February 10, 2026
Sevoke Road, Siliguri
Uncategorized

सिलीगुड़ी और पहाड़ में विनाशकारी भूकंप की चेतावनी!

सिलीगुड़ी, दार्जिलिंग से लेकर सिक्किम तक का पूरा क्षेत्र भूकंप संभावित संवेदनशील क्षेत्र के अंतर्गत आता है. इन इलाकों में विनाशकारी भूकंप का अनुमान विशेषज्ञ लगा रहे हैं. इसके पीछे कई कारण है और अध्ययन के बाद ही विशेषज्ञों का यह अनुमान कहिए या चेतावनी दी गई है. सिक्किमआपदा प्रबंधन विभाग ने विशेषज्ञों के अनुमान को गंभीरता से लिया है और लोगों को सावधान किया है.

शुक्रवार को भूकंप का पहला झटका लगभग आधी रात को सिक्किम से लेकर सिलीगुड़ी तक महसूस किया गया था. इसका केंद्र सिक्किम में था. उसके बाद से लगातार कई झटके सिक्किम के लोगों ने महसूस किए हैं. सिलीगुड़ी में भी छोटे-बड़े झटके आते रहे. कई लोगों ने महसूस किया तो कई लोगों को कुछ पता ही नहीं चला. क्योंकि भूकंप की तीव्रता 3 या 4 रही है. ऐसे में भूकंप का पता बहुत कम लोगों को चलता है.

विशेषज्ञों के अध्ययन का दायरा विस्तृत है. 100 घंटे में कम से कम 39 भूकंप के हल्के बड़े झटके महसूस किए जा चुके हैं. अध्ययन के बाद विशेषज्ञ मान रहे हैं कि सिलीगुड़ी से लेकर पहाड़ी इलाकों में भूकंप का विशाल रूप देखने को मिल सकता है. विशेषज्ञ इस बात के लिए चिंतित है कि यह पहला मौका है जब 100 घंटों में 39 झटके महसूस किए गए हैं. अध्ययन बताते हैं कि किसी बड़े भूकंप से पहले ऐसे झटके आते रहते हैं. पहली बार सिलीगुड़ी से लेकर सिक्किम और दार्जिलिंग में इतने झटके महसूस किए गए हैं.

आखिर इसका कारण क्या है? विशेषज्ञ इसकी पड़ताल में जुट गए हैं. भूगर्भीय विशेषज्ञ संदीप बनर्जी का कहना है कि स्थिति गंभीर है. क्योंकि इससे पहले इतने झटके कभी नहीं देखे और महसूस किए गए. उन्होंने कहा कि यह बड़े भूकंप से पहले का झटका है. उन्होंने कहा कि बड़े भूकंप से पहले टिड्डों के झुंड की तरह भूकंप के झटके आते रहते हैं, जो एक तरह से लोगों को सावधान करते हैं.

मंगलवार की सुबह सिक्किम के नामची तथा मंगन क्षेत्र में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे. शुक्रवार से ही धरती कांप रही है. क्या इसका कारण पहाड़ी इलाकों में चल रहे निर्माण कार्य तो नहीं है? पिछले कुछ समय से पहाड़ी इलाकों में जलाशयों का निर्माण हुआ है. इसके अलावा सड़कों का निर्माण और पहाड़ के अंदर रेल लाइन बिछाने के लिए गुफा में मार्ग बनाने के लिए डायनामाइट का भी उपयोग किया गया है. क्या इसके कारण धरती में कंपन हो रहा है? क्या प्लेटें अपनी जगह से खिसक रही हैं?

संदीप बनर्जी और दूसरे विशेषज्ञ इसके अध्ययन में जुट गए हैं. लेकिन उन सभी का एक ही मत है कि भविष्य में कुछ बुरा होने वाला है. इसलिए सावधानी जरूरी है. कई विशेषज्ञों का मत यह भी है कि पहाड़ी क्षेत्र से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर चले जाना चाहिए. विशेषज्ञों के अनुमान और चेतावनी से हो सकता है कि लोगों में डर की सृष्टि हो, परंतु इसे डर के रूप में नहीं बल्कि चेतावनी और सुरक्षा के रूप में लिया जाना चाहिए.

हालांकि आपदा प्रबंधन विभाग ऐसे हादसों से निपटने के लिए हर वक्त तैयार रहता है. बहरहाल यह देखना होगा कि विषेशज्ञों का अनुमान वक्त और परिस्थितियों की कसौटी पर कितना खरा साबित होता है. लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं है कि यह पूरा क्षेत्र भूकंप के दृष्टिकोण से अत्यंत संवेदनशील है. अगर सिक्किम में पुन: भूकंप आता है तो सिलीगुड़ी और समतल भी प्रभावित होगा, इसमें कोई दो राय नहीं है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *