं पहुंची. बाद में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप और आदेश के बाद बंगाल पुलिस सक्रिय हुई और इस मामले में लोगों की गिरफ्तारी शुरू हुई.
अब तक 35 से ज्यादा लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है. केंद्रीय चुनाव आयोग ने इस मामले में सख्त रूप अपना लिया है. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर घटना की जांच NIA को सौंप दी है. आज NIA की दो टीम मालदा पहुंची और जांच शुरू कर दी है. राज्य के डीजीपी सिद्धनाथ गुप्त और मालदा के एसपी अनुपम सिंह को कड़ी फटकार लगाई गई है. उन्हें निर्देश दिया गया है कि सभी दोषियों को चिन्हित कर कोर्ट में पेश किया जाए. राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल, मुख्य सचिव दुष्यंत नारिवाला और पुलिस के अधिकारियों के साथ हुई एक बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त का गुस्सा सातवें आसमान पर था.
इस बीच इस घटना को लेकर टीएमसी और बीजेपी के बीच जंग शुरू हो चुकी है. भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया है कि मालदा के न्यायिक अधिकारियों के घेराव की योजना टीएमसी ने बनाई थी. उन्होंने दावा किया है कि इस घटना की पृष्ठभूमि कोलकाता में तैयार की गई थी और इस साजिश में टीएमसी के शीर्ष स्तर के नेता शामिल थे. सुवेंदु अधिकारी ने सबीना यास्मीन को जिला स्तर पर कथित योजना की मुख्य सूत्रधार करार दिया है. ममता बनर्जी इसके लिए निर्वाचन आयोग को दोषी ठहराती है. वह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी इस घटना की जिम्मेदार बताती है. बहरहाल, मो. इस्लाम की गिरफ्तारी के साथ ही बंगाल पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल कर ली है.
