सिलीगुड़ी के आसपास एक ऐसा बाजार है, जहां भूटानी मुद्रा चलन में है. यहां पर कारोबारी और क्रेता दोनों ही भूटानी मुद्रा में लेनदेन करते हैं. अगर आप यहां भूटानी मुद्रा नहीं ले सकते तो आपका कारोबार ठप हो सकता है. यह क्षेत्र भारत में है. वैसे तो यहां भारतीय करेंसी चलन में होना चाहिए. लेकिन यहां भूटान की मुद्रा ही चलती है और दुकानदारों को ना चाहते हुए भी भूटानी मुद्रा लेनी पड़ती है. क्या आप जानते हैं कि यह कौन सा स्थान है? तो चलिए आपको बताते हैं.
यह स्थान है जलपाईगुड़ी जिले में भारत भूटान सीमा पर स्थित जय गांव और यहां जयगांव में बड़ा सा बाजार लगता है. इस बाजार में ज्यादातर भूटानी खरीददार आते हैं. भूटान में फूंछोलिंग एक ऐसी जगह है, जहां भूटानी नागरिकों के साथ-साथ भारतीय नागरिक भी रहते हैं. फूंछोलिंग और आसपास के क्षेत्र से अनेक भूटानी नागरिक बॉर्डर पार करके जय गांव में आते हैं और यहां बाजार करते हैं. वह भूटानी मुद्रा में ही लेनदेन करते हैं. वर्तमान में जय गांव में भूटानी मुद्रा विनिमय केंद्र स्थापित नहीं है. इसलिए यहां के व्यापारियों की भी मजबूरी है.
भारत और भूटान के बीच वर्षों पुरानी मित्रता है. व्यापार, संपर्क और आवागमन में दोनों देशों के नागरिक आवागमन करते रहते हैं. जय गांव से बड़ी संख्या में लोग भूटान जाते हैं और भूटान से भी बड़ी संख्या में लोग जयगांव आते हैं. जय गांव का व्यापार पूरी तरह भूटानी ग्राहकों पर ही निर्भर करता है. यहां के व्यापारी पिछले दो दशकों से भूटानी मुद्रा विनिमय केंद्र की स्थापना की मांग केंद्र सरकार से कर रहे हैं. लेकिन अभी तक उनकी यह मांग पूरी नहीं हुई है.हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने बंगाल दौरे के क्रम में भूटानी नागरिकों को भारतीय यूपीआई के माध्यम से भुगतान की अनुमति देने का संकेत दिया है.
लेकिन मौजूदा समस्या गंभीर है. भूतनी मुद्रा विनिमय केंद्र ना होने के कारण व्यापारियों को खुद ही नोट बदलने का शुल्क देना पड़ता है. वर्तमान में ₹100 बदलने पर ₹5 तक अतिरिक्त व्यापारियों को घाटा वहन करना पड़ता है. इससे छोटे व्यापारियों को भारी नुकसान होता है. जयगांव मर्चेंट एसोसिएशन के सभापति रमाशंकर गुप्ता बताते हैं कि जब प्रणव मुखर्जी देश के वित्त मंत्री थे, तभी से जय गांव में भूटानी मुद्रा विनिमय केंद्र स्थापित करने की मांग होती रही है. लेकिन अभी तक केंद्र सरकार ने यहां के व्यापारियों की मांग पूरी नहीं की है. स्थानीय व्यापारी चाहते हैं कि अगर सरकार यहां यूपीआई पेमेंट शुरू कर दे, तो समस्या काफी हद तक कम हो सकती है.
व्यापारियों का रोना यह है कि पहले ₹100 भूटानी नोट बदलने पर 60-70 पैसे अतिरिक्त देने पड़ते थे लेकिन हाल के दिनों में यह राशि बढ़ गई है.स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि भूटानी ग्राहक दुकानों में आते हैं और वे भूटानी नोट पकड़ाते है. यदि नहीं लिया गया तो ग्राहक दूसरी दुकान में चले जाएंगे. इसलिए यहां के व्यापारियों ने भारत सरकार और भूटान में कार्यरत भारतीय कंसल्टेंट जनरल के पास भी भूटानी नागरिकों के लिए यूपीआई शुरू करने की मांग रखी है.
जयगांव के व्यापारियों की चिर प्रतीक्षित मांग को देखते हुए कालचीनी के विधायक और जलपाईगुड़ी के सांसद ने भी भारत सरकार से व्यापारियों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार करने का अनुरोध किया है. चुनाव का समय है. इसलिए यहां के व्यापारियों को लगता है कि केंद्र सरकार उनकी मांगों पर विचार करेगी और यहां भूटानी मुद्रा विनिमय केंद्र की स्थापना हो जाएगी. इसी आशा एवं विश्वास में जयगांव के व्यापारी केंद्र सरकार की घोषणा का इंतजार कर रहे हैं.
