February 12, 2026
Sevoke Road, Siliguri
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सिलीगुड़ी के टैक्सी ड्राइवरों की कौन सुनेगा फरियाद!

सिलीगुड़ी के ऑनलाइन टैक्सी ड्राइवर इस समय परेशानी के दौर से गुजर रहे हैं. उन्हें सिलीगुड़ी के अलावा बाकी जगहों पर भाड़ा नहीं मिल रहा है. या उन्हें भाड़ा उठाने नहीं दिया जा रहा है. वह चाहे एनजेपी हो या बागडोगरा या पहाड़ या फिर हो सिक्किम. सब जगह उनका एक ही रोना है कि उन्हें भाड़ा उठाने नहीं दिया जा रहा है. आखिर वे कौन लोग हैं जो उन्हें भाड़ा उठाने से रोक रहे हैं.

इसका एक ही जवाब है कि सब जगह सिंडिकेट राज है. एक एरिया का ड्राइवर जब दूसरे एरिया में भाड़ा कमाने जाता है तो उसे वहां अवरोध का सामना करना पड़ता है. स्थानीय सिंडिकेट अथवा ड्राइवर दूसरे क्षेत्र से आए ड्राइवर द्वारा भाड़ा उठाने की कोशिश में उसके साथ मारपीट करने लगते हैं. इसकी बानगी पूर्व में दार्जिलिंग और सिक्किम में देखी जा चुकी है.

पहाड़ और आसपास के इलाकों को छोड़ दीजिए. खुद एनजेपी में मजाल नहीं है कि बाहर की कोई गाड़ी यहां से बिना कुछ चढ़ावे के भाड़ा उठा सके. सिलीगुड़ी में ही अलग-अलग जगह पर अलग-अलग सिंडिकेट काम करता है. चालकों की मजबूरी है कि उन्हें उनकी शर्तों पर ही गाड़ी चलाना पड़ता है. अगर उन्होंने विरोध किया तो उनके साथ भी मारपीट हो सकती है. पर हम यहां जो बात कर रहे हैं, वह सिलीगुड़ी के ऑनलाइन टैक्सी ड्राइवरों की समस्या से जुड़ा हुआ है.

वर्तमान में उन्हें सिलीगुड़ी से सटे बागडोगरा में भी भाड़ा उठाने नहीं दिया जा रहा है. ये ड्राइवर एयरपोर्ट से आने वाले यात्रियों को पिकअप करने के इंतजार में रोड के किनारे गाड़ी लगाकर रहते हैं. जैसे ही कोई यात्री उनकी गाड़ी की ओर बढ़ता है, तुरंत ही स्थानीय युवा उनकी तरफ बढ़ते हैं और यात्री को गाड़ी में बैठने ही नहीं देते या फिर बाहरी चालकों के साथ गाली गलौज से लेकर मारपीट तक करने लग जाते हैं.

बुधवार को कुछ ऐसा ही मामला बागडोगरा एयरपोर्ट पर देखा गया, जब सिलीगुड़ी का एक ऑनलाइन टैक्सी ड्राइवर एयरपोर्ट से यात्री को उठाने गया तो उसके साथ स्थानीय कुछ युवकों ने मारपीट शुरू कर दी और उसे बैरंग वापस भेज दिया. पीड़ित टैक्सी ड्राइवर के साथियों ने इसका विरोध किया है. बृहस्पतिवार को सिलीगुड़ी के ड्राइवरों ने इस घटना के विरोध में सड़क मार्ग अवरूद्ध करने की कोशिश की. उन्होंने अपनी एकजुटता का परिचय देते हुए एयरपोर्ट से आने वाली गाड़ियों को जाने नहीं दिया. उन्हें रास्ते में ही रोक दिया. बाद में पुलिस प्रशासन के दखल के बाद आवाजाही सामान्य हो सकी.

आश्चर्य की बात तो यह है कि यह घटना ना पहाड़ पर हुई है और ना ही सिलीगुड़ी से बाहर. यह घटना बागडोर एयरपोर्ट पर हुई है. सिलीगुड़ी के ऑनलाइन कैब ड्राइवर अपनी कमाई के लिए बागडोगरा एयरपोर्ट पर निर्भर करते हैं. सिलीगुड़ी में कम से कम 500 कैब ड्राइवर हैं, जिनकी जीविका आसपास के यात्रियों की बुकिंग पर निर्भर करती है. कम से कम सिलीगुड़ी से 50 से 60 गाड़ियां बागडोगरा एयरपोर्ट का चक्कर लगाती हैं. इन गाड़ियों के लिए एयरपोर्ट पर पार्किंग की भी सुविधा उपलब्ध नहीं है. ड्राइवर सड़क के किनारे अपनी गाड़ी लगाकर रहते हैं.

सबसे बड़ा ज्वलंत सवाल यह है कि लाखों रुपए निवेश करने के बाद जब गाड़ी मालिक गाड़ी खरीदता है तो वह गाड़ी को घर पर रखने के लिए नहीं. बल्कि उसका उद्देश्य भाड़ा कमाना और परिवार चलाना होता है. जब गाड़ी चले ही नहीं तो ऐसे में वह गाड़ी का इएमआई भरने से लेकर घर का खर्च कैसे चलाएगा? बुकिंग पर निर्भर करने वाले इन cab ड्राइवरों को सिलीगुड़ी से बाहर जाना पड़ता है और बाहर से भाड़ा भी उठाना पड़ता है. तब जाकर उनकी रोजी-रोटी चलती है और गाड़ी का लोन भी भर पाते हैं. अगर उन्हें बाहर जाने से रोका जाता है या आसपास के इलाकों से भाड़ा उठाने नहीं दिया जाता है तो ऐसे में वह करें तो क्या करें. कौन सुनेगा उनकी फरियाद?

जो भी हो, इस तरह से एक दूसरे के पीछे पड़ने और बदले की भावना से काम करने से समस्या का समाधान नहीं हो सकता है. इसके लिए प्रशासनिक पहल की जरूरत है. ड्राइवरों के बीच एकता कायम करने से लेकर कानून का पालन करने की ठोस रणनीति बनाने की जरूरत है. खाओ और खाने दो के सिद्धांत पर चलकर ही इस समस्या का समाधान ढूंढा जा सकता है. कैब ड्राइवर कहीं से भी भाड़ा उठा सकते हैं. उनके बीच एकता, परस्पर सहयोग और सौहार्द का वातावरण होना चाहिए.

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