भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज नई दिल्ली से विमान के द्वारा बागडोगरा पहुंची और अपने निर्धारित कार्यक्रम में भाग लिया. लेकिन उनका गोसाईपुर स्थित एयरपोर्ट अथॉरिटी के उत्तरा मैदान में आयोजित आदिवासी और संथाल सम्मेलन में दिया गया भाषण राजनीतिक भूचाल लेकर आया. खासकर टीएमसी राष्ट्रपति के बयान से काफी नाराज है.
टीएमसी नेता और सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर गौतम देव ने भी हैरानी जताई है और कहा है कि राष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की ओर से इस तरह का बयान अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है. आखिर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ऐसा क्या कह दिया, जिससे टीएमसी उनके भाषण से काफी नाराज बताई जा रही है?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का यह बयान उस वक्त सामने आया जब वह गोसाईपुर के सम्मेलन में भाग लेने के बाद बिधाननगर में आयोजित एक अन्य आदिवासी सभा में शिरकत लेने पहुंच गई. उन्होंने वहां अपने हाथ में माइक लेकर आदिवासी नर नारियों के बीच कुछ इस तरह का बयान दिया जैसे कि आमतौर पर एक राजनेता का बयां होता है.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने परोक्ष रूप से टीएमसी पर आरोप लगाते हुए कहा कि जहां तक मुझे जानकारी है, पहले यहीं सम्मेलन होने वाला था. लेकिन अचानक जगह बदल दी गई .लेकिन मुझे यह ठीक नहीं लगा. फिर भी आप लोगों ने जिस तरह से मेरा स्वागत किया है, उसके लिए मैं काफी खुश और आपका आभारी हूं. मेरे यहां आने से हो सकता है कि कुछ लोग दुखी होंगे. क्योंकि वह चाहते ही नहीं थे कि मैं आपके बीच यहां इस तरह से आऊं.
द्रौपदी मुर्मू ने अपनी पीड़ा और दुख का इजहार करते हुए कहा कि संवैधानिक रूप से जब राष्ट्रपति किसी कार्यक्रम में आते हैं तो राष्ट्रपति का स्वागत करने के लिए मुख्यमंत्री या उनके किसी प्रतिनिधि मंत्री का मौजूद रहना आवश्यक होता है. लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उनका स्वागत करने नहीं आई और ना राज्यपाल ही यहां आए. राज्यपाल की बात तो मैं समझ रही हूं. अचानक बदलाव के कारण वे यहां सभा में उपस्थित नहीं हो सके. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इतने पर भी नहीं रुकी.
उन्होंने आगे कहा कि बिधाननगर का यह मैदान काफी बड़ा था और यहां बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो सकते थे. कम से कम इस मैदान में 5 लाख लोग तक एकत्र हो सकते थे. उन्होंने कहा कि मुझे किसी से कोई गिला शिकवा नहीं है. ममता बनर्जी मेरी बहन की तरह है. और मैं बंगाल की भी बेटी हूं. जो भी हो, मेरा कार्यक्रम हुआ. मुझे इसमें खुशी है. राष्ट्रपति का यह बयान सुर्खियों में है.
अब टीएमसी की ओर से इस पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आने लगी है. टीएमसी नेता गौतम देव ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह स्वयं राज्य सरकार के प्रतिनिधि के रूप में राष्ट्रपति का स्वागत करने गए थे. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कोलकाता में धरना दे रही है. इसलिए वे नहीं आ सकती थी. लेकिन मैं तो राष्ट्रपति का स्वागत करने के लिए मौजूद था. उन्होंने उनके बयान पर आश्चर्य व्यक्त किया है.
आखिर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस तरह का बयान देकर अपनी पीड़ा का इजहार क्यों किया है? तो बता दे आपको कि आदिवासी सम्मेलन निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार फांसी देवा ब्लॉक के बिधाननगर स्थित संतोषिनी स्कूल मैदान में आयोजित होने वाला था. लेकिन बाद में राष्ट्रपति के सुरक्षा प्रोटोकॉल के चलते कार्यक्रम स्थल को बदलकर गोसाईपुर कर दिया गया. गोसाईपुर में कार्यक्रम करने के बाद राष्ट्रपति विधान नगर स्थित एक अन्य आदिवासी सम्मेलन को संबोधित करने गई थी.
राष्ट्रपति के इस तरह के राजनीतिक बयान को लेकर नक्सलबाड़ी के एसडीपीओ सौम्यजीत राय ने सफाई में कहा है कि प्रशासन की ओर से राष्ट्रपति के कार्यक्रम के लिए बिधाननगर और गोसाईपुर दोनों मैदान दिखाए गए थे. बाद में राष्ट्रपति की सुरक्षा टीम ने गोसाईपुर के मैदान को कार्यक्रम स्थल के रूप में चुना था. जो भी हो, भारत के आजादी के इतिहास में कदाचित यह पहला मौका है, जब किसी राष्ट्रपति के द्वारा इस तरह के कार्यक्रम में परोक्ष या प्रत्यक्ष रूप से किसी राजनीतिक दल पर प्रहार किया गया हो!
