भारतीय जनता पार्टी ने राज्य में चुनाव जीतने के लिए काफी मेहनत की है. इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है. राज्य में चुनाव की घोषणा के अगले ही दिन पार्टी ने 144 उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर दी. ममता बनर्जी की दोनों ही सीटें नंदीग्राम और भवानीपुर से सुवेंदु अधिकारी को उतारा गया है. इसका संकेत समझना काफी जरूरी है.
चुनावी विश्लेषक मानते हैं कि इसका एक संकेत यह भी है कि अगर सुवेंदु अधिकारी ने पिछली बार की तरह ममता बनर्जी को परास्त कर दिया और अगर राज्य में भाजपा की सरकार बनती है तो निश्चित रूप से सुवेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री होंगे. लेकिन अगर सुवेंदु अधिकारी ममता बनर्जी को हरा नहीं पाए तो यह भी हो सकता है कि अगर टीएमसी की सरकार पुनः सत्ता में आती है तो शुभेंदु अधिकारी शायद विपक्ष के नेता भी ना रहे. भले ही वह नंदीग्राम से चुनाव क्यों नहीं जीत जाते हैं.
सोमवार का दिन वाममोर्चा और भाजपा के नाम रहा. दोनों ही दलों के द्वारा बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की घोषणा कर दी गई है. मंगलवार टीएमसी के नाम रहा. टीएमसी के उम्मीदवारों की घोषणा कर दी गई है. सोमवार को भाजपा और वाम मोर्चा के द्वारा घोषित उम्मीदवारों में से कई उम्मीदवारों को लेकर पार्टी में असंतोष भी उभर कर आ रहा है. भाजपा की घोषित सूची में अधिकांश मौजूदा विधायक हैं. आठ विधायकों का पत्ता साफ हो गया है. सभी दलों के उम्मीदवारों के द्वारा पूजा पाठ के बाद अपने-अपने क्षेत्र में चुनाव प्रचार शुरू कर दिया गया है.
राज्य में मुख्य मुकाबला टीएमसी और बीजेपी के बीच है. सिलीगुड़ी से शंकर घोष का मुकाबला टीएमसी के गौतम देव से है. अगर उत्तर बंगाल की बात करें तो कूचबिहार उत्तर से श्री सुकुमार राय, शीतलकुची अनुसूचित जनजाति सीट से श्रीमती सावित्री बर्मन, दिनहाटा से श्री अजय राय, तूफानगंज से श्रीमती मालती राभा राय, कुमार ग्राम से श्री मनोज कुमार उरांव, कालचीनी से श्री विशाल लामा, अलीपुरद्वार से श्री परितोष दास, फालाकाटा से श्री दीपक बर्मन, डाबग्राम फुलबारी से श्रीमती शिखा चटर्जी, नागराकाटा से श्री पूना भेंगरा, माटीगाड़ा नक्सलबाड़ी से श्री आनंदमय बर्मन, फांसीदेवा से श्री दुर्गा मुर्मू को भाजपा ने अपना उम्मीदवार बनाया है. यह सभी सिटिंग एमएलए हैं.
सुबेंदु अधिकारी नंदीग्राम के साथ-साथ ममता बनर्जी के गृह नगर क्षेत्र भवानीपुर से भी चुनाव लड़ेंगे. कुछ समय पहले शुभेंदु अधिकारी ने कहा था कि वह भवानीपुर से चुनाव लड़ेंगे और ममता बनर्जी की जमानत जब्त करा देंगे. दूसरी तरफ ममता बनर्जी पूरे आत्मविश्वास के साथ कह रही है कि इस बार टीएमसी पहले से भी भारी बहुमत से चुनाव जीतेगी और उसकी सीटों में इजाफा होगा. ममता बनर्जी ने साफ कहा है कि चाहे कुछ भी कर लो. लेकिन वह हर हाल में चुनाव जीत कर दिखा देगी. उस मुख्यमंत्री की सीट से शुभेंदु अधिकारी चुनाव लड़ रहे हैं. अगर वह दोनों सीटों में से किसी एक सीट पर हार भी जाते हैं, तो भी कोई दिक्कत नहीं होगी.
लेकिन इसका उनकी लोकप्रियता पर असर होगा. शुभेंदु अधिकारी पिछली बार ममता बनर्जी को परास्त करके भाजपा के सिरमौर बन गए थे. अगर उन्होंने यह करिश्मा भवानीपुर में नहीं दिखाया तो जाहिर है कि इसका यह संदेश जाएगा कि जनता में उनकी पकड़ और लोकप्रियता पहले जैसी नहीं रही. पार्टी में इसका नकारात्मक असर होगा. अगर चुनाव के बाद राज्य में टीएमसी की सरकार बनती है और भाजपा सरकार बनते-बनते रह जाती है तो शायद विपक्ष का नेता बनने के लिए सुबेंदु अधिकारी उतनी दिलचस्पी नहीं दिखा पाएंगे. मनोवैज्ञानिक रूप से भी वह थोड़ा निराश होंगे. लेकिन अगर कोई करिश्मा हो जाए और टीएमसी अपनी सत्ता से वंचित रह जाए तो इसमें कोई शक नहीं है कि राज्य में बीजेपी की सरकार बनने पर सुवेंदु अधिकारी ही मुख्यमंत्री पद के दावेदार होंगे.
लेकिन जहां तक भवानीपुर की बात है, यह ममता बनर्जी का घर भी है और उनका एक अभेद्य किला भी है. तृणमूल के सत्ता में आने के बाद यहां से वह कभी चुनाव हारी नहीं.अब शुभेंदु अधिकारी भवानीपुर में डेरा डाल चुके हैं और पूरे आत्मविश्वास के साथ लोगों को समझा रहे हैं कि राज्य में भाजपा की लहर है. अगली सरकार भाजपा की होगी. ममता बनर्जी आउट होगी.जानकार मानते हैं कि अगर सुवेंदु अधिकारी ने यह करिश्मा कर दिखाया तो आसमान में सुराख करने के बराबर ही समझा जाएगा.
